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रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,

रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,
मगर जीवन चलता रहता हैं ,
कभी बेटा पैदा होने की ख़ुशी ,
तो कभी बाप का मरने का गम ,
कभी ख़ुशी के छलकते आँसू ,
तो कभी गम से होती आँखे नम ,
समय चक्र चलते रहते हैं ,
रिश्ते बनते हैं बदलते हैं ,

रिश्तों की मिठास ,
वो अपने बुआ के आते ही ,
उनकी गोद में चढ़ने के लिए ,
अक्सर मचलता था ,
लेकिन जब से बुआ करने लगी
पुश्तैनी जायदाद में
हिस्से की मांग ,
तब से ख़त्म होने लगी ,
रिश्तों की मिठास ,

Views: 270

Comment

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Comment by Jogendra Singh जोगेन्द्र सिंह on November 20, 2010 at 12:13am
.

बहुत सुन्दर दोस्त......

.

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on November 17, 2010 at 9:35am
बहुत खूब गुरु जी, बेहद सुंदर कविता, बिलकुल दिल मे जगह बनाने वाली कृति |
बधाई !

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