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कटे नहीं जीवन का तार ।

फूल बिना भौंरे का जीवन ,  जग में   है  कितना लाचार ।
जब  बाग वन कहीं खिले कली , आ जाये बिकल बेकरार ।
रंग रूप ना  दूरी देखे ,     नैनों    से    करता    इजहार ।
खार वार कुछ भी ना देखे ,    जोश     में  आये बार बार।
फूल को कहाँ  मालूम होता ,  कौन बने   जीवन आधार ।
भौंरा भी अनभिज्ञ होता है ,    कौन    डाले गले में हार ।
बिना मिलन कैसे चल पाये ,  फलता   बढ़ता ये संसार ।
बिना कली कैसे फल आये ,  बिना फूल   जीवन बेकार ।
फूल फलों से बाग महके ,    पशु पक्षी   करते गुलजार ।
तनहा रह कर फूल ना  खिले , बिना पौध सूना संसार ।
किसी पौध में  फल ना आये , गम कहीं सताये बार बार ।
सिर पकड़े माली फिर  रोता ,   दीप    बुझेगा हो लाचार ।
हर कोई ये वादा कर ले ,          कली ना टूटे कहीं यार ।
अनमोल है विश्व में जीवन ,  चलता रहे सदा घर बार ।
छुपे  कोई डाल ना  काटे ,   कटे नहीं  जीवन का तार ।
दीप जले ख़ुश हो  हर घर में , वर्मा हो हर नैया पार ।
श्याम नारायण वर्मा
मौलिक एवं अप्रकाशित

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Comment by Shyam Narain Verma on December 31, 2015 at 3:18pm
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