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Rajkumar Shrestha
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Born in India and belong to Nepal. Intererst in reading & writing Poems,Ghazals & translate poems.

Rajkumar Shrestha's Blog

अनाम ख़त

अनाम ख़त

 

चेरी के फूल जैसे

मुरझाये हुए शब्दों को

जब छु जायेंगी तुम्हारी नफ्स

तो शायद,यह फिर से सब्ज़ हो खिलें

और हाँ, इनके पीछे

छुपे हुए अर्थों की खुश्बू

उड़ने लगे तुम्हारे कमरे में

 

सावन के बादलों-सी बेचैनी

मंडराएगी सिने पे कहीं

और जब तुम्हारी आँखों से बरसेगी झड़ी

होंठ पे उगती इक नन्ही मुस्कान

यूँ ही दब जायेगी दर्द के ओलों से

तब यह मुर्दे शब्द और भी सजीव लगेंगी

 

तो क्या…

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Posted on April 29, 2016 at 2:30pm — 3 Comments

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At 4:35pm on April 25, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

 ग़ज़ल की कक्षा 

 ग़ज़ल की बातें 

 

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At 4:56pm on April 23, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
शिज्जु "शकूर"
said…
ओबीओ परिवार में आपका स्वागत है आदरणीय राजकुमार श्रेष्ठजी
 
 
 

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