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इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों -----------

तुमसे सीखा हंसना मैंने आखिर मुझे रुलाया क्यों ....
इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों ...

तेरी यादें, ख़त तेरे कुछ केवल बचा खजाने में 
नींदें, दिल का चैन , खो गया तेरे ख्वाब सजाने में
सोना था तो सो जाते तुम नाहक मुझे जगाया क्यों 
इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों -----------

काँटों पर चलना था चलते, लेकिन तुम भी होते साथ 
जब भी ठोकर गर मैं खाता तुम दे देते अपना हाथ 
वादे ढेरों लेकिन तुमने इक भी नहीं निभाया क्यों 
इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों -----------

ताने देती दुनिया सारी सहना अब मजबूरी है 
तुझसे रिश्ता कर के कर ली हर रिश्ते से दूरी है 
तू मेरा आइना है सच सबको ये बतलाया क्यों 
इतनी दूर चले जाना था इतनी पास बुलाया क्यों .................

 
तन्हाई , बेचैनी , बेबसी , अश्कों की सौगात मिली 
दर्देदिल ने जब जब ऑंखें खोली तब तब रात मिली 
इक मोहब्बत इतने गम पहले नहीं बताया क्यों-----------
 

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Comment

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मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on October 2, 2012 at 2:18pm

आदरणीय अजय शर्मा जी, बहुत ही खुबसूरत अभिव्यक्ति है, मोहब्बत की दुनिया तो दोधारी तलवार है भाई, इस नज्म पर बधाई स्वीकार करें |


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 2, 2012 at 2:15pm

सुन्दर भाव अभिव्यक्ति हेतु बधाई आ. अजय जी 

कृपया ध्यान दे...

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