For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

सुनील प्रसाद(शाहाबादी)
Share

सुनील प्रसाद(शाहाबादी)'s Friends

  • Abhishek kumar singh
  • Krish mishra 'jaan' gorakhpuri
  • Shyam Mathpal
  • Saurabh Pandey
  • Pankaj Trivedi
 

सुनील प्रसाद(शाहाबादी)'s Page

Profile Information

Gender
Male
City State
लुधियाना (पंजाब)
Native Place
आरा (बिहार)
Profession
नौकरी
About me
सीखना केवल सीखना

सुनील प्रसाद(शाहाबादी)'s Photos

  • Add Photos
  • View All

सुनील प्रसाद(शाहाबादी)'s Blog

ग़ज़ल- खता होते होते

शाब्दिक कलन -१२२ १२२ १२२ १२२

*******************

मुहब्बत हुई जो खता होते होते।

सरे-राह गुजरी खफा होते होते। १

------

हसूं या रोऊँ जिंदगी पर खुदाया,

जहर हो गई है दवा होते होते। २

------

बची उम्र अब तो न जीने की कोई,

हँसी थी मुसीबत फना होते होते। ३

-------

शमां बुझ गई सो गई सारी महफ़िल,

विराना हुआ दिल वफ़ा होते होते। ४

--------

मिला तख़्त बैठें खजाना छुपाकर,

मुक़द्दस हुए अब सजा होते होते। ५

---------

रिवाजे बना… Continue

Posted on May 25, 2017 at 3:24pm — 11 Comments

हकीकत हूँ परेशां हूँ (मुसल्सल ग़ज़ल)

हकीकत हूँ परेशां हूँ कभी हारा कहाँ हूँ मैं।

हवा हूँ तरबतर खुश्बू चमन तेरे रवाँ हूँ मैं। 1

--------

खिले जो भी गुले गुलजार हर इक ओर देखो तो,

हसीं मौसम चटकता रंग सब का बागवां हूँ मैं। 2

----

अजानो में भजन में एक ही अक्स है मेरा,

दुआ हूँ मैं दया हूँ मैं सभी से आशना हूँ मैं। 3

----

गमों की बात ही क्या हाथ जो दो हाथ में मेरे,

चले आओ सितारों में चमकता कहकशां हूँ मैं। 4

----

अदालत से बचोगे तुम जहां भर के निगाहों से,

छुपाकर जो किये हो… Continue

Posted on January 12, 2017 at 10:04pm — 9 Comments

चाँद बेनूर वफ़ा शर्म हया के हद में, (ग़ज़ल)

बहरे रमल मुसम्मन मखबून महजूफ,

2122 1122 1122 22,

इश्क तो पाक था बेदाद हुआ जाता है।

कातिले फ़ौज ही आजाद हुआ जाता है। 1

-------

चाँद बेनूर वफ़ा शर्म हया की हद में,

जुल्म कर अब्र ये आजाद हुआ जाता है। 2

------

लाख ही यत्न करो मर्ज बढ़ा ही जाए,

बात बेबात ही जेहाद हुआ जाता है। 3

------

हो रही खाक लगी आग बसारत देखो,

था बशर मोम का बर्बाद हुआ जाता है। 4

------

ऐ खुदा शाद अता रूह को फ़रमा देना,

अब जुदा जीभ से हर स्वाद हुआ जाता है।… Continue

Posted on December 12, 2016 at 4:00pm — 18 Comments

हाल अपना भी (ग़ज़ल)

2122 2122 212,

आइए कुछ तो सुनाते जाइए।

हाल अपना भी बताते जाइए। 1

-----

लोग तो बातें बनायेगें बहुत,

झूठ पर भी मुस्कुराते जाइए। 2

-----

आप अपनी बात पर कायम रहें,

निर्धनो के घर बसाते जाइए। 3

-----

आप अनदेखा न यूँ हमको करें,

रूठ बैठा दिल मनाते जाइए। 4

-----

डालकर हम पर नजर बस इक जरा,

प्यार का अरमां सजाते जाइए। 5

-----

आपके सपने हमारे नींद में,

होश खोए है जगाते जाइए। 6

------

ये सँवरना आपके ही है… Continue

Posted on December 4, 2016 at 1:30pm — 7 Comments

Comment Wall (3 comments)

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

At 11:12am on October 22, 2016, सुनील प्रसाद(शाहाबादी) said…
मै अभारी हूँ पुरे ओ. बी.ओ. परिवार सहित उन सभी नियंता समूह के जिन्होंने मेरी रचना को इतना मान दिया और रचना कर्म में अग्रसरित मेरे पगो की गतिशीलता को बढ़ा दिया है।
सह सादर नमन।
At 11:45pm on October 16, 2016,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…

आदरणीय सुनील प्रसाद (शाहाबादी) जी.
सादर अभिवादन !
मुझे यह बताते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी "अब नहीं मेरे गांव में(छंदमुक्त चतुष्पदी कविता)"

 को "महीने की सर्वश्रेष्ठ रचना" सम्मान के रूप मे सम्मानित किया गया है | इस शानदार उपलब्धि पर बधाई स्वीकार करे |
आपको प्रसस्ति पत्र यथा शीघ्र उपलब्ध करा दिया जायेगा, इस निमित कृपया आप अपना पत्राचार का पता व फ़ोन नंबर admin@openbooksonline.com पर उपलब्ध कराना चाहेंगे | मेल उसी आई डी से भेजे जिससे ओ बी ओ सदस्यता प्राप्त की गई हो |
शुभकामनाओं सहित
आपका
गणेश जी "बागी
संस्थापक सह मुख्य प्रबंधक 
ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 7:39pm on March 26, 2015, Shyam Mathpal said…

Thanks a lot.

 
 
 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Anjuman Mansury 'Arzoo' posted a blog post

ग़ज़ल - इक अधूरी 'आरज़ू' को उम्र भर रहने दिया

वज़्न -2122 2122 2122 212ख़ुद को उनकी बेरुख़ी से बे- ख़बर रहने दिया उम्र भर दिल में उन्हीं का…See More
1 hour ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल - मिश्कात अपने दिल को बनाने चली हूँ मैं
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से…"
2 hours ago
Anjuman Mansury 'Arzoo' commented on Anjuman Mansury 'Arzoo''s blog post ग़ज़ल -सूनी सूनी चश्म की फिर सीपियाँ रह जाएँगी
"आदरणीय बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ,ग़ज़ल तक पहुंचने और हौसला अफ़जाई करने के लिए तहे दिल से शुक्रिया"
2 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

वादे पर चन्द दोहे .......

मीठे वादे दे रही, जनता को सरकार । गली-गली में हो रहा, वादों का व्यापार ।1।जीवन भर नेता करे, बस…See More
5 hours ago
Deependra Kumar Singh updated their profile
19 hours ago
Samar kabeer commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"//चर्चा समाप्त// जनाब सौरभ पाण्डेय जी, क्या ये आदेश है?  मेरी समझ में नहीं आ रहा है कि आप कैसी…"
20 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"लिखने और केवल लिखने मात्र को परिचर्चा का अंग नहीं कह सकते. पढ़ना और पढ़े को गुनना भी उतना ही जरूरी…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (ग़ज़ल में ऐब रखता हूँ...)
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, आदरणीय निलेश जी की टिप्पणी ग़ज़ल पर आई थी, जिस पर मेरी प्रतिक्रिया…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय ब्रज जी बस कोशिश जारी है आपका आभार ग़ज़ल तक आने के लिये ऐसा लगता है की शायद दोषरहित ग़ज़ल…"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
"जी आदरणीय अमीर जी सहृदय शुक्रिया ग़ज़ल तक आने के लिये आपका दिल से आभार"
yesterday
Aazi Tamaam commented on Aazi Tamaam's blog post ग़ज़ल: किसी कँवल का हंसीं ख़ाब देखने के लिये
" सहृदय शुक्रिया आ नूर जी आपकी ग़ज़ल मुझे बहुत पसंद आती है ग़ज़ल तक आने के लिये शुक्रिया मैं इस…"
yesterday
अमीरुद्दीन 'अमीर' commented on अमीरुद्दीन 'अमीर''s blog post ग़ज़ल (दिलों से ख़राशें हटाने चला हूँ )
"जनाब बृजेश कुमार ब्रज जी आदाब, ग़ज़ल पर आपकी आमद सुख़न नवाज़ी और हौसला अफ़ज़ाई का तह-ए-दिल से…"
yesterday

© 2021   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service