For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

हिंदी की 50 सर्वश्रेष्ठ कह-मुकरियाँ

हिंदी की 50 सर्वश्रेष्ठ कह-मुकरियाँ 


"कह-मुकरी" एक बहुत ही पुरातन और लुप्तप्राय: काव्य विधा है! हज़रत अमीर खुसरो द्वारा विकसित इस विधा पर भारतेंदु हरिश्चंद्र ने भी स्तरीय काव्य-सृजन किया है. मगर बरसों से इस विधा पर कोई सार्थक काम नहीं हुआ है. "कह-मुकरी" अर्थात ’कह कर मुकर जाना’ ! इस अत्यंत लालित्यपूर्ण और चुलबुली लोकविधा 'कह-मुकरी' को पुनर्जीवित कर मुख्य धारा में लाने का श्रेय ओपन बुक्स ऑनलाइन को ही प्राप्त है. साथ ही इस लालित्यपूर्ण विधा के सममात्रिक समतुकांत स्वरुप को ओबीओ द्वारा ही स्पष्टतः स्थापित किया गया है.

 

वास्तव में इस विधा में दो सखियों के बीच का संवाद निहित होता है, जहाँ एक सखी अपने प्रियतम को याद करते हुए कुछ कहती है, जिसपर दूसरी सखी बूझती हुई पूछती है कि क्या वह अपने साजन की बात कर रही है तो पहली सखी बड़ी चालाकी से इनकार कर (अपने इशारों से मुकर कर) किसी अन्य सामान्य सी चीज़ की तरफ इशारा कर देती है. 

 

ध्यातव्य है, कि साजन के वर्णित गुणों का बुझवायी हुई सामान्य या अन्य चीज़ के गुण में लगभग साम्यता होती है. तभी तो काव्य-कौतुक उत्पन्न होता है. और, दूसरी सखी को पहली सखी के उत्तर से संतुष्ट हो जाना पड़ता है यानि पाठक इस काव्य-वार्तालाप का मज़ा लेते हैं.

 

सद्य-समाप्त ओबीओ लाइव महा-उत्सव अंक-42 के सफल आयोजन में कुल मिलाकर 326 कह-मुकरियाँ प्रस्तुत की गईं. अधिकांश रचनाएँ बेहद उच्च-स्तरीय थीं,  कथ्य और शिल्प की ऊँचाई देखते ही बनती थी. यह आयोजन भी वस्तुत: ओ.बी.ओ के ताज को अपने आलोक से जगमग करता एक अन्य बेशक़ीमती हीरे की हैसियत से शुमार हो गया है.

 

इस आयोजन में प्रस्तुत सर्वश्रेष्ठ कह-मुकरियों का संकलन आप सब के समक्ष प्रस्तुत है...


(1)
उसके कारण तन-मन गद्-गद् 
विस्तृत उर का धर्म-विषारद  
उसके प्रति मनभाव विशेष  
क्या सखि साजन ? ना सखि देश !

(2)
छन में तोला छन में माशा 
किन्तु बँधी उससे ही आशा 
भरूँ उसीके कारण मैं दम 
क्या सखि साजन ? ना सखि मौसम 

(3)
रौद्र सूर्य की कांति प्रखर में 
ओजपूर्ण है तेजस स्वर में  
होती तेवर में कुछ नर्मी 
क्या सखि साजन ? ना सखि गर्मी               (सौरभ पाण्डेय)
__________________________________________________
(4)
अंबर बौना उसके आगे
सागर उथला उसको लागे
रहबर, शाकिर, साबिर, दिलबर 
ऐ सखि साजन ? न सखी शायर 

(5)
लिपट लिपट पाँवों को चूमे
छूने भर से तनमन झूमे
चंचल चपल निरंकुश पागल
ऐ सखि साजन ? न सखी पायल

(6)
ऊँचा लम्बा, बे-नखरा है 
नस नस में मकरंद भरा है
सीधा सादा रहता बन्ना 
ऐ सखि साजन ? न सखी गन्ना

(7)
सीने में बारूद छुपाये
धधके जब कोई भड़काये
लेवे फिर ना शोले वापिस
ऐ सखि साजन ? न सखी माचिस

(8)
छेड़छाड़ करने की आदत  
बरजोरी की करता जुरअत  
हाथ जोड़ भी नहीं पसीजा
ऐ सखि  साजन ? न सखी जीजा                (योगराज प्रभाकर)
_________________________________________________
(9)
दृढ़ निश्चय की ओढ़े चद्दर
गढ़ते अपना स्वयं मुकद्दर
हमदम मेरे, बिलकुल अपने
ऐ सखि साजन? ना सखि सपने

(10) 
तन्हा देख मुझे वो घेरें
लाख चिढूं पर मुख ना फेरें
मंद-मंद दिल में मुस्का दें
ऐ सखि साजन? ना सखि यादें

(11)
भाग्यवान जो उनको पाया
शब्द-शब्द उनका अपनाया
तप्त मरू में शीतल तरुवर
ऐ सखि साजन? न सखि गुरुवर

(12)
रंग रूप फूलों सा पाया
पर ज़ालिम नें बहुत सताया
उससे खुदा बचाए दैया
क्या सखि साजन? नहिं ततैया                 (डॉ प्राची सिंह)
_____________________________________________________

(13)
भोर भये हर दिन वो आये               
मीठे सुर में मुझे जगाये                              
उसके बिन सूनी हैं रतियाँ                      
हे सखि साजन, ना सखि चिड़ियाँ               (अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव) 
_______________________________________________________
(14)
बिन उसके सिंगार अधूरा 
उसे देख ही होता पूरा 
तन मन सब उस पर है अर्पण 
क्या सखि साजन ? न सखि दर्पण              (अन्नपूर्णा बाजपेयी)
_______________________________________________________
(15)
दिल को भाये बहुत सुहाए 
जेठ में भी पावस बन जाए 
पतझड़ में जैसे हरियाली 
ऐ सखि सजनी ! न सखि साली                (सतीश मापतपुरी)
________________________________________________________
(16)
रातों को वह सदा जगाता 
कभी कान में कुछ कह जाता 
साँझ पड़े वो आता अक्सर 
क्या सखि साजन ?ना वो मच्छर

(17)
धीरे से मुखड़ा सहलाये 
चुनरी और लटें उलझाये 
छूकर शीतल कर दे तन -मन 
क्या सखि साजन ?नहीँ वो पवन

(18)
गालों को जब मर्ज़ी चूमे 
मस्ती में हरदम वह झूमे 
रुचता जैसे उसको ठुमका 
क्या सखि साजन ?नहिं री झुमका

(19)
इंतज़ार हर रात उसी का  
और न रहता  ध्यान किसी का 
सुख सपनों की एक उम्मीद 
क्या सखि साजन ?नहीँ री नींद                (ज्योतिर्मयी पन्त जी)
___________________________________________________

(20)
मित्र न कोई उनसे बढ़कर  
प्रेम भाव रखे हृदय तल पर 
सीधे दिल पर देते दस्तक 
क्या सखि साजन ?ना सखि पुस्तक             (रमेश चौहान) 
____________________________________________________
(21)
बिस्तर से तन पर चढ़ आये
काटे और झुरझुरी मचाये
तन-मन में कर दे वो हलचल
क्या सखि साजन ?ना री,  खटमल

(22)
उछल-कूद में सबसे आगे
शैतानी कर-कर के भागे
बड़ी अक़्ल है उसके अन्दर
क्या सखि साजन ?ना सखि बन्दर             (अजीत शर्मा आकाश)
_____________________________________________________
(23)
रंग गेहुँवा अंग कठोरा,
मधुर भाव मन लेत हिलोरा,  
सहज तरल वह दिल का दरियल,  
ऐ सखि साजन ? नहीं नारियल                (सत्यनारायण सिंह) 
_____________________________________________________
(24)
उसके बिन मैं रह ना पाऊँ
साथ चले जब बाहर जाऊँ
बिन उसके ये जीवन कैसा
क्या सखि साजन? ना सखि पैसा  

(25)
हर पल उसके साथ बिताऊँ
ना देखूं तो चैन न पाऊँ
मिलकर चुमूँ उसका मस्तक
क्या सखि साजन?ना सखि पुस्तक

(26)
घर आँगन को जो महकाए 
साँस-साँस में घुल-मिल जाए
कली-कली मन ही मन हुलसी
क्या सखि साजन?ना सखि तुलसी

(27)
हवा चले मस्ती में आये
तन से मेरे चिपटा जाये
कंठ लिपटता बनके पट्टा
क्या सखि साजन ?नहीं दुपट्टा                 (राजेश कुमारी जी)
__________________________________________________
(28)
मंद मंद चलता मुस्काता
सुरभित वो सब जग कर जाता
आने से खिल खिल जाता मन
का सखि साजन ? ना सखि पवन

(29)
तपित हृदय जब मेरा तरसे
नेह बूँद बन झर झर बरसे
देख मेरा मन चातक हर्षा
का सखि साजन ? ना सखि वर्षा               (माहेश्वरी कनेरी जी)
___________________________________________________
(30)
साथ हमेशा मेरे आता 
अंधकार से डर छुप जाता 
देखो उसकी अद्भुत माया
क्यों सखि साजन ?ना सखि साया

(31)
प्रेम बांटता प्रेम दिखाता 
सुख दुख में है साथ निभाता 
धड़काता वो मेरा जिया 
क्या सखि साजन ?नहीं डाकिया                (सरिता भाटिया जी)

___________________________________________________    
(32)
मीठी मीठी बात बनाता  
स्वपन लोक की सैर कराता
बातों से मन को हर लेता
ऐ सखी साजन ? न सखी नेता

(33)
दिन भर रहता जो मंडराता
गुनगुन गुनगुन गीत सुनाता
ना ये तोरा ना ये मोरा
ऐ सखि साजन ? न सखी भौंरा

(34)
छवि मोहिनी मन भरमाता
रास रचैय्या रास रचाता
चंचल मन को वश कर लेता
ऐ सखि साजन ? न सखि अभिनेता

(35)
रीत प्रेम की सदा निभाता
मधुर मिलन को जान लुटाता
प्रेम रंग मैं जो है रंगा
ऐ सखि साजन ? न सखि पतंगा                       (सचिन देव)
_________________________________________________
(36)
करुणा का सागर लहराता
नतमस्तक हों स्वयं विधाता
दुर्लभ है परिभाषा लिखनी
क्या सखि साजन ? न सखि जननी

(37)
सागर से ज्यादा गहराई
कितनी दुनिया भांप न पाई
अधिक विधाता से है क्षमता
क्या सखि साजन ? न सखि ममता

(38)
बिन बोले हर बात समझता
सुख दुख का वो कर्ता धर्ता
प्रातः संध्या और दोपहर
क्या सखि साजन ? न सखि ईश्वर

(39)
जीवन खातिर बहुत जरुरी
उससे सही न जाये दूरी
उसकी आवश्यकता प्रतिपल
क्या सखि साजन ? न सखि जल                      (अरुण शर्मा अनंत’)
___________________________________________________
(40)
जब वो गालों को छू जाये 
मन मेरा पुलकित हो जाये 
शर्म से हो जाऊं मै लाल 
क्या सखी साजन ?ना री गुलाल 

(41)
खुशबू उसकी मन को भाये 
अधर चूमता उसको जाये 
झंझट बहुत कराये रसिया 
क्या सखी साजन ?ना सखी गुझिया            (मीना पाठक जी) 
__________________________________________________
(42)
जब भी हो तो मेल कराये
अच्छा सबसे खेल कराये
बांटे गिन गिन सबको हर्ष
क्या सखि साजन , नही विमर्श 

(43)
जब मिल जाये खुश हो जाऊँ
नही मिले तो हँस ना पाऊँ  
उसको पाने हाथ मचलता  
क्या सखि साजन, नही सफलता                 (गिरिराज भंडारी)
___________________________________________________
(44)
भोर दोपहर साँझ बुलाये 
मुझको छप्पन भोग खिलाये 
रखती उसको जैसे दूल्हा
क्या सखि साजन? ना सखि चूल्हा

(45)
गोदी में सिर रख सो जाऊँ
कभी रात भर संग बतियाऊँ
रस्ता मेरा देखे दिन भर 
क्या सखि साजन? ना सखि बिस्तर

(46)
खोज खबर दुनिया की लाता
जब मैं कह दूँ गीत सुनाता
सबसे मेरा वही करीबी
क्या सखि साजन? ना सखि टीवी 

(47)
मीठी करता रहता बातें
उसके बिन तपती हैं रातें 
तन मन शीतल करता छूकर
क्या सखि साजन? ना सखि कूलर              (संजय मिश्रा हबीब’)
____________________________________________________
(48)
 हरदम उनके दिल में रहती
बिन उनके तो अँखियाँ बहती
प्यार करें ज्यों खोये आपा
क्या सखि साजन ? ना सखि पापा 

(49)
मुख चूमें तो मैं इतराऊँ
दिल की सारी उन्हें बताऊँ
मन्दिर मस्जिद वो ही काबा
क्या सखि साजन ? ना सखि बाबा 

(50)
मुझसे सह ना पाएं दूरी
ख्वाहिश भी हर करते पूरी
हरदम मेरी खातिर रैडी
क्या सखि साजन ? ना सखि डैडी              (अशोक कुमार रक्ताले)
_____________________________________________________

Views: 6781

Reply to This

Replies to This Discussion

एडमिन टीम को इस सार्थक प्रयास के लिए हार्दिक बधाई ...और  उसमें मेरी भी  कह मुकरियां शामिल की गईं उसके लिए सादर आभार | बहुत खुशी हो रही है इतने वरिष्ठों के साथ अपना नाम देख कर .. पुन: आभार 

आदरणीया मीनाजी,  आपकी कह मुकरियाँ चूँकि उस स्तर की थीं कि उन्हें शामिल न किया जाना संग्रह की सार्थकता को खारिज कर देता.
इस तथ्य को इस पोस्ट पर अपनी प्रतिक्रिया में मैंने निवेदित किया है.
आप द्वारा प्रस्तुत हई कतिपय कहमुकरियों के इस संग्रह में सम्मिलित होने पर हार्दिक बधाई.
सादर

सादर आभार सर

बहुत सुन्दर संकलन 

नए अभ्यासियों के लिए लाभदायक 

आ० मिथिलेश जी 

इस लालित्यपूर्ण विधा को पुनर्जीवित करने का भागीरथ प्रयास हमारे मंच ओबीओ द्वारा ही किया गया है...इस विधा में आप भी कलम आजमाइश अवश्य ही कीजिये. 

इस लालित्यपूर्ण विधा में लिखना एक अलग ही अनुभव है .... :))))

RSS

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Jaihind Raipuri posted a blog post

वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैं

ग़ज़ल 2122  1212  22वो समझते हैं मस्ख़रा दिल हैकितने दुःख दर्द से भरा दिल हैये मेरा क्यूँ हुआ है…See More
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन आपकी मनोहारी प्रतिक्रिया से समृद्ध हुआ । हार्दिक आभार आदरणीय । फागोत्सव…"
Wednesday
Nilesh Shevgaonkar and Dayaram Methani are now friends
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212   22 वो समझते हैं मस्ख़रा दिल है कितने दुःख दर्द से भरा दिल…"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Sushil Sarna's blog post दोहा सप्तक. . . . घूस
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। सुंदर दोहे हुए हैं। हार्दिक बधाई।"
Tuesday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

माना कि रंग भाते न फिर भी अगर पड़े -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२***पीछे गयी  है  छूट  जो  होली  गुलाल की साजिश है इसमें देख सियासी कपाल की।१। *…See More
Tuesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"जय-जय सादर"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"बेटा,  व्तक्तिवाची नहीं"
Saturday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"  आदरणीय दयाराम जी, रचनाकार का काम रचनाएँ प्रस्तुत करना है। पाठक-श्रोता-समीक्षक रचनओं में अपनी…"
Feb 28
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आदरणीय सौरभ पांडेय जी, हर रचना से एक संदेश देने का प्रयास होता है। मुझे आपकी इस लघु कथा से कोई…"
Feb 28

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी जी।  आप उन शब्दों या पंक्तियों को…"
Feb 28
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-131 (विषय मुक्त)
"आ. भाई सौरभ जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई। एक दो जगह टंकण त्रुतियाँ रह…"
Feb 28

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service