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हाँ वो मेरी बेटी है

हाँ  वो  मेरी   बेटी  है  

जो  बगल  में  लेटी है  

मेरा  प्यार  है  वो  

जीवन  की  बहार  है  वो 

हमारे प्यार की   निशानी 

एक अनकही   कहानी   

खिलखिलाहट   उसकी  

दीवाना  करती  है  

जाएगी  दूजे  घर  

एक  डर  भरती   है  

खिली  इस  बगिया   में 

वो  उपवन  कैसा  होगा  

कली  मासूम  सी 

काँटों  मैं  घिरी  होगी

दूँगी  वो  शिक्षा 

होगी रात तो  

कभी सहर होगी  

दुआ  बाबुल  की  है 

सुखी संसार  होगा 

पति का घर उसका 

सुन्दर उपहार होगा 

इस कुल  उस कुल 

अटूट बंधन होगा 

प्रेम प्रतिष्ठा से 

मान बढ़ाएगी 

माँ वधू  बेटी बन 

जग  रीति   निभाएगी 

हाँ  वो  मेरी बेटी  है  

 

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 2, 2012 at 5:03pm

आदरणीय अजय जी, सादर 

निश्चित ही डर भरती है 

धन्यवाद 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 2, 2012 at 5:01pm

आदरणीय गुरुदेव सौरभ जी, सादर अभिवादन 

मैं भी आप जैसा हूँ, योग्यता में नहीं परिवार में.

आपकी शिक्षा जितनी प्रेरणा देती है उतनी आप के द्वारा की गयी मेरी प्रशंशा नहीं . आपके द्वारा बढ़िया अंक दिए गए है. आप ही का शिष्य भी तो हूँ. रचना सफल कही गुरु जी ने सब कुछ मिल गया. भले इसे कहीं भी स्थान न मिला हो. आपका हमेशा आभारी हूँ, बस स्नेह प्रदान किये रहिये. कट जायेगा सफर यूँ ही हँसते हँसते. सच्चे दिल से. आभार, महोदय जी.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 2, 2012 at 4:53pm

आदरणीय अशोक जी , सादर अभिवादन 

स्नेह प्रदान करने हेतु धन्यवाद 

Comment by Ajay Singh on June 2, 2012 at 12:45pm

जाएगी  दूजे  घर  

एक  डर  भरती   है .......   Respected Pradeep ji,eyes  really got wet.


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 1, 2012 at 9:44pm

आदरणीय प्रदीप जी, इसे कहते हैं शब्दों की महत्ता और उनकी ताक़त.  आपने आँखों की कोर गीली कर दी और आपकी रचना सफल हो गयी.  मैं भी दुलारियों का गर्वीला और सनातनी बाप हूँ. 

सादर

Comment by Ashok Kumar Raktale on June 1, 2012 at 9:23pm

आदरणीय प्रदीप जी
                सादर,
                              खिलखिलाहट   उसकी 
                  दीवाना  करती  है 
                   जाएगी  दूजे  घर 
                    एक  डर  भरती   है 
                बहुत ही भावपूर्ण रचना. बधाई.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 6:33pm

स्नेही महिमा, शुभाशीष.

प्रोत्साहन हेतु धन्यवाद.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 6:32pm

धन्यवाद आदरणीय रेखा जी, सादर 

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 6:31pm

धन्यवाद स्नेही आशीष जी.

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on June 1, 2012 at 6:30pm

धन्यवाद ईश पुत्री, सस्नेह 

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