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MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI
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Mar 16
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"बहुत खूब।  नई दिशा, नया मार्ग, नई रौशनी की तरफ ले जाती लघुकथा। हार्दिक बधाई। "
Jul 31, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"जी , शुक्रिया। "
Jul 31, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"जी बिल्कुल , बहुत बहुत आभार।"
Jul 31, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"बहुत शुक्रिया , ओमप्रकाश जी"
Jul 31, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"सही है, बार-बार प्रयास करने से एक दिन सफलता तो हाथ लगती है। अच्छी लघुकथा है , हार्दिक बधाई। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"तेजवीर सिंह भाई जी की बात से सहमत।  आपका प्रयास सराहनीय है। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
""ये रोग आज नहीं तो कल चला ही जाएगा | पर उस रोग का क्या जो इन ऑफिसों में पल रहा है बरसों से ! " बहुत बड़ा तंज़ है ये हमारे लचर सिस्टम का। "प्रयास जारी है।" वाक्यांश आज के ज़माने में नकारात्मकता का प्रतीक है। आपका…"
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
""तू अकेली नहीं है। तुम भी चार हो। तू अपने साथ अपनी बेटियों की आवाज भी मिला।" - ये तो बहुत अच्छा आइडिया रहा। और फिर एक शानदार पंच, "हमें माँ की बलि देकर भाई नहीं चाहिये।" हार्दिक बधाई इतनी सुन्दर रचना के लिए। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"अत्यंत मार्मिक रचना बन पड़ी है सिंह साहब। आपने अमूर्त को भी पात्र बना कर मूर्त कर दिया। बेहतरीन प्रतीकों के माध्यम से इस दुनिया का दुःख दर्द बयान किया है, हार्दिक बधाई। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"सादर आभार, आदरणीय। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"बहुत शुक्रिया शेख साहब। आपकी सलाह सर आँखों पर। शीर्षक का उचित नाम सुझाएँ। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"सुन्दर रचना , एक प्रयास । "हिन्दी को राज्य भाषा नहीं राष्ट्र भाषा बनाने के समर्थन की पृष्ठभूमि तैयार करने के लिए..।" हार्दिक बधाई। "
Jul 30, 2020
MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-64 (विषय: प्रयास)
"माँ के आँसू (लघुकथा) डॉ रोहित के रेहबीटेशन सेंटर में जैसे ही ड्रग एडिक्ट्स उमेश के ठीक हो जाने पर, उसकी माँ ने डॉ रोहित के पैर छूने चाहे। डॉ रोहित ने स्वयं झुक कर उन्हें ऊपर उठा लिया। और हाथ जोड़कर उनका अभिवादन किया। - माता जी आप जैसे उमेश की माँ…"
Jul 30, 2020

Profile Information

Gender
Male
City State
BHOPAL MP
Native Place
Rahatgarh Distt - Sagar
Profession
Engineer in BHEL BHOPAL
About me
I am interested Laghuktha, Kahani, Afsane , Sansmarn

MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI's Blog

असमर्थ ( लघुकथा )

इनआर्बिट माल से सागर ने आफिस के लिए फॉर्मल ड्रेसेस तो खरीद लीं थीं। अभी और ज़रूरी परचेसिंग बाकी थी। तभी अनायास उसकी नज़र एक टॉय सेन्टर पर पड़ी। बड़े से हाल में, एक रिमोट कंट्रोल्ड एयरोप्लेन गोल- गोल चक्कर लगा रहा था। उसे देखते ही सागर को अपना बचपन याद आ गया। अपने होमटाउन के सिटिमार्केट से गुज़रते वक़्त ऐसे ही एक खिलौने की दुकान से उसने चाबी से चलने वाले हवाई जहाज़ को खरीदने की ज़िद की थी और अपनी ज़िद पूरी करवाने के लिए…

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Posted on July 21, 2018 at 11:30pm — 5 Comments

तसल्ली  (लघुकथा)

 "अरे  ...  ये तुम्हारा नेटवर्क कभी भी आता - जाता रहता है। मैं तो परेशान हो गया। पुराना बदल कर, ये तुम्हारी कम्पनी का नया वाला ब्रॉडबेंड लिया। उसका भी यही हाल है। 

 तुम ही बोल रहे थे न , ...  कि इसमें कोई दिक्कत नहीं होगी।  सर्विसिंग भी अच्छी है। अब तुम्हारे साथ भी वही रोना है।" शर्मा जी  ने गुस्से से कहा।
नहीं सर, आपको कोई दिक्कत नहीं होगी।

"ये लीजिये कनेक्टिविटी आ गई।",  उसने मॉडेम सेट करते हुए बोला । …
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Posted on July 19, 2018 at 8:00pm — 6 Comments

"मानसून की पहली बारिश का मज़ा" (लघुकथा - हास्य व्यंग्य)

मौसम विभाग ने तो मई के अंतिम सप्ताह में ही सम्भावना व्यक्त कर दी थी कि इस साल औसत से कहीं अधिक बारिश होगी । सभी लोग इस खबर को पढ़ कर खुश भी थे ।   कल रात से ही मानसून का सिस्टम सक्रिय हो गया । बहुत तेज़ गरज के साथ बादलों की आवाजाही होने लगी। 

 एक दम काली घटा ने सारे आसमान पर जैसे क़ब्ज़ा जमा लिया हो। रात से ही मूसलाधार बारिश हो रही थी।   सौरभ जैसे ही सुबह दस बजे घर से आफिस के लिए कार में जैसे ही बैठा , श्रुति बारिश में भीगती आईं , कार के…
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Posted on July 7, 2018 at 11:30pm — 9 Comments

" उमस " ( लघु कथा )

" हेलो - क्या हाल है , आसिफ ? " मैं तो ठीक हूँ तलत ,

" लेकिन मौसम बहुत बेकार है दिन भर बादलों की आना जाना जारी है लेकिन बारिश की कोई संभावना नज़र नहीं आती । घनघोर घटाएँ छाती तो हैं लेकिन वैसी बारिश नहीं होती जैसी होनी चाहिए। हलकी फुल्की फौहार थोड़ी देर के लिए माहौल में ठंडक पैदा कर देती। सूरज की तपिश इसी ठंडक को उमस में परिवर्तित कर देती है। बस ये उमस ही बर्दाश्त से बाहर है। बड़ी बेचैनी होती है। एक अजीब सी घुटन है। 

काश ! कोई इन घटाओं से कह दे आएं…

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Posted on August 20, 2017 at 6:50am — 6 Comments

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At 7:56am on May 3, 2017, MUZAFFAR IQBAL SIDDIQUI said…

धन्यवाद 

At 12:35am on January 8, 2016,
सदस्य कार्यकारिणी
मिथिलेश वामनकर
said…

आपका अभिनन्दन है.

ग़ज़ल सीखने एवं जानकारी के लिए

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