For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

"मैं हूं मौन!"

मैं कौन हूं ?

मैं हूं मौन!
महिलाओं की चैन लुटती रही
सरे राह।
दामिनी-दिल्ली की अस्मिता बनी
लाचारी।
सड़क पर बिफर गई
बेचारी।
और मैं मोमबत्ती जलाकर देखता रहा!
मैं कायर हूं ? नहीं!
कायरता नहीं मुझमें!
बस उन अबलाओं और अपने घरों की सुरक्षा में
सेंध देखता रहा !
और मैं मौन रहा।1


पुलिस की घूस, ठूंस, लाठी
बेवजह चलते रहे
अविराम!
नौकरशाही घोटाले अथ.
नेताओं का खुला भ्रष्टाचार
उजाड़!
कनूनी दांव-पेंच से कतराता रहा
मैं चुप, सब देखता-सुनता रहा!
मैं अंधा हूं ! नहीं।
अंधता नहीं मुझमें!
बस स्वयं की रोजी-बच्चों की शिक्षा में एक
ब्लैक होल देखता रहा!
और मैं मौन रहा।2


बेटा मथुरा शान
जवान!
ये देश की कैसी मजबूरी
कटा दिया सिर को ना बेची
खुद्दारी!
भीड़ ने ही दिया श्रध्दांजलि
पिस कर यहां!
इण्डिया गेट पर जवान-ज्योति
बस! कराहती रही।
मैं गद्दार हूं? नहीं।
गद्दारी नही मुझमें
बस! बेहद सर्द मौसम मे खड़ा
मैं पानी और पानी की धार देखता रहा!
और मैं मौन रहा।3
के0पी0सत्यम/मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 608

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 27, 2013 at 9:15pm

आदरणीय, स्वर्ण जे0 ओेंकार जी, आपका हार्दिक आभार!  आपको सपरिवार प्रेम-सद्भावना के प्रतीक होली के पावन त्योहार पर बहुत बहुत शुभकामनाएं एवं धन्यवाद।

Comment by Dr. Swaran J. Omcawr on March 27, 2013 at 9:38am

केवल प्रसाद जी 

ख़ामोशी और आवाज़, शब्द और कृत्य, आलस्य एवम उत्साह, जड़ व चैतन्य के बीच झूलता आम आदमी के अस्तित्व की बात की आपने। क्या यह कायरता है गद्दारी है या केवल मौन। केवल जीवन को धक्का देने वाले असंख्य हैं यहाँ। क्या साहित्यकार कवी लेखक का शुमार है इन में। क्या लेखक आम व्यक्ति भी है? क्या लेखक का एक्टिविस्ट होना ज़रूरी है। क्या केवल कह कर, कवितायें लिख कर मानव जीवन की  गंभीर सरोकारों से मुक्ति पाई जा सकती है।
साहित्य जीवन पर कटाक्ष  ही तो है। साहित्यकार का रोल एक  कटाक्ष कर्ता से ज्यादा है। आप ने इंगित किया है।
लेकिन आम आदमी की व्यथा इस से भी ज्यादा है। केवल मौन आलस्य व जड़ जीवन है उस का। सहमा सहमा सा अस्तित्व है उसका।
धन्यवा
Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 27, 2013 at 8:52am

आदरणीय, श्री जवाहर लाल सिंह जी, आपका हार्दिक आभार!  आपको सपरिवार प्रेम-सद्भावना के प्रतीक होली के पावन त्योहार पर बहुत बहुत शुभकामनाएं हार्दिक एवं धन्यवाद।

Comment by JAWAHAR LAL SINGH on March 27, 2013 at 5:12am

एक ऍम आदमी की विवशता झलकती रचना! बधाई केवल प्रसाद जी आपकी अभिब्यक्ति में हम सभी शामिल हैं!

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 26, 2013 at 5:54am

आदरणीय श्री राज लल्ली शर्मा जी,  आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।

Comment by राज लाली बटाला on March 26, 2013 at 1:23am

बहुत ही बढि़या ।केवल प्रसाद जी

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 25, 2013 at 9:34pm

आदरणीया नीलिमा शर्मा जी,  आपका हार्दिक आभार एवं धन्यवाद।

Comment by Neelima Sharma Nivia on March 25, 2013 at 6:32pm

 बेहतरीन

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 25, 2013 at 5:00pm

आदरणीय श्री राजेश कुमार झा जी,  आपका  हार्दिक आभार एवं बहुत बहुत  धन्यवाद।

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on March 25, 2013 at 4:56pm

आदरणीय श्री राम शिरोमणि पाठक जी,  आपका बहुत बहुत हार्दिक आभार!

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post दोहे -रिश्ता
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी रिश्तों पर आधारित आपकी दोहावली बहुत सुंदर और सार्थक बन पड़ी है ।हार्दिक बधाई…"
Tuesday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"तू ही वो वज़ह है (लघुकथा): "हैलो, अस्सलामुअलैकुम। ई़द मुबारक़। कैसी रही ई़द?" बड़े ने…"
Monday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"गोष्ठी का आग़ाज़ बेहतरीन मार्मिक लघुकथा से करने हेतु हार्दिक बधाई आदरणीय मनन कुमार सिंह…"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आपका हार्दिक आभार भाई लक्ष्मण धामी जी।"
Monday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"आ. भाई मनन जी, सादर अभिवादन। बहुत सुंदर लघुकथा हुई है। हार्दिक बधाई।"
Monday
Manan Kumar singh replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"ध्वनि लोग उसे  पूजते।चढ़ावे लाते।वह बस आशीष देता।चढ़ावे स्पर्श कर  इशारे करता।जींस,असबाब…"
Sunday
Admin replied to Admin's discussion "ओबीओ लाइव लघुकथा गोष्ठी" अंक-120
"स्वागतम"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. रिचा जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अजय जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई चेतन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमीरुद्दीन जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए आभार।"
Saturday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-177
"आ. भाई अमित जी, सादर अभिवादन। गजल की प्रशंसा के लिए धन्यवाद।"
Saturday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service