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नतमस्तक हो 
श्रद्धानत हो 
निर्विकार हर भाव करें...
प्रश्नातीत हुए 
अपनों का 
शुद्ध मनस कर श्राद्ध करें l
.
स्थाई प्रतिक्रिया-
हीनता, ओढ़ 
अबोल जो बिम्ब हुए...
उनके ओजस 
की चादर, अदृश्य 
मगर, एहसास करें l
.
चेतन से
अवचेतन की
सीमा रेखाएं जुड़ती हैं...
स्पर्शबिन्दु 
सद्-भावों के
सद्-ऊर्जित कर सद्गात करें l
 .
नतमस्तक हो 
श्रद्धानत हो 
निर्विकार हर भाव करें...
प्रश्नातीत हुए 
अपनों का 
शुद्ध मनस कर श्राद्ध करें l
मेरे नानाजी (स्व० श्री मिलाप चंद जी ) को समर्पित 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 3, 2012 at 9:13pm

पितृपक्ष पर भी रचना हो सकती है? इतनी संयत हो सकती है ? वाह !

चेतन से
अवचेतन की
सीमा रेखाएं जुड़ती हैं...
स्पर्शबिन्दु 
सद्-भावों के
सद्-ऊर्जित कर सद्गात करें ..
इन पंक्तियों पर विशेष बधाई, डॉ. प्राची.
Comment by पियूष कुमार पंत on October 3, 2012 at 8:18pm

सुंदर प्रस्तुति....... 

श्राद्ध पक्ष पर एक सार्थक रचना प्रस्तुत करने के लिए हार्दिक बधाई......... 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 3, 2012 at 7:49pm

आदरणीय इ. वीर प्रकाश पांचाल जी, इस रचना निहित भाव आप तक संप्रेषित हो सके , यह लेखन कर्म को उत्साहित कर रहा है, इस हेतु हार्दिक आभार.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 3, 2012 at 7:45pm

हार्दिक आभार आदरणीय लक्ष्मण प्रसाद लाडिवाला जी..... बहुत ख़ुशी हुई कि आपको यह रचना पसंद आयी.

मैंने जिस निर्विकार भाव की  बात की  है, उसमें बदले में आशीर्वाद की कामना भी नहीं आती, सिर्फ यह भाव आता है कि पूर्वजों को सद्गति प्राप्त हो. 

इसके भावों को सराहने हेतु हार्दिक आभार.

Comment by Er.vir parkash panchal on October 3, 2012 at 7:25pm

sanskaron ke khusboo ka ehsas,nice...

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 3, 2012 at 10:41am
नतमस्तक हो, श्रद्धानवत हो, 
निर्विकार हर भाव करें...
प्रश्नातीत हुए अपनों का 
शुद्ध मनस कर श्राद्ध करें ल
-हमारे पूर्वजों के प्रति श्रद्धा भाव रख कर ही उनके आशर्वाद से हम फलफूल सकते है | 
उनके प्रति श्रद्धा भाव ही सबसे शुद्ध श्राद्ध होगा, अच्छे भाव के रचना हार्दिक बधाई डॉ. प्राची जी   

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