For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज दशहरा है और आस पास के घरों में बाहर गए बेटे बहुओं की खिलखिलाहट सुनाई दे रही है आज ये आवाजें केवल किसी त्यौहार के अवसर पर ही सुनाई देती हैं और दिन सभी अपने अपने में व्यस्त रहते हैं कहा जाता है कि ये आज के समय की मांग है .हम भी देख रहे हैं कि आदमी उन्नति के लिए देश विदेश मारा मारा फिर रहा है और परिवार के नाम पर अब मात्र औपचारिकता ही रह गयी है .किन्तु इसके पीछे एक सच भी है कि आज अपने बड़े आज के युवाओं को ''अपने जीवन में एक बाधा ''के तौर पर ही दिखाई देते  हैं .वे स्वतंत्रता से जीना चाहते हैं और उनकी उपस्थिति उन्हें इसमें सबसे बड़ा रोड़ा दिखती है .और इसका ही परिणाम है कि आज जो बच्चे अपने बड़ों से अलग रह रहे हैं उनके बच्चे भी कहीं और उनसे अलग ही रह रहे हैं कहा भी तो गया है कि ''जब बोया पेड़ बबूल का तो आम कहाँ से होए ''और ऐसे में वे भी वही झेल रहे हैं जो उन्होंने अपने बड़ों के साथ किया है और ऐसा नहीं है कि संस्कार नाम की चीज जब उन्होंने अपने बच्चों में डाली ही नहीं है तो वे इसकी आशा कर भी नहीं सकते और इसलिए बुढ़ापा जिसमे अपने अपनों का साथ सभी को प्यारा होता है उसमे वे सभी एकांत की जिंदगी गुजरने को विवश हो रहे है .

और रही संयुक्त परिवारों के टूटने की बात तो इसके लिए आज की स्थितियां ही नहीं उनमे व्याप्त विषमता भी जिम्मेदार कही जाएगी क्योंकि अधिकांशतया यही देखा गया कि संयुक्त परिवारों में घर का एक शख्स तो काम की चक्की में पिस्ता रहता था और अन्य सभी इसे उसका फ़र्ज़ कहकर या फिर ये कहकर कि ''अजगर करे न चाकरी पंछी करे न काम,दास मलूका कह गए सबके दाता राम ''.

           क्या मेरे विचारों में आपको कुछ गलत लग रहा है यदि हाँ तो दिल खोल कर बताएं क्या पता आपके अनुभव कुछ और कहते हों .

                                              शालिनी कौशिक [कौशल ]

Views: 777

Reply to This

Replies to This Discussion

बहुत कम में बहुत कुछ उठाया गया है, शालिनीजी.  एकल परिवार, बुज़ुर्गों की स्थिति, उत्तरदायित्व का वहन, वर्तमान व्यावसायिक माहौल, उसकी मांग, पारिवारिक सदस्यों की विचार धारा आदि-आदि. अब किसी एक पर कुछ साझा करना संभव नहीं हो पारहा है. बेहतर होता आप किसी एक आयाम को सामने लातीं और उस पर विचार साझा होते.

शुभेच्छा

आप सही कह रहे हैं सौरभ जी किन्तु जब बहुत कुछ दिखाई देता है तो फिर मन नहीं मानता और बहुत कुछ अभिव्यक्ति में सम्मिलित हो जाता है .विचार प्रस्तुत करने हेतु आभार 

एकाकीपन का दंश झेल रहे हमारे बुज़ुर्ग क्या सोचते हैं इस पर ध्यान देने का समय तक युवा पीढ़ी पर नहीं है .अफ़सोस होता है कि किस दिशा में जा रहा है मानव समाज .शायद संवेदनहीनता की दिशा में .यह शुभ नहीं है .

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"भूल जाता हूँ ये अक्सर कि उसे भूलना है अब किसी बात का भी होश किधर है साईं। इस पर एक उदाहरण देखें भूल…"
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"  राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
1 hour ago
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आरंभ से गिरह तक सभी शेर बहुत अच्छे हुए। उर्दू के दृष्टिकोण से 9वें शेर में 'बहर' तथा 10…"
1 hour ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। अच्छी गिरह के साथ गजल का अच्छा प्रयास हुआ है। हार्दिक बधाई।"
4 hours ago
Jaihind Raipuri replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"शह्र में झूठ का कुछ ऐसा असर है साईं अब तलक सच की नहीं ख़ैर ख़बर है साईं याद है या कोई रूहानी असर है…"
4 hours ago
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सुना ही था "बड़ी मुश्किल ये डगर है साईं"    राह-ए-ईमाँ का तो गुल तक भी शरर है…"
11 hours ago
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
" कोई  सुनता नहीं मेरी वो असर है साईं   अब तो दीदावर न कोई न वो दर है…"
21 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"कोख से मौत तलक रात अमर है साईंअपने हिस्से में भला कौन सहर है साईं।१।*धूप ही धूप मिली जब से सफर है…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"सादर अभिवादन।"
yesterday
Admin replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-187
"स्वागतम"
yesterday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  प्रस्तुत नवगीत को आपसे मिला उत्साहवर्द्धन हमें प्रयासरत रखेगा, आदरणीय अशोक…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service