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महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,
ये पगल सब को निहाल कर के छोर दी ,
असली समाजबाद येही तो लाती हैं ,
एक ही थाली में सब को खिलाती है ,
खिरकी से झाक कर पैमाल कर के छोर दी,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

बाबा जी बनिया या राजपूत चमार के ,
चवर में ले जाती कनखी से मार के ,
बाप जी बेटा जी हाकिम चपरासी जी ,
इसके सेवकाई में लग गए सन्यासी जी ,
पूरा बिहार के बंगाल कर के छोर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

देखिये धनान्त्री की कलसा भी फुट गई ,
बोतल के पानी पे अब लोटा भी छुट गई ,
जाती के नाम पर जिसे पास नहीं बैठने देते ,
महुआ के देती से मिलने साथ लेकर चल देते ,
पूरा हिंदुस्तान को नेपाल कर के छोर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

ये पगली बैर भाव को भुलवा देती है ,
अंजानो को भी अपनो सा साथ देती हैं ,
पंडित हो या मुल्ला यहा नहीं करते खंडन ,
ये तो तोर देती हैं जाती धरम के बंधन ,
पूरा बिस्वा में ये दोस्ती के राग छेर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

ये आपना बनाकर कही की नहीं छोरती ,
यद् नहीं रहता खाई खंदक में सोलादेती ,
इसकी संघात की मिसाल और क्या दू ,
परे हैं खाई में मुह में कुत्तो से मुतवा देती ,
सब कुछ लुटा मुझे बर्बाद कर के छोर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,

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Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on April 7, 2010 at 9:27pm
bahut badhiay guru jee..........
ये आपना बनाकर कही की नहीं छोरती ,
यद् नहीं रहता खाई खंदक में सोलादेती ,
इसकी संघात की मिसाल और क्या दू ,
परे हैं खाई में मुह में कुत्तो से मुतवा देती ,
सब कुछ लुटा मुझे बर्बाद कर के छोर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी
bahut badhiay aisehi likhat rahi........raur rachna ke besabri se intezaar rahela.....
Comment by Admin on April 7, 2010 at 3:22pm
बाबा जी बनिया या राजपूत चमार के ,
चवर में ले जाती कनखी से मार के ,
बाप जी बेटा जी हाकिम चपरासी जी ,
इसके सेवकाई में लग गए सन्यासी जी ,
पूरा बिहार के बंगाल कर के छोर दी ,
महुआ की बेटी कमल कर के छोर दी ,
बहुत ही बढ़िया कविता है गुरु जी आपका जबाब नहीं है , किसी भी बिषय पर कविता लिखने का गुण कोई आपसे सीखे, अब देखिये न आपने तो महुवा के बेटी को भी नहीं छोड़ा, उसपर भी क्या शानदार कविता लिखा है, बहुत बहुत धन्यवाद महुवा के बेटी के लिए अ र्रर्रर्रर्रर कविता के लिये ,हहहहहहाहा

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