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चुरा लेता है दिल सबका [गीत]

चुरा लेता है दिल सबका ,
बड़ा चित चोर है मोहन ।
कि हर जर्रे में बसता है ,
नही किस ओर है मोहन ।

निगाहोँ में भरा हो जब ,
प्रभू के प्रेम का प्याला ।
दिखायी हर जगह देगा ,
तुम्हे वो बांसुरी वाला ।

हर सच्चे दीवाने को
यही महसूस होता है ,
है छाया हर जगह उसकी
बसा हर ठौर है मोहन ।

न दौलत का वो भूखा है ,
न रिश्वत से ही बिकता है ।
हमारी आँख का तारा ,
मोहब्बत से ही बिकता है ।

ज़माना कुछ भी करले पर
झुका सकता नही उसको ,
लेकिन प्रेम के आगे
बड़ा कमज़ोर है मोहन ।

मौलिक व अप्रकाशित
नीरज

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Comment by Neeraj Nishchal on July 12, 2013 at 10:45am

बहुत बहुत अनुग्रह केवल प्रसाद जी


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on July 10, 2013 at 10:51pm

कृष्ण प्रेम पगी बहुत सुन्दर भावाभिव्यक्ति...

दो जगह कुछ कहना चाहूँगी:

१.

कि हर जर्रे में बसता है ,
नही किस ओर है मोहन ।...........नहीं किस ओर है मोहन, में कथ्य मुझे कुछ अस्पष्ट लगता है, इसमें 'नहीं किस' के स्थान पर 'बसा हर ओर' सा कुछ किया जाना शायद सही हो.

२.हर सच्चे दीवाने को
यही महसूस होता है ,
है छाया हर जगह उसकी........वाचन करते हुए दो है एक साथ आ रहे हैं तो प्रवाह बाधित हो रहा है...दुसरे वाले हैं को 'कि' किया जा सकता है ...'कि छाया हर जगह उसकी'...इससे मात्रा भी बंद की बाकी पंक्तियों के समान १४ ही हो रही है.

शायद सहमत हों..

शुभेच्छाएँ

Comment by yatindra pandey on July 10, 2013 at 8:44pm

sundar va behtrin prastuti

Comment by कल्पना रामानी on July 10, 2013 at 6:35pm

बहुत सुंदर गीत के लिए आपको हार्दिक बधाई, नीरज जी....

सादर


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on July 10, 2013 at 6:23pm

तथ्यात्मक रूप से बहुत ही मनभावन रचना हुई है, नीरज भाई.  अपने इस अंदाज़ और अपनी लेखन शैली को बचा कर रखियेगा.

कथ्य पर अभी मशक्कत होती रहे. धीरे-धीरे प्रवाह को आप भी समझते जायेंगे.

शुभेच्छाएँ

Comment by mrs.Preeti G.sharma on July 10, 2013 at 3:53pm
Aadrniy neeraj ji, sunder rachna pr bahut bahut badhai
Comment by coontee mukerji on July 10, 2013 at 1:29pm

अति सुंदर.

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on July 9, 2013 at 10:09pm

आ0 नीरज भाई जी,    अतिसुन्दर भाव पूर्ण प्रस्तुति।   तहेदिल से हार्दिक बधाई स्वीकारें।   सादर, 

कृपया ध्यान दे...

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