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भुजंग तुम 

वतन  के  लिए 

व्याल हम 

वतन  के  लिए 

कलंक तुम

वतन  के  लिए

तिलक हम 

वतन  के  लिए 

दुश्मन हो  

वतन  के  लिए 

ढाल हम 

वतन  के  लिए 

हार तुम 

वतन  के  लिए

जीत हम 

वतन  के  लिए 

जीना  है  

वतन  के  लिए  

 मरना  है  

वतन  के  लिए  

शांति  है 

वतन  के  लिए   

 क्रांति  है  

वतन  के  लिए   

हम एक  हैं  

वतन  के  लिए   

राजगुरु  भगत  सुखदेव  है

वतन  के  लिए

आजाद  थे  आजाद  है  आजाद  रहेंगे  

वतन  के  लिए   

 

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Comment

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Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 24, 2012 at 1:14pm

आदरणीय केसरी जी , सादर अभिवादन. अपनी भावनाओं को शब्द दिए हैं. आभार प्रोत्साहन हेतु. स्नेह सदैव अपेक्षित है. धन्यवाद.

Comment by Arun Sri on March 24, 2012 at 10:53am

राष्ट्र भक्त और राष्ट्र द्रोही के बीच का अंतर क्या खूब लिखा है ! कामना है कि हम सब वतन के माथे का तिलक बने रहें / बनने का प्रयास  करें !


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Comment by rajesh kumari on March 23, 2012 at 7:42pm

desh bhakti ki jyoti jagaati hui kavita bahut behtreen.badhaai aapko.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 7:23pm

hamare khushgawar aaj k liye AAJ KA DIN hamesha itihas k sunhare panno me mahakta rahega.....

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 7:21pm

हम एक  हैं  

वतन  के  लिए   

राजगुरु  भगत  सुखदेव  है

वतन  के  लिए

आजाद  थे  आजाद  है  आजाद  रहेंगे  

वतन  के  लिए   ......वतन परस्ती से ओतप्रोत रचना.....प्रदीप जी.बधाई...natmastak hu....

Comment by MAHIMA SHREE on March 23, 2012 at 2:28pm
हम एक हैं
वतन के लिए...
आदरणीय सर
वन्देमातरम....
राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत ..इस रचना के लिए आपका हार्दिक साधुवाद....यही
भावना सभी भारतवासियों में हमेशा रहे...तो फिर क्या कहना....बधाई
Comment by Harish Bhatt on March 23, 2012 at 2:24pm

आदरणीय प्रदीप जी सादर प्रणाम, देशप्रेम से ओतप्रोत रचना के लिए हार्दिक बधाई

Comment by वीनस केसरी on March 23, 2012 at 1:30pm

माननीय, वतन परस्ती को सुन्दर शब्दों से प्रस्तुत किया है

बधाई

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 23, 2012 at 1:25pm

abhar. snehi vahid ji. vande matram.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 23, 2012 at 12:22pm

आदरणीय प्रदीप जी,

देशप्रेम के भावों में डूबी इस कविता के लिए हार्दिक बधाई!! :))

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