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आज हिमालय ने हमको ललकारा है

प्यार-एकता की खुश्बू से महके चमन हमारा I


सारी दुनिया में सबसे आगे हो वतन हमारा I

कुर्बानी देकर पायी है आजादी की दौलत I

जाति-धर्म के झगड़े छोड़ो-छोड़ो बैर और नफ़रत I

 

देश के टुकड़े करने को, दुश्मन ने जाल पसारा है I

नींद से जागो, आज हिमालय ने हमको ललकारा है I

 

हिन्दू-मुस्लिम, सिक्ख-ईसाई,एक ही घर के पाये हैं I

विद्यापति,नानक, कबीर, यहाँ गीत प्यार के गाये हैं I

तुलसी ,मीरा और मुहम्मद, ज्ञान-मशाल जलाये हैं I

गौतम,अकबर और अशोक कभी, इस धरती पर आये हैं I


 

याद करो तारीखे वतन, जो हर मुल्कों से न्यारा है I

नींद से जागो, आज हिमालय ने हमको ललकारा है I

 

मर्द - मर्द है, नारी भी यहाँ खड़ग उठाया करती है I

लक्ष्मी-रजिया ,चाँद-चेनम्मा, इंदिरा की ये धरती है I

शिवा-प्रताप की अमर कहानी, हवा सुनाया करती है I

बुलबुल भगत-आजाद की गाथा,गाते हुए चहकती है I

 

हम भारत के वासी हैं, फौलादी जिगर हमारा है I

नींद से जागो, आज हिमालय ने हमको ललकारा है I


धरती है हम सबकी माता, श्रम से इसे सजायेंगे I

बंटने देंगे नहीं इसे,इसलिए भले कट जाएंगे I

भारत माँ तेरा यश निर्मल , दाग नहीं लगने देंगे I

तेरा मस्तक वीर हिमालय, कभी नहीं झुकने देंगे I
है अखण्ड अपना भारत, मंजूर नहीं बंटवारा है I

नींद से जागो, आज हिमालय ने हमको ललकारा है I

गीतकार -- सतीश मापतपुरी

 

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Comment

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Comment by satish mapatpuri on August 16, 2011 at 2:16am

बहुत -बहुत धन्यवाद मैडम. आपकी सराहना एक मायेने रखती है. जश्ने आज़ादी मुबारक.

Comment by Shanno Aggarwal on August 16, 2011 at 1:19am

सतीश जी, देश भक्ति पर इतनी सुंदर रचना प्रस्तुत करने लिये आपको बधाई व स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनायें.

 

''धरती है हम सबकी माता, श्रम से इसे सजायेंगे I

बंटने देंगे नहीं इसे,इसलिए भले कट जाएंगे I

भारत माँ तेरा यश निर्मल , दाग नहीं लगने देंगे I

तेरा मस्तक वीर हिमालय, कभी नहीं झुकने देंगे I 
है अखण्ड अपना भारत, मंजूर नहीं बंटवारा है I''

Comment by satish mapatpuri on August 16, 2011 at 12:41am

आपको भी सर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 15, 2011 at 6:04pm

जश्नेआज़ादी की मुबारकबाद ..

Comment by satish mapatpuri on August 15, 2011 at 11:44am

सराहना के धन्यवाद गणेश जी, आपको भी जश्ने आज़ादी की हार्दिक शुभकामना.


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 15, 2011 at 10:54am

मर्द - मर्द है, नारी भी यहाँ खड़ग उठाया करती है I

लक्ष्मी-रजिया ,चाँद-चेनम्मा, इंदिरा की ये धरती है I

शिवा-प्रताप की अमर कहानी, हवा सुनाया करती है I

बुलबुल भगत-आजाद की गाथा,गाते हुए चहकती है I

 

सतीश भईया जबाब नहीं है आपका, बहुत ही खुबसूरत देशभक्ति रचना दिए है आप | बहुत बहुत बधाई और स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामना स्वीकार करें |

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