For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सूरज ने फक्कड़ से कहा:
"मुझे झुक कर सलाम कर !"
"तुझे सलाम करूं ? मगर क्यों?"
"ये दुनिया का दस्तूर है, चढ़ते सूरज को सभी सलाम करते हैं !"
"करते होंगे, मगर मैं तेरे आगे सिर नहीं झुकऊँगा !"
"मगर क्यों ?"
"क्योंकि तू बहुत कमज़ोर और निर्बल है, जिस दिन सबल हो जाएगा मैं तेरे आगे सर ज़रूर झुकाऊंगा !"
"कमज़ोर और निर्बल ? और वो भी मैं ?"
"हाँ !"
"तो अगर मैं ये साबित कर दूं कि मैं सबल हूँ, तो क्या तुम मुझे सलाम करोगे?"
"एक बार नही सौ सौ बार सिर झुकाकर सलाम करूँगा !"
"तो फिर जल्दी से बतायो कि तुम्हें यकीन दिलवाने के लिए मुझे क्या करना होगा ?
फक्कड़ ने मुस्कुराते हुए कहा:
"एक बार, सिर्फ एक बार रात में उदय होकर दिखा दो !"

Views: 1300

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on May 21, 2012 at 2:05pm

योगराज जी  बहुत रोचक एवं सन्देश परक  कहानी है मजा आ गया पढ़ के |अपनी सबलता पर कभी भी घमंड नहीं करना चाहिए और कभी किसी को फक्कड़ नहीं समझना चाहिए हर कोई सम्पूर्ण नहीं होता कोई न कोई कमजोरी जरूर होती है जो फक्कड़ जैसे पकड़ लेते हैं इसी से मिलती एक घटना बताती हूँ एक गाँव की लड़की के सामने एक शहर की लड़की शेखी बघार रही थी की मेरे घर में तीन चार कारे हैं तो गाँव की लड़की   ने कहा तो क्या हुआ मेरे घर में तीन चार गाय हैं जो दूध देती हैं क्या तेरी कारे दूध दे सकती हैं ???


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:14pm

आपकी तारीफ मेरे लिए बहुत मायने रखती है भाई अरुण पाण्डेय जी, आपको लघुकथा पसंद आई यह जान कर बहुत संतोष हुआ. आपका हार्दिक आभार.


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:12pm

महिमा जी, आपको लघुकथा पसंद आई - आपका हार्दिक आभार. उस से भी ज्यादा ख़ुशी यह जान कर हुई कि इस प्रयास से आपको लघुकथ का शिल्प समझ आया. 


प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on May 21, 2012 at 12:12pm

धन्यवाद भाई भास्कर अग्रवाल जी.

Comment by Abhinav Arun on May 21, 2012 at 12:11pm

संभव हो इसे पढ़ा हो , पर आज फिर पढ़ा ग़ज़ब तासीर .. सशक्त रचना | हार्दिक साधुवाद !!

Comment by MAHIMA SHREE on April 16, 2012 at 9:30pm
आदरणीय सर ,
इस कथा के जीवंत संवाद ने मुस्कराहट ला दी / सच फक्कड़ ही है जो किसी को भी टक्कर देने का कुवत रखता है , क्योंकि उसके पास तो खोने को कुछ भी नहीं है , इसलिए तो वो सबसे सबल है :)
आनंद आ गया इसको पढ़ कर और मुझे थोड़ी -२ लघु के मायने भी समझ में  आ गए :)
आपको बहुत -२ बधाई  ..साभार
 
 
Comment by Bhasker Agrawal on December 25, 2010 at 2:18am
सही बात है स्तिथि अनुकूल हो तो कोई भी महान बन सकता है..बहुत बढ़िया

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:05am
शुक्रिया कल्पना गावली जी !

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:05am
आदरणीय चेतन साहिब, आपने बिलकुल सही पहचान की है फक्कड़ की ! आपको लघुकथा पसंद आई यह जानकर बहुत सुकून मिला ! कृपया आशीर्वाद यूँ ही बनाये रखें !

प्रधान संपादक
Comment by योगराज प्रभाकर on November 1, 2010 at 11:03am
वन्दे मातरम राकेश गुप्ता जी, आपको लघु कथा पसंद आई ये जानकर बहुत अच्छा लगा ! कृपया स्नेह बनाये रखें !

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity


सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"  आदरणीय अशोक भाईजी, श्रावण मास का आज प्रथम सोमवार है. ऐसे पवित्र दिवस पर आप द्वारा प्रस्तुत…"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on रोहित डोबरियाल "मल्हार"'s blog post दास्तां
"आदरणीय रोहित डोबरियाल "मल्हार" जी, आपकी भावुक प्रस्तुतीकरण का स्वागत है.  आप…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"  निर्निमेष आँखों की प्रतीक्षा उत्कट तीव्रता के साथ शाब्दिक हुई है, आदरणीय विजय निकोर…"
Monday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"वाह वाह वाह .. सावन की कजरी का आधुनिक रूप गुदगुदा गया, आदरणीय आशीष जी.  सही भी है, प्रकृति के…"
Monday
आशीष यादव replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय श्री अशोक कुमार जी इस कजरी पर टिप्पणी के लिए आपको बहुत बहुत धन्यवाद।  आज के परिवेश…"
Jul 27
Ashok Kumar Raktale replied to आशीष यादव's discussion कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी) in the group भोजपुरी साहित्य
"आदरणीय आशीष यादव जी सादर, सावन की सुंदर और मधुर  फुहारों में यह कजरी की प्रस्तुति  बहुत…"
Jul 27
vijay nikore posted a blog post

सांकल मन के द्वार पर

सांकल मन के द्वार परजब-जब जहाँ कहीं फूल खिलेयाद तुझे किया था हमने ...कहती थी न ..."क्या...तुम्हारे…See More
Jul 27
आशीष यादव added a discussion to the group भोजपुरी साहित्य
Thumbnail

कइके हमके ब्लाॅक पिया ना ……..  (कजरी)

काहें सावन में देला अइसे शॉक पिया कइके हमके ब्लाॅक पिया ना …….. मनवा तोहके पुकारे नैना फोनवा…See More
Jul 26
Ashok Kumar Raktale posted a blog post

हरिगीतिका छंद

  हरि नाम लो हरि नाम लो हरि, नाम लो  हरि नाम लो।यह नाम  ही  है  सत्य  मानव,  भोर लो नित शाम…See More
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी जी सादर,  चौपाइयों की इस प्रस्तुति पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हृदय से…"
Jul 24
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post चौपाइयाँ
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत चौपाइयों की सराहना के लिए आपका हार्दिक आभार. जी !…"
Jul 24
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक - - - - शोखी

दोहा पंचक. . . . . शोखीशोख उमर की शोखियाँ, चंचल दृग संकेत ।भीगा यौवन मद भरा, दिल को करे अचेत…See More
Jul 21

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service