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गुरूमंत्र (लघुकथा) /शेख़ शहज़ाद उस्मानी (41)

"डॉक्टर साहब, मैं तो आपके भरोसे ही हूँ। अपनी तरह एक बार मेरा निःशुल्क चिकित्सा शिविर सफल करा दो, तो मेरी क्लीनिक भी चल पड़े ! " - डॉ. वर्मा ने वरिष्ठ प्राइवेट डॉक्टर से विनम्र निवेदन किया।

"परेशान मत हो, जैसा मैं कह रहा हूँ, करते जाओ, बस !"

"आपके कहे अनुसार उस गांव के दो लोकप्रिय आर.एम.पी. डॉक्टर सेट कर लिये हैं, उन्होंने क़रीब सवा सौ मरीज़ों के पंजीयन कर लिए हैं, मेडिकल जांच के लिये बन्दों की व्यवस्था भी हो गई है, लाइसेंसधारी तो बड़े नखरे दिखा रहे थे, सो बिना लाइसेंस वाले ही सेट कर लिये हैं।"

"बढ़िया है, लेकिन राज़ को राज़ रहने दें, सबका लुक और गेट-अप असरदार होना चाहिए, बस। और हाँ, एक बात ध्यान रखना कि हमें मेडिकल काउंसिल के बहुत से नियम तोड़ने होते हैं, तो मीडिया और पढे-लिखे मरीज़ों से ज़रा संभल कर रहना है !"- डॉ. भल्ला ने ताक़ीद करते हुए कहा।

"शुरू के कुछ मरीज़ों को तो आप ही देखेंगे, क्योंकि प्रचार में हमने आपका नाम भी दिया है। आपके कहे अनुसार ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के पंजीयन ज़्यादा किये हैं । मुफ़्त दवाइयों के लिए दो मेडिकल रिप्रज़ेन्टेटिव्ज़ और दो सरकारी नर्सें सेट कर लीं हैं !"

"मेरी क्लीनिक पर एम.आर. वगैरह की दी हुई और सरकारी अस्पताल से हासिल बहुत सी दवाइयाँ पड़ी हुई हैं, भिजवा दूंगा, बांट देना । गाँव वाले बहुत ख़ुश हो जाते हैं !" -डॉ. वर्मा को समझाते हुए डॉ. भल्ला ने कहा - "और सुनो, कोई बहुत गंभीर मरीज़ हो, या जो तुम्हें पल्ले न पड़े, उसे मेरे पास या सरकारी अस्पताल में डॉ. जुनेजा के लिए रिफर कर देना, कोई रिस्क लेने की ज़रूरत नहीं है, समझे !"

"अरे, डॉक्टर साहब, आप ही के गुरूमंत्र से मेरी डॉक्टरी चल रही है, बस ये शिविर और सफल हो जाये !" - डॉ. वर्मा को बस अपनी लॉटरी खुलने का इंतज़ार था ।

(मौलिक व अप्रकाशित)

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Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 8, 2017 at 5:39am
मेरी इस ब्लोग-पोस्ट पर समय देने हेतु सभी पाठकगण को तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on April 8, 2017 at 5:34am
मेरी इस रचना पर समय देने एवं प्रोत्साहित करने के लिए सभी पाठकगण को तहे दिल से बहुत बहुत शुक्रिया।
Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 16, 2015 at 5:21pm
समीक्षात्मक टिप्पणी करते हुए मेरी रचना की सराहना करने व मुझे प्रोत्साहित करने के लिए हृदयतल से बहुत बहुत धन्यवाद आदरणीय मोहन बेगोवाल जी।
Comment by मोहन बेगोवाल on December 9, 2015 at 8:48pm

 इस प्रोफेशन में जो हो रहा , वह हम सब को प्रभावित कर रहा, ये भी समाज में होने वाली तब्दीलियाँ प्रभावित कर रहीं , आप ने जो लघुकथा में कहा , सचाई के नजदीक है, इस अच्छी लघुकथा के लिए बधाई हो 

Comment by Sheikh Shahzad Usmani on December 9, 2015 at 3:41pm
अपने सुविचार प्रस्तुत करते हुए रचना की सराहना हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया नयना आरती कानिटकर जी।
Comment by नयना(आरती)कानिटकर on December 9, 2015 at 2:32pm

बहुत सामयिक मुद्दा उठाया आपने. आजकल समाज सेवा के नाम पर निःशुल्क चिकित्सा शिविरो की बाढ सी आयी हुई है जिसमे गाँवो के अशिक्षित गरीब तबका बह जाता है मुफ़्त जाँच और दवा के नाम पर.अच्छी रचना बधाई

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