For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

मां !

मैंने खाये हैं तुम्हारे तमाचे अपने गालों पर

जो तुम लगाया करती थी अक्सर

खाना खाने के लिए.

मां !

मैंने भोगे हैं अपने पीठ पर

पिताजी के कोड़ों का निशान,

जो वे लगाया करते थे बैलों के समान.

मां !

मैंने खाई हैं हथेलियों पर

अपने स्कूल मास्टर की छडि़यां

जो होम वर्क पूरा नहीं करने पर लगाया करते थे.

पर मां !

मैं यह नहीं समझ पा रहा हूँ

आखिर कयों लगी है मेरे हाथों में हथकडि़यां ?

जानती हो मां,

उन्होंने मुझे थाने लाकर उल्टा लटकाया.

अनगिनत डंडे लगाये मेरे पैरों पर

उन्होंने सुईयां चुभोई है मेरे शरीर में -

वे मुझस पूछ रहे थे, उन साथियों का नाम मां

जिन्होंने तुम्हारी लाज बचाई थी,

उस समय

जब मैं और मेरे पिताजी घर से बाहर थे

और घरों में धुस आये थे गुण्डे.

मां !

पुलिस ने मुझे इसीलिए गिरफ्तार किया है

कि मैं बताऊं उनलोगों का नाम.

तुम्हीं बताओ मां,

मैं कैसे उन लोगों का नाम अपने जुवां पर लाता.

मैं बेहोश हो गया था मां,

न जाने कितने सारे प्रयोग किये थे मेरे शरीर पर.

शायद करंट भी दौड़ाया था मेरी नसों में.

मां !

मुझे अफसोस है,

मैं आखिरी बार तुमसे नहीं मिल सका.

मैं आखिरी सांस गिन रहा हूँ मां.

मैं अपने विक्षत कर दिये गये शरीर को भी

नहीं देख पा रहा हूँ.

पर मां !

अब मैं चैन से मर सकूंगा.

लाल सूरज कल जरूर ऊगेगा मां,

तब लोग गायेंगे मेरे भी गीत.

कह देना तुम मेरे साथियों से -

मैंने अपने जुबां पर नहीं आने दिया है,

अपने पवित्र साथियों का नाम.

कि पुलिस मुझसे कुछ भी हासिल नहीं कर सकी.

कि मैंने बट्टा नहीं लगने दिया है,

उनके पवित्रतम आदर्श पर.

 

मां !

अगर मेरा बेटा जन्म ले, तो बतलाना उसको,

उसके बाप के बारे में,

कि किस तरह उसका बाप मरा था.

कि अन्तिम समय मैं उसे बेतरह याद कर रहा था.

Views: 706

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by आशीष यादव on April 17, 2012 at 5:04pm

मार्मिक रचना।
भगत सिंह और उनके साथियों के तरफ ईशारा कर गई यह रचना।
बधाई स्वीकारें


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on April 16, 2012 at 8:19pm

रोहित, आपकी कविता ब्लैक होल की तरफ इशारा कर रही है, भाव भंगिमा बहुत ही मर्मस्पर्शी है, बधाई आपको |


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on April 16, 2012 at 7:44pm

वाह रोहित जी आपकी लेखनी को सलाम कितना मर्मस्पर्शी लिखा है आपने जीवन की एक कठोर सच्चाई|                                                                                                                                                                                                                                                        

Comment by अरुण कान्त शुक्ला on April 16, 2012 at 6:32pm

"लाल सूरज कल जरूर ऊगेगा मां," आशा का बना रहना अच्छा होता है | साधुवाद |

Comment by Abhinav Arun on April 16, 2012 at 2:47pm

अगर मेरा बेटा जन्म ले, तो बतलाना उसको,

उसके बाप के बारे में,

कि किस तरह उसका बाप मरा था.

कि अन्तिम समय मैं उसे बेतरह याद कर रहा था.

atyant marmik rachna sadhuvaad apko is kathy pradhaan kavy prastuti par .

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आ. भाई सुशील जी , सादर अभिवादन। प्रदत्त विषय पर सुंदर दोहा मुक्तक रचित हुए हैं। हार्दिक बधाई। "
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय अजय गुप्ताअजेय जी, रूपमाला छंद में निबद्ध आपकी रचना का स्वागत है। आपने आम पाठक के लिए विधान…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन के भावों को आत्मीय मान से अलंकृत करने का दिल से आभार आदरणीय जी ।सृजन समृद्ध हुआ…"
Sunday
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"आदरणीय सौरभ जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । आपका संशय और सुझाव उत्तम है । इसके लिए…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आयोजन में आपकी दूसरी प्रस्तुति का स्वागत है। हर दोहा आरंभ-अंत की…"
Sunday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"  आदरणीय सुशील सरना जी, आपने दोहा मुक्तक के माध्यम से शीर्षक को क्या ही खूब निभाया है ! एक-एक…"
Sunday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"

२१२२/२१२२/२१२ **** तीर्थ  जाना  हो  गया  है सैर जब भक्ति का हर भाव जाता तैर जब।१। * देवता…See More
Sunday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"अंत या आरंभ  --------------- ऋषि-मुनि, दरवेश ज्ञानी, कह गए सब संतहो गया आरंभ जिसका, है अटल…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा पंचक  . . . आरम्भ/अंत अंत सदा  आरम्भ का, देता कष्ट  अनेक ।हरती यही विडम्बना ,…"
Jan 17
Sushil Sarna replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-182
"दोहा मुक्तक. . . . . आदि-अन्त के मध्य में, चलती जीवन रेख ।साँसों के अभिलेख को, देख सके तो देख…"
Jan 17
vijay nikore commented on vijay nikore's blog post सुखद एकान्त है या है अकेलापन
"नमस्ते, सुशील जी। आप से मिली सराहना बह्त सुखदायक है। आपका हार्दिक आभार।"
Jan 17
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा एकादश. . . . . पतंग

मकर संक्रांति के अवसर परदोहा एकादश   . . . . पतंगआवारा मदमस्त सी, नभ में उड़े पतंग । बीच पतंगों के…See More
Jan 14

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service