For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कांपते हाथों से
वह साफ़ करता है कांच का गोला
कालिख पोंछकर लगाता है जतन से ..
लौ टिमटिमाने लगी है ..
इस पीली झुंसी रोशनी में
उसके माथे पर लकीरें उभरती हैं
बाहर जोते खेत की तरह
समय ने कितने हल चलाये हैं माथे पर ?
पानी की टिपटिप सुनाई देती है
बादलों की नालियाँ छप्पर से बह चली हैं
बारह मासा - धूप, पानी ,सर्दी को
अपनी झिर्रियों से आने देती
काला पड़ा पुआल तिकोना मुंह बना
हँसता है
और वह काँप-काँपकर
जिन्दगी को लालटेन में जलते देखता है ..
इस रोशनी में और भी कुछ शामिल है -
कुछ तुड़े-मुड़े ख़त
उसके जाने के बाद के
विस्मृति के बोझिल अक्षर
जिन्हें वह बंचवाता था डाकिये से
आजकल वह भी नहीं आता ..l
इस लौ के सामने खोल देता है
अक्षरों के बिम्ब ..
अनपढ़ मन के रटे पाठ ..
और सुधियाँ बरस पड़ती हैं
ज्यों बैल की पीठ पर दागे कोड़े l
गोले की जलन आँखों में भर गयी है
एक कलौंस -
अकेलेपन की ..
कंपकंपाती लौ ऊपर उठती है
भक होकर पछाड़ मारती है
धुंए से भरी
एक भोर -
अब उसकी आँख लग गयी है
जगाना मत !


अपर्णा भटनागर

Views: 490

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Aparna Bhatnagar on September 20, 2010 at 6:02am
नूतन आप senior ही हैं ..:)) आपका स्वागत ... आप केवल अपर्णा कहें , अच्छा लगेगा l
Comment by Dr Nutan on September 20, 2010 at 12:11am
bahut sundar likha hai Aparna ji.. swagat aapka.. yaha par mai senior hoon.. :))
Comment by Aparna Bhatnagar on September 18, 2010 at 10:47pm
संजीव सर , आपका लिखा बराबर शब्दकार पर पढ़ते रहते हैं और प्रेरणा भी मिली है. आपको रचना पसंद आई इससे ये संतुष्टि हुई कि लेखन का क.ख.ग. समझ आने लगा है. इन बिम्बों को लेकर अक्सर ये बहस भी हुई है कि हम अपनी कविता को दुरूह बना देते हैं किन्तु हमें ऐसा नहीं लगा ; हाँ, यदा कदा नए प्रयोग करने का प्रयास रहता है जिसे पाठक वर्ग स्वीकार नहीं कर पाता.
@रवि सर , शुक्रिया ! आपने कविता को पढ़ा ...
आज एक नयी कविता पोस्ट की है , उम्मीद है जटिलता के बाद भी कविता आपको पसंद आएगी l
Comment by Rash Bihari Ravi on September 18, 2010 at 8:24pm
sandar bahut badhia
Comment by sanjiv verma 'salil' on September 18, 2010 at 8:01pm
सशक्त यथार्थवादी विचारप्रधान रचना के बिम्ब और प्रतीक मन को छू गए. बधाई. अगली रचनाओं की प्रतीक्षा है.
Comment by Aparna Bhatnagar on September 18, 2010 at 7:58pm
आप सभी का अभिनन्दन ...और आभार!
Comment by alka tiwari on September 18, 2010 at 4:35pm
bahut hi barik chijon ko prakash me lati hai aapki kavita.
jahan na pahunce ravi ,wahan pahunce kavi.
bahoot khoob.
Comment by आशीष यादव on September 17, 2010 at 11:19pm
gareebo ki zindagi ko bahut hi shaandar dandh se prastut kiya hai aapne. sundar abhiwyakti.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on September 17, 2010 at 10:23pm
यह रचना पढ़ने के बाद सोना मुश्किल है आप जगाने की बात करती है , बहुत ही खुबसूरत कृति, आप ने उस पल को छू लिया है जो गरीबो की जिन्दगी में अक्सर आते है, शानदार अभिव्यक्ति पर मैं वाह वाह ही कह सकता हूँ |
Comment by Admin on September 17, 2010 at 9:47pm
आदरणीया अपर्णा भटनागर जी,
प्रणाम,
सर्वप्रथम तो मैं ओपन बुक्स ऑनलाइन के मंच पर आपके पहले ब्लॉग का ह्रदय से स्वागत करता हूँ , आप की निगाह वहाँ पहुची है जहाँ साधारतः लोगो की नजरे नहीं पहुच पाती, बहुत ही खुबसूरत रचना, एक गरीब ग्रामीण की व्यथा को दिखाती यह रचना वाकई बहुत ही उम्द्दा और सार्थक है , इस बेहतरीन अभिव्यक्ति के लिये बधाई स्वीकार करे, उम्मीद है कि आगे भी आप की रचनायें और अन्य रचनाओं तथा चर्चा परिचर्चा पर आपके विचार देखने को मिलती रहेगी |

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Admin posted a discussion

"ओ बी ओ लाइव महा उत्सव" अंक-185

आदरणीय साहित्य प्रेमियो,जैसाकि आप सभी को ज्ञात ही है, महा-उत्सव आयोजन दरअसल रचनाकारों, विशेषकर…See More
yesterday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय रवि भसीन 'शाहिद ' जी सादर अभिवादन प्रथम तो मैं क्षमाप्रार्थी हूँ देरी से आने की…"
yesterday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा दशम. . . . . उम्र

दोहा दशम् . . . . उम्रठहरी- ठहरी उम्र अब, करती एक सवाल ।कहाँ गई जब जिंदगी, रहती थी खुशहाल ।।यादों…See More
Monday
रवि भसीन 'शाहिद' commented on Jaihind Raipuri 's blog post वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं
"आदरणीय Jaihind Raipuri साहिब, नमस्कार। बढ़िया ग़ज़ल हुई है, बधाई स्वीकार करें। /ये मेरा…"
Friday
आशीष यादव added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चल मन अब गोकुल के धाम

चल मन अब गोकुल के धाम अद्भुत मनहर बाल रूप में मिल जाएंगे श्याम कि चल मन अब……………………….कटि करधनी शीश…See More
Apr 3
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अशोक भाईजी धन्यवाद ... मेरा प्रयास  सफल हुआ।"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"वाह वाह वाह !!! बहुत दिनों बाद ऐसी लाजवाब प्रतिक्रिया पढने में आई है। कांउटर अटैक ॥ हजारों धन्यवाद…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय शेख शाहज़ाद उस्मानी जी सादर, सरकारी शालाओं की गलत परम्परा की ओर ध्यान आकृष्ट कराती…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion 'ओबीओ चित्र से काव्य तक' छंदोत्सव अंक 177 in the group चित्र से काव्य तक
"सार्थक है आपका सुझाव "
Mar 31
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदाब।‌ रचना पटल पर उपस्थिति और समीक्षाओं हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभा पाण्डेय जी। मेरी…"
Mar 31
अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"हार्दिक धन्यवाद आदरणीया प्रतिभाजी ।  इसमें कुछ कमी हो सकती है लेकिन इस प्रकार के आयोजन शहरों…"
Mar 31
Ashok Kumar Raktale replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-132 (विषय मुक्त)
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव साहब सादर, बिना सोचे बोलने के परिणाम पर सुन्दर और संतुलित लघुकथा…"
Mar 31

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service