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बाबा जी ओये बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी ओए
पाकिस्तान बना समुन्दर चीन चलाये चप्पू जी
रामदेव का स्वदेशी अभियान बना रहा भारत महान
काला धन और भ्रष्टाचार देश की परम सुखी संतान
अन्ना को देश गांधी बोले हुंकार की उसके सिंहासन डोले
थे कभी अलग अलग दोनों अब अन्ना संग राम देव बोले
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

जनता में विश्वास जगा है जान गए किस किस ने ठगा है
राम देव को मिल गया ज्ञान क्या दगा है कौन सगा है
सोयी जनता चेत रही है बेईमानों को देख रही है
शान्ति अहिंसा का आन्दोलन गा रही जनता दिल खोले
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

आँखों में सुन्दर सपने संजोये जल्द होंगे पूरे अपने
जमा पड़ा धन आएगा नया नया रोजगार दिलाएगा
मरेंगे न अब बच्चे भूखे नया भारत खिल खिलाएगा
होगी चारों तरफ हरियाली नयी धुन बच्चा बच्चा गायेगा
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में अब न कोई भेद रहेगा
लड़ते जो भाषा धर्म जाति पर सबका मन एक रहेगा
होली दीवाली ईद गुरुपर्व सब मिल साथ मनाएंगे
पहनेगी बालाएं धानी चूनर बेला संग अलबेला संग सब गायेंगे
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

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Comment

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Comment by Yogi Saraswat on June 12, 2012 at 10:49am

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में अब न कोई भेद रहेगा
लड़ते जो भाषा धर्म जाति पर सबका मन एक रहेगा
होली दीवाली ईद गुरुपर्व सब मिल साथ मनाएंगे
पहनेगी बालाएं धानी चूनर बेला संग अलबेला संग सब गायेंगे
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

बहुत सुन्दर शब्द संयोजन ! तात्कालिक प्रभाव से लागू होने वाली सटीक एवं सार्थक रचना , आदरणीय श्री कुशवाहा जी बहुत बहुत बधाई !

Comment by Arun Sri on June 12, 2012 at 10:41am

बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी

बहुत हल्के फुल्के अंदाज़ा में बहुत बड़ी उम्मीद की बात करती रचना ! बहुत बढ़िया !


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on June 12, 2012 at 9:49am

bahut sundar rachna pradeep ji badhaai .

Comment by SANDEEP KUMAR PATEL on June 12, 2012 at 9:18am

behad khoobsoorat bhav samete rachana aadarneey sir ji ........badhai aapko

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on June 11, 2012 at 8:42pm

बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी...कुशवाहा जी , पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण में अब न कोई भेद रहेगा
लड़ते जो भाषा धर्म जाति पर सबका मन एक रहेगा
होली दीवाली ईद गुरुपर्व सब मिल साथ मनाएंगे
पहनेगी बालाएं धानी चूनर बेला संग अलबेला संग सब गायेंगे
बाबा जी ओए बाबा जी गाओ सा रे गा मा जी...., ये सपना कब पूरा होगा , पता नहीं . पर आशा तो बनाये रखना है .. बधाई .

Comment by कुमार गौरव अजीतेन्दु on June 11, 2012 at 3:35pm
बड़ी रोचक रचना कुशवाहा सर। बहुत अच्छी। बधाई।

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