For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

अनुपम ध्यानी's Blog (6)

बनूँगा, बनाऊंगा ! Copyright (c)

स्मृति बनूँ या बनूँ स्मारक?
सुधार बनूँ या बनूँ सुधाकर?
पिनाकी बनूँ या ब्रह्मास्त्र?
गाण्डीव  बनूँ या पशुपतास्त्र?
मूल बनूँ या मौलिक?
आलोक या अलौकिक?
जीवन या संजीवनी?
दमन या दामिनी?
छंद बनूँ या स्वच्छंद
मुक्तक या निबंध
सागर बनूँगा, छोर भी
सावन बनूँगा, मोर भी
उजाला भी, अंधेरा घनघोर भी
समस्या का तोड़ भी
आशा की डोर भी
उत्तर बनूँगा,…
Continue

Added by अनुपम ध्यानी on October 31, 2013 at 1:00am — 6 Comments

चलो घर की ओर! Copyright©

घोंसलों से पलायन करते परिंदे

आकाश की ऊँचाई नापने निकलते हैं

पंख फैलाने की सीख घर से लेके

मदमस्त गगन में उड़ते हैं

जहाँ दाना देखा उतर जाते

फिर नये झुंड के साथ , नयी दिशा में मुड़ जाते



नीले गगन की सैर, इंद्रधनुष की अंगड़ाई में लीन

कभी आसमान में स्वतंतरा, कभी हवा के बहाव के आधीन

घोंसले की गर्मी और मा के दुलार को भूल

नये चेहरों को आँखटे, उनके संग हो…

Continue

Added by अनुपम ध्यानी on March 19, 2013 at 12:10am — 1 Comment

जज़्बा !!! Copyright ©

जीवन के इस मोड़ पे

शब्दों से घटाने

और कविताओं के जोड़ में

अनुभवों के सागर में

और इस धरती पे जीवन के

निचोड़ से

क्या सीखा मैंने?

रोता रहा हूँ कई बार

और कोसा भी सबको मैंने

किस्मत के आगे भीख मागी

और पुकारा रब को भी मैंने…

Continue

Added by अनुपम ध्यानी on August 12, 2010 at 12:14pm — 3 Comments

प्रशांत ! Copyright ©

कैसे विनम्र सा बैठा



अथाह सागर फैला हुआ



मौत सा सन्नाटा सुनाई देता



इसके अन्दर सिमटा हुआ



बंद करके आँखें मैं



लेट गया सफ़ेद रेत पे



सुनने को आतुर था मन



सुर जो बनता



लहरों के साहिल पे टकराने से



जब पूरा ध्यान उन लहरों पर था



और मन के सारे द्वार मैंने खोल दिए



पहचानने को वो शक्ति मैं था बैठा



ऐसा लगता मानो कह रहा सागर



धैर्य हूँ मैं



शंकर हूँ और शक्ति हूँ… Continue

Added by अनुपम ध्यानी on August 7, 2010 at 1:24am — No Comments

कायरता या बुद्ध Copyright ©.







ज्ञात हैं हमें कि हर भाव

इतना शक्तिशाली होता है

कि वो आपका जीवन

बदल दे

असीम शक्ति का

प्रमाण है भाव

व्यक्त न भी हो सके तो

क्या

है वो ही प्रणाम

जो पशुओं और मनुष्य में

करता है चुनाव

एक ऐसा ही भाव है

कायरता।





कायरता, बुजदिली

या जो भी कह लो

अद्भुत शक्ति है इसमें

जो काया पलट दे

और साधारण से

असाधारण , अनुपम में बदल दे

भय हो जब हार… Continue

Added by अनुपम ध्यानी on August 5, 2010 at 10:01pm — 2 Comments

2010 की अगस्त क्रांति Copyright ©

जैसे ही अगस्त आया है



वैसे ही सब कवियों ने



तिरंगा उठाया है



और स्याही में कलम डुबो के



सब को यह दिलासा दिलाया है



कि “हम भूले नहीं हैं



भारत हमारा है”



काला है , गोरा है



अभिशप्त है तो क्या हुआ



दरिद्र है तो क्या हुआ



भ्रष्ट है तो क्या हुआ



बाकी न सही पर



अगस्त आते ही हमे याद



ज़रूर आया है



भारत हमारा है।







शब्दावली से… Continue

Added by अनुपम ध्यानी on August 5, 2010 at 8:30am — 10 Comments

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

KALPANA BHATT ('रौनक़') replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"दुःखद"
Sep 29
Profile IconKamran Akmal and sushil yadav joined Open Books Online
Sep 24
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"🌹 OBO के पुनर्गठन एवं पुनर्जीवन के लिए एक सशक्त अपील और कुछ रचनात्मक…"
Sep 22
Dharmendra Kumar Yadav posted blog posts
Sep 19
Sushil Sarna posted a blog post

कुंडलिया. . . . झोला

कुंडलिया. . . . झोलाझोला   लेकर  हाथ  में, चले   मुरारी   लाल । भाव देख कर थम गई,  उनकी बढ़ती चाल…See More
Sep 19
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"सभी को मिलकर ओबीओ को बचाने का सतत प्रयास करते रहना चाहिए।"
Sep 17
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on vijay nikore's blog post सांकल मन के द्वार पर
"आ.भाई विजय जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर रचना हुई है। हार्दिक बधाई स्वीकारें।"
Sep 17
राज़ नवादवी replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"atyant dukahd "
Sep 11
जगदानन्द झा 'मनु' replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय, प्रणाम संगहि संग हार्दिक धन्यवाद। अपनेक मार्गदर्शन पाबि बहुत बेसी मोटिवेशन आ सीखक मिलैए…"
Sep 10

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to जगदानन्द झा 'मनु''s discussion गजल in the group मैथिली साहित्य
"आदरणीय जगदानन्द झा मनु जी, अहाँ बड्ड नीक गजल पठेलियै. सबसे पहिल, त हम प्रयुक्त भेल बहरक विषय में…"
Aug 18
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय सौरभ जी सादर प्रणाम, प्रस्तुत हरिगीतिका छंद पर आपकी प्रतिक्रिया से सृजन सफल हुआ है. आपके…"
Aug 15
Ashok Kumar Raktale commented on Ashok Kumar Raktale's blog post हरिगीतिका छंद
"आदरणीय श्याम नारायण वर्मा जी सादर, प्रस्तुत छंदों पर उत्साहवर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार.…"
Aug 15

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service