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babita choubey shakti
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damoh
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i am professional staff nurse & i am a poet also

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At 4:38am on May 9, 2015,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

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Babita choubey shakti's Blog

तराजू (गीत)

चल तौल तराजू रिश्तों को 

कुछ अपने पराये नातो को ...



एक तरफ चढा ले माँ को ही 

सबसे प्यारा ये रिश्ता है 

कचरों के डिब्बों में फिर क्यों 

शिशुओं को फेंका जाता है

चल ...........



एक तरफ भाई और बंधू ले 

फिर जर जमीन पर क्यों झगड़े है 

पैसा धन दौलत पर से  क्यों 

सर अपनों के काटे जाते है

चल .........



एक तरफ जीवन साथी ले 

ये जनम जनम का नाता है

तो तलाक फिर क्यों होते है 

संग रहकर भी दुश्मन बनते है

चल…

Continue

Posted on May 16, 2016 at 10:00pm — 3 Comments

महाकाल दर लगो सिहस्थ (आल्हा छंद)

महाकाल दर लगो सिहस्थ है जनमन रहो हर्षाय

उज्जैनी नगरी देखो आज दुल्हनिया सी रही सुहाय

पितृ मिलन खो रेवा आई महाकाल रहे हर्षाय

शिप्रा रानी चरण पखारे., मिलन अनोखा रही कराय

एक और से गोरा रानी, लेय बलैेया नजर उतार

दूजी और गणराज हर्ष के, बहनी को है रहे निहार

कुम्भ मिलन खो सभी देवता सज धज आये खेवनहार

मित्र सुदामा राह तकत है, मित्र मिलन की प्यास जगाये

सांदीपनी घर मनमोहन आये शिक्षा रही यही पे पाय...

ब्रह्म बिष्णु नारद संग, राधे संग श्याम सरकार

सियाराम…

Continue

Posted on May 16, 2016 at 9:30pm — 4 Comments

लघुकथा " घात"

"घात"



"" अरे तु चल मेरे साथ दो हाथ जमा उंगा तो सब कबूल देगा कमीना। रात दिन भैया ,भैया करता रहा और हमसे ही इतनी बड़ी गद्दारी। "" मोहन जैसे आगबबूला हुए जा रहा था।

""नहीं ,नहीं एकदम से कैसे कहेगें ,हमारे पास कोई सबूत गवाह भी तो नहीं है। "" रीमा ने रुआंसी आवाज में कहा !



"अरे क्या सबूत क्या गवाह तुझे विश्वास है ना ये उसी ने किया है तो फिर । "" अरे पुलिस के चार डण्डे पडेगें ना तो सब कबूल लेगा। अरे तुम्हारी सारी कमाई ले गया ! ""

" पुलिस नहीं नहीं पुलिस को मत कहो ! यदि… Continue

Posted on July 30, 2015 at 6:49am — 3 Comments

गीत तौल

तराजू (गीत)





चल तौल तराजू रिश्तों को

कुछ अपने पराये नातो को ...



एक तरफ चढा ले माँ को ही

सबसे प्यारा ये रिश्ता है

कचरों के डिब्बों में फिर क्यों

शिशुओं को फेंका जाता है



चल ...........



एक तरफ भाई और बंधू ले

फिर जर जमीन पर क्यों झगड़े है

पैसा धन दौलत पर से क्यों

सर अपनों के काटे जाते है



चल .........



एक तरफ जीवन साथी ले

ये जनम जनम का नाता है

तो तलाक फिर क्यों होते है

संग रहकर भी… Continue

Posted on July 15, 2015 at 4:18pm — 2 Comments

 
 
 

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