For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

Zid
  • Male
Share

Zid's Friends

  • Balram Dhakar
  • शकील समर
 

Welcome, Zid!क्या कशिश थी के कुछ हुवे फ़ना आज -खुद रफ्ता लो बुज़नेसे पहले आखिर -ऐ -शब किधर को गए पूछते क्या हो अदीब की ज़ुबा होती ही है कर्मफरमा वह -नह -आह -होगी मगर वो निगा

Latest Activity

Zid posted a video

Aasma-ae-hind a qawwali for National Integration and solidarity by Gazalkingzid

#gazalking Zid Most promising old Ghazal singer Mr. Prashant Brahmne is from Pune {India}. He has performed on various stages of the world with his own Ghaza...
Aug 16, 2020
Zid posted a video

Beautiful Song | Aaj Bhi Kehete Hai Mujhse | GazalKing Zid

#gazalking_Zid #romanticsong Lyrics:- 1. Let the eyes turbid with desire to meet love 2.get to see eyes that too are waiting 3.and let this event proceed wit...
Aug 14, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
Pune
Native Place
Nagpur
Profession
Trainer, Teacher
About me
Lookinf for career in scripting in Hindi, urdu, english films

Diwali Mubarak

कभी कभी ख्वाब हकीकतमें चले आते है

अपनी फितरत-ऐ-कदा छोड़ मैखाने चले आते है

हर दिलकशी के पहले यकायक पेश आते है

याद कर ज़मीर को बेखुद चले आते है

वो कभी सर्कार हो गनीमत ऐसे सवर जाते है

हो कभी बीमार हम वैशत में चले आते है

सर-से पाँव कमसीन अदा फितरतमें चले आते है

कभी वक्तके इंतज़ार में कभी कब्ल चले आते है

उनका पता क्या बताये वो है हमारे अज़ीज़-ऐ-कारी

कभी अंखोसे बया कभी चेहेरोसे चले आते है

नकामिये इश्कमें कुछ कसर होती तो इतनी कहत न होती

लोग अश्यरपे नहीं नीलामीपे चले आते है

हर वक़्त की ज़िद है हर वक़्त चले आते है

नींद जावा हो तो मेहेरबान चले आते है

यह  ग़ज़ल  शौक  कैसे  बना  आपकी  सरोकार  में

बुज़ाए  शोले   हमने  भी  दिल -ऐ - तार  तार  में

बेसाख्ता  बह  रहे  है  अश्क़  बावजूद -ओ - इश्क़  में

लिपट  लिए  है  अक्स  से  हम  ज़ार  ज़ार  में

वो  चेहरा  क्या  बया  करें  सरसार  हिकायतें -ऐ -रूह

क्या  क्या  छुपा  रही  है  निगाही  आर  पार  में

फिर  एक  बदनसीब  चला  फिर  मजनुके  रास्ते 

अब  जां   रहे  के  न  रहे  संग -ओ -ख़िश्त  मार  में

लो  छोड़  दी  है  हमने  भी  बाज़ी  यहापे  खुद 

क्या  क्या  गिने  शिकस्त   ज़िद  अब  जीत  हार में

Zid's Videos

  • Add Videos
  • View All

Zid's Blog

वक़्तका तकाज़ा है

वक़्तका तकाज़ा है आज आई है शाबान-ऐ-हिज्राँ सिरहानेसे

वैसे दम-ब-दम को नहीं फुर्सत दर-ब-दर मुझे आज़मानेसे

कितने  माजूर-ओ-बेखुद  बने बद-चलन  पैमाने झलकानेसे

सफा -ऐ -कल्ब  क्या  बनोगे  इंसा  सरसार दर्यामे नहाने  से

उम्र -ऐ -खिज्र  में  गर  फिर  लिखे  दास्तान -ऐ -शौक कोई  

किस  तर्ज़ -ऐ -तपाक मिले  तोड़कर  मसाफात  अनजाने  से

सर -गर्म -ऐ -जफ़ा  किसको  महोलत  दी  है  यहाँ  बेदिलीने

तक़दीर  कैसे  निगाह -बान  रहे  नज़र -ऐ -बाद  बचाने  से

फरते -मिहानपे …

Continue

Posted on October 31, 2013 at 6:20pm — 6 Comments

Comment Wall (2 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 6:06pm on March 7, 2014,
सदस्य टीम प्रबंधन
Rana Pratap Singh
said…

Resp Zid saa'b

Its nice to interacting with you. You have written correctly that your Gazals were not legitimate. Gazal has its own discipline and that has to be followed. The Gazal rolls on the wheels of Bahr, Kafiyaa, Radif and Takhayyul. These are the basic ingredients of the Gazal. One can start saying Gazal if he knows the basic concept of above mentioned terms. For learner's reference Mr Venus Kesari has started  very good discussions in the 'Gazal Ki BaateN' group.  I am giving you the link of the same. Further if you have any query, do not hesitate to contact.

  ग़ज़ल से सम्बंधित शब्द और उनके अर्थ    रदीफ़     काफ़िया     बहर परिचय और मात्रा गणना     बहर के भेद व तकतीअ

these links are also available on the bottom of the page of this web site

Regards

At 4:41pm on October 20, 2013, शकील समर said…

स्वागत है आदरणीय।

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

vijay nikore posted a blog post

अनजाना उन्माद

अनजाना  उन्माद मिलते ही तुमसे हर बारनीलाकाश सारामुझको अपना-सा लगेबढ़ जाए फैलाव चेतना के द्वारकण-कण…See More
19 minutes ago
बासुदेव अग्रवाल 'नमन' added a discussion to the group धार्मिक साहित्य
Thumbnail

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"

चामर छन्द "मुरलीधर छवि"गोप-नार संग नन्दलालजू बिराजते।मोर पंख माथ पीत वस्त्र गात साजते।रास के सुरम्य…See More
1 hour ago
Aazi Tamaam posted a blog post

नग़मा: माँ की ममता

22 22 22 22 22 22 22माँ की ममता सारी खुशियों से प्यारी होती हैमाँ तो माँ है माँ सारे जग से न्यारी…See More
1 hour ago
सालिक गणवीर posted blog posts
21 hours ago
C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi" commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी,सुन्दर टिप्पणी के लिए आपका हार्दिक आभार | इसी…"
21 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"प्रिय भाई गुरप्रीत सिंह जी सादर अभिवादन ग़ज़ल तक आने और सराहना के लिए बहुत शुक्रियः. मतला पहले यही…"
22 hours ago
सालिक गणवीर commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय भाई लक्ष्मण जी सादर प्रणाम ग़ज़ल पर आपकी उपस्थिती और सराहना के लिए आभार व्यक्त करता हूँ."
22 hours ago
Gurpreet Singh jammu commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आदरणीय सालिक गणवीर जी नमस्कार । आप बहुत अच्छी ग़ज़ल कहते है । लेकिन माफी चाहता हूं ये ग़ज़ल मुझे…"
22 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

मातृ दिवस पर ताजातरीन गजल -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२नौ माह जिसने कोख में पाला सँभाल करआये जो गोद  में  तो  उछाला सँभाल कर।१।*कोई …See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on सालिक गणवीर's blog post जग में नाम कमाना है....( ग़ज़ल :- सालिक गणवीर)
"आ. भाई सालिक गणवीर जी, सादर अभिवादन । सुन्दर गजल हुई है । हार्दिक बधाई।"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on C.M.Upadhyay "Shoonya Akankshi"'s blog post दोहे
"आ. आकांशी जी, सुन्दर दोहे हुए हैं । हार्दिक बधाई ।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post अब हो गये हैं आँख वो भूखे से गिद्ध की- लक्ष्मण धामी'मुसाफिर'
"आ. भाई आज़ी तमाम जी, हार्दिक धन्यवाद।"
Friday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service