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"समय और भाग्य"

सब कुछ भले न सही, पर 

कुछ कुछ सबको मिला है ,

और यही कुछ कुछ एहसास कराता है की 

समय से पहले और भाग्य से ज्यादा 

भला कभी किसी को कुछ मिला है!

तुम भले ही रोज़ नया ख्वाब देखो 

खुद की तकदीर बदलने की तदबीर सोचो 

दर-दर भटको और माथा टेको, पर क्या होगा? 

क्या कभी तकदीर बनाने वाला भी मिला है ?

और अगर ऐसा ही आसान होता तकदीर बदलना 

तो कौन रोता ख़्वाबों के टूटने पर ?

 कौन बिलखता घर उजड़ने पर ?

क्यों कोई भटकता दर- दर  ?

क्यों कोई झुकता उसके दर पर ?

कौन पढता दुःख की परिभाषा ?

कौन बसने देता अश्क आँखों में ?

ये मुक़द्दर की बात है "डोली"

किसी के ख़्वाबों की झालर बंधनवार बनी 

किसी के ख़्वाबों की झालर बाबुल की डाल बनी 

समय और भाग्य के इस खेल में 

कोई सब कुछ पा गया तो कोई 

टूटे ख़्वाबों के कुछ और टुकड़े पा गया.

सब कुछ न सही कोई बात नहीं 

कुछ कुछ ही सही पर आँख के लिए 

वो नई धार तो पा गया.   

सब कुछ भले न सही, पर कुछ-कुछ वो भी पा गया.

सब कुछ भले न सही, पर कुछ कुछ सबको मिला है. 

मोनिका जैन "डोली"  

 

 

 

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 15, 2012 at 12:56pm

रचना की पंक्तियों से निस्सृत दृढ़ता भावनाओं के कालपगे होने का पर्याय है.  मोनिकाजी, बहुत-बहुत बधाई.

 

बाबुल   शब्द बबूल नहीं है क्या ?

Comment by PRADEEP KUMAR SINGH KUSHWAHA on March 15, 2012 at 11:15am

सुन्दर भाव एवं प्रस्तुति. बधाई.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 14, 2012 at 2:21pm

bhaav manthan me kase hue shabd ...shandar prastuti.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 14, 2012 at 2:18pm

ये मुक़द्दर की बात है "डोली"
किसी के ख़्वाबों की झालर बंधनवार बनी
किसी के ख़्वाबों की झालर बाबुल की डाल बनी

आदरणीया मोनिका जी , भावनाओं को आपने बड़े ही करीने से संप्रेषित किया है, अतुकांत शैली में प्रस्तुत रचना खुबसूरत बन पड़ी है , बधाई स्वीकार करे ।

Comment by Abhinav Arun on March 14, 2012 at 1:47pm

काफी कुछ कहती है ये रचना आदरणीय मोनिका जी | ऐसी ही रचनाएँ वक़्त के झंझावातों में आदमी को संबल देती है ! आज की मांग के अनुरूप साहित्य सृजन हेतु हार्दिक बधाई !!

Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 14, 2012 at 12:18pm

पाना-खोना तो जीवन का अहम नियम है| सुन्दर भावों की प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें|

Comment by विन्ध्येश्वरी प्रसाद त्रिपाठी on March 14, 2012 at 7:03am
भाव बहुत शानदार है,चिंतन भी अच्छा है।बधाई हो मोनिका जी।

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