For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कहानी ( जज़्बातों का जनाज़ा )

कहानी
 
जज़्बातों का जनाज़ा
6 अगस्त 2012 को मेरी प्यारी नानी का चवर्ख कुल्लू हिमाचल में होना निश्चित हुआ था I हम लोग देहली में रहते हैं , दफ्तर के कार्यों की वजह से मेरा वहां जा पाना बेहद कठिन सा हो रहा था इसलिए मैंने अपने बेटे से कहा की मेरी जगह तुम हो आओ......... यह सुनकर वह बोला ....आपकी नानी, रिश्ते में तो केवल मेरी परनानी लगी तो मेरा वहां जाना क्या ज़रूरी है ...? यह सुनकर मैं सन्न सा रह गया यह सोचकर कि उसका मेरी नानी से नज़दीक का रिश्ता नहीं दूर का रिश्ता है I और मेरे लिए मेरे नाना, नानी किसी देवी देवता,भगवान यहाँ तक की मेरे माँ बाप से ज्यादा अहमियत रखते थे क्योंकि मुझे तीन महीने की उम्र से पाला था I लेकिन मेरे बेटे नें कितनी आसानी से मेरे जजवातों को आग कि भठ्ठी में झोंक दिया.... 'जेनरेशन गैप' शायद इसी को कहते है कि हमें तो उनके जज़्बातों कि हर तरह से कद्र होनी चाहिए लेकिन उन्हें हमारी सोच हमारे जज़्बातों से कुछ लेना देना नहीं I जाने को मैं जा सकता था लेकिन मेरा बहुत बड़ा नुक्सान हो जाता और बोह हुआ भी....... आखिर मुझे जाना ही पड़ा क्योंकि नानी तो मेरी ही थी सिर्फ मेरी किसी और कि नहीं I हालाँकि मुझपर किसी का कोई दबाव नहीं था लेकिन मेरा फ़र्ज़ मेरा प्यार झूठा नहीं था ..दिल से था उसका दर्द उसका एहसास मुझे केवल मुझे ही हो सकता है किसी और को नहीं ..... I
 
अपनी जगह शायद मेरा बेटा भी ठीक था उसने कहाँ मेरे जैसे घंटों घंटों बैठकर नाना नानी कि कहानियां सुनी है उनके साथ साथ घूमें फिरे है क्योंकि हमारे समय में न ही टेलीविज़न ही थे न इंटरनैट थे तो सिर्फ नाना नानी कि कहानियाँ य ज्यादा से ज्यादा रेडियो I
अपनें ही दिल का टुकड़ा
ऐसा दर्द दे गया
जीते जी मेरे जज़्बातों का
जनाज़ा निकल गया ..........
दीपक कुल्लुवी
03 -08 -2012 .

Views: 666

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Deepak Sharma Kuluvi on August 14, 2012 at 12:54pm

लक्ष्मण जी,रेखा जी,पांडे जी,अरुण जी  अपनी नानी के च्वर्ख के बाद कुल्लू से बापिस आ गया हूँ  और आप सबके जज्वात देखकर दिल को कुछ शांति,सकूं मिला......

धन्यवाद  

deepak......


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by अरुण कुमार निगम on August 5, 2012 at 6:35pm

अपने अपने मर्म को, अपना अपना काँध

दीपक जी, विचारणीय प्रश्न लिये सटीक कथा.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on August 5, 2012 at 3:47pm

श्री दीपक कुल्लुवी जी, बहुत सुंदर भावो की साथ प्रश्न छोड़ती कहानी के लिए बधाई |

जीते जी मेरे जज़्बातों काजनाज़ा निकल गया ....अब जमाने के साथ  मजबूरन सोच 
बदलनी होगी, बच्चों के द्रष्टिकोण से भी चिंतन कर निर्णय लेना होगा, जैसे इस कहानी 
लिया गया है |   
 
Comment by Rekha Joshi on August 5, 2012 at 12:28pm

अपनें ही दिल का टुकड़ा

ऐसा दर्द दे गया
जीते जी मेरे जज़्बातों का
जनाज़ा निकल गया ..,दीपक जी सही है यह अपने ही  दर्द देते है ,खूबसूरत कहानी ,बधाई 

सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 5, 2012 at 10:00am

लघुकथा की प्रविष्टि हेतु बधाई, वाह ! कई विचारणीय प्रश्न उभारती है यह लघुकथा.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

धर्मेन्द्र कुमार सिंह replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"जब कविता कोश चल सकता है तो ओबीओ क्यूँ नहीं। वहाँ भी शुरू में जो लोग थे आज नहीं हैं। नए-नए लोग…"
12 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"चर्चा में आपकी उपस्थिति तथा आपके भावमय शब्दों का स्वागत है आदरणीय मिथिलेश जी. "
16 hours ago
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "प्यारी दुश्मन" -[लघु कथा] (18)
"मेरी इस रचना के अवलोकन हेतु पाठकों को हार्दिक धन्यवाद।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post "शह और शिकस्त" - [लघुकथा] 25 (शतरंज संदर्भित) - शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"मेरी इस रचना पर 446 अवलोकन हेतु हार्दिक आभार पाठकों के प्रति।"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani commented on Sheikh Shahzad Usmani's blog post सूरज के तेवर (लघुकथा) [छंदोत्सव-58 चित्र से प्रेरित] /शेख़ शहज़ाद उस्मानी
"रचना पटल पर उपस्थिति, समीक्षात्मक टिप्पणी और सवाल हेतु हार्दिक धन्यवाद आदरणीया कान्ता रॉय जी। मेरी…"
yesterday
Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
Jun 1
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
Jun 1
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
May 31
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
May 30
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
May 30
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
May 30
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
May 30

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service