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आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर 

चाँद जाने दे गया कैसी खबर 

चलो घर को अपने करीने से सजा लूँ 

किसको  साथ लाती है मेरी सहर 

बहकी बहकी सी फ़िजा लगती है 

कौन जाने है ये किसका असर 

वो तो समझो  है शाइस्तगी मेरी 

वर्ना हक़ से कहती अभी और ठहर 

आजकल दरवाजे उनके बंद रहते हैं 

चुपचाप ना जाने वो गए किधर 

रुसवाइयों से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता 

कसम से हैं वो बड़े बेखबर 

रास्ता शायद वो दरिया भूल गया 

मुड़ गया इस और जो उसका कहर

आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर   

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Comment by rajesh kumari on March 23, 2012 at 8:52pm

hardik aabhar Avinash ji.

Comment by AVINASH S BAGDE on March 23, 2012 at 7:55pm

रास्ता शायद वो दरिया भूल गया 

मुड़ गया इस और जो उसका कहर

आज मन में क्यूँ उठी मेरे लहर   .....umda prastuti Rajesh kumari ji...wah!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 23, 2012 at 7:46am

hardik badhaai Neerja ji


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2012 at 4:43pm

hardik aabhar Sandeep ji.

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 22, 2012 at 3:15pm

बहुत ख़ूब आदरणीया! आपने दिल खुश कर दिया! हार्दिक बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2012 at 10:43am

aabhar Aasheesh ji

Comment by आशीष यादव on March 22, 2012 at 10:36am

वो तो समझो  है शाइस्तगी मेरी 

वर्ना हक़ से कहती अभी और ठहर

sahi hai.

sundar rachna. 

badhai.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2012 at 7:36am

tahe dil se shukria Manoj ji.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2012 at 7:36am

Anand ji bahut bahut shukria.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 22, 2012 at 7:35am

haardik aabhar Pradeep ji

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