For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

रफ़ी का एक सदाबहार नगमा--------------भाग-2

फिल्म-- हीर राँझा
गायक-- रफ़ी
गाना का बोल-- ये दुनिया ये महफ़िल

ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

किसको सुनाऊ हाल दिल-ए-बेकरार का
बुझता हुआ चिराग हूँ अपने मजार का..
ए काश भूल जाऊ मगर भूलता नहीं...
किस धूम से उठा था जनाज़ा बहार का....
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

अपना पता मिले न खबर यार की मिले....
दुश्मन को भी ना ऐसी सजा प्यार की मिले...
उनको खुदा मिले है जिनको खुदा की है तलाश....
मुझको बस एक झलक मेरे दिलदार की मिले......
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

सेहरा में आके भी मुझको ठिकाना ना मिला...
ग़म को भुलाने का कोई बहाना ना मिला....
दिल तरसे जिसमे प्यार को..क्या समझू उस संसार को...
एक जीती बाज़ी हार के मैं दुंदु बिचरे यार को....
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

दूर निगाहों से अंशु बहता है कोई..
कैसे ना जाऊ मैं मुझको बुलाता है कोई.....
या टूटे दिल को जोर दो या सारे बंधन तोड़ दो...
ए पर्वत रास्ता दे मुझे..ए काटो दामन छोड़ दे..
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....
ये दुनिया ये महफ़िल मेरे काम की नहीं....मेरे काम की नहीं....

Views: 816

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Ratnesh Raman Pathak on April 19, 2010 at 10:05pm
preetam jee kaha jata hai ki चावल जेतने पुराना होला ओतने महंगा होला आ कीमत भी होला isliye is geet ka bol aur madhur aawaj aaj bhi dil ko chhu lete hai.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 19, 2010 at 2:13pm
वाह भाई वाह ये गीत तो मुझे काफी पसंद है, जिस अंदाज मे रफ़ी साहब ने इस गीत को गया है, वो आँखों मे आंशु लाने के लिये काफी है ,धन्यबाद प्रीतम जी इस गीत को यहाँ पोस्ट करने के लिये,

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Usha Awasthi posted a blog post

सब एक

सब एक उषा अवस्थी सत्य में स्थित कौन किसे हाराएगा? कौन किससे हारेगा? जो तुम, वह हम सब एक ज्ञानी वही…See More
14 hours ago
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"शंका निवारण करने के लिए धन्यवाद आदरणीय धामी भाई जी।"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, निम्न पंक्तियों को गूगल करें शंका समाधान हो जायेगा।//अपने सीपी-से अन्तर में…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आदरणीय लक्ष्मण धामी भाई मुसाफ़िर जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिति और उत्साहवर्धन हेतु हार्दिक…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी's blog post ग़ज़ल (जबसे तुमने मिलना-जुलना छोड़ दिया)
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। अच्छी समसामयिक गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Chetan Prakash's blog post गज़ल
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गजल हुई है। हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई इन्द्रविद्यावाचस्पति जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और सराहना के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted blog posts
yesterday
indravidyavachaspatitiwari commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कभी तो पढ़ेगा वो संसार घर हैं - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"जमाने को अच्छा अगर कर न पाये, ग़ज़ल के लिए धन्यवाद।करता कहना।काश सभी ऐसा सोचते?"
yesterday
AMAN SINHA posted a blog post

किराए का मकान

दीवारें हैं छत हैंसंगमरमर का फर्श भीफिर भी ये मकान अपना घर नहीं लगताचुकाता हूँमैं इसका दाम, हर…See More
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' बाग़पतवी commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post एक अनबुझ प्यास लेकर जी रहे हैं -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"//अनबुझ का अर्थ यहाँ कभी न बुझने वाली के सन्दर्भ में ही लिया गया है। हिन्दी में इसका प्रयोग ऐसे भी…"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post केवल बहाना खोज के जलती हैं बस्तियाँ - लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति, स्नेह व सुझाव के लिए आभार। "
Saturday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service