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सूरज ने फक्कड़ से कहा:
"मुझे झुक कर सलाम कर !"
"तुझे सलाम करूं ? मगर क्यों?"
"ये दुनिया का दस्तूर है, चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते हैं !"
"करते होंगे, मगर मैं तेरे आगे सिर नहीं झुकऊँगा !"
"मगर क्यों ?"
"क्योंकि तू बहुत कमज़ोर और निर्बल है, जिस दिन सबल हो जाएगा मैं तेरे आगे सर ज़रूर झुकाऊंगा !"
"कमज़ोर और निर्बल ? और वो भी मैं ?"
"हाँ !"
"तो अगर मैं ये साबित कर दूं कि मैं सबल हूँ, तो क्या तुम मुझे सलाम करोगे?"
"एक बार नही सौ सौ बार सिर झुकाकर सलाम करूँगा !"
"तो फिर जल्दी से बतायो कि तुम्हें यकीन दिलवाने के लिए मुझे क्या करना होगा ?
फक्कड़ ने मुस्कुराते हुए कहा:
"एक बार, सिर्फ एक बार रात में उदय होकर दिखा दो !"

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 21, 2012 at 2:05pm

योगराज जी  बहुत रोचक एवं सन्देश परक  कहानी है मजा आ गया पढ़ के |अपनी सबलता पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और कभी किसी को फक्कड़ नहीं समझना चाहिए हर कोई सम्पूर्ण नहीं होता कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है जो फक्कड़ जैसे पकड़ लेते हैं इसी से मिलती एक घटना बताती हूँ एक गाँव की लड़की के सामने एक शहर की लड़की शेखी बघार रही थी की मेरे घर में तीन चार कारे हैं तो गाँव की लड़की   ने कहा तो क्या हुआ मेरे घर में तीन चार गाय हैं जो दूध देती हैं क्या तेरी कारे दूध दे सकती हैं ???


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:14pm

आपकी तारीफ मेरे लिए बहुत मायने रखती है भाई अरुण पाण्डेय जी, आपको लघुकथा पसंद आई यह जान कर बहुत संतोष हुआ. आपका हार्दिक आभार.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:12pm

महिमा जी, आपको लघुकथा पसंद आई - आपका हार्दिक आभार. उस से भी ज्यादा ख़ुशी यह जान कर हुई कि इस प्रयास से आपको लघुकथ का शिल्प समझ आया. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:12pm

धन्यवाद भाई भास्कर अग्रवाल जी.

Comment by Abhinav Arun on May 21, 2012 at 12:11pm

संभव हो इसे पढ़ा हो , पर आज फिर पढ़ा ग़ज़ब तासीर .. सशक्त रचना | हार्दिक साधुवाद !!

Comment by MAHIMA SHREE on April 16, 2012 at 9:30pm
आदरणीय सर ,
इस कथा के जीवंत संवाद ने मुस्कराहट ला दी / सच फक्कड़ ही है जो किसी को भी टक्कर देने का कुवत रखता है , क्योंकि उसके पास तो खोने को कुछ भी नहीं है , इसलिए तो वो सबसे सबल है :)
आनंद आ गया इसको पढ़ कर और मुझे थोड़ी -२ लघु के मायने भी समझ में  आ गए :)
आपको बहुत -२ बधाई  ..साभार
 
 
Comment by Bhasker Agrawal on December 25, 2010 at 2:18am
सही बात है स्तिथि अनुकूल हो तो कोई भी महान बन सकता है..बहुत बढ़िया

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:05am
शुक्रिया कल्पना गावली जी !

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:05am
आदरणीय चेतन साहिब, आपने बिलकुल सही पहचान की है फक्कड़ की ! आपको लघुकथा पसंद आई यह जानकर बहुत सुकून मिला ! कृपया आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखें !

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:03am
वन्दे मातरम राकेश गुप्ता जी, आपको लघु कथा पसंद आई ये जानकर बहुत अच्छा लगा ! कृपया स्नेह बनाये रखें !

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