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यह शादी बे मेल हो गई बाबाजी

कितनी महंगी रेल हो गई बाबाजी
पैसेन्जर भी मेल हो गई बाबाजी

आदर्शों को फांसी  दे दी दिल्ली ने
नैतिकता  को जेल हो गई बाबाजी

सुख के बादल बिखर गये हैं बिन बरसे
दुःख की धक्कमपेल हो गई बाबाजी

नकल हो रही पास आज विद्यालय में
और पढ़ाई फेल हो गई बाबाजी

आई पी एल की हाट में हमने देखा है
खिलाड़ियों  की सेल हो गई बाबाजी

खादी वाले खड़े - खड़े खा जाते हैं
भोली जनता भेल हो गई बाबाजी

लोकराज ने लज्जा का परित्याग किया
यह शादी बे मेल हो गई बाबाजी

'अलबेला' की दोनों आँखों से देखो
राजनीति विषबेल हो गई बाबाजी

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Comment

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Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 8:47pm

लिखो लिखो रेखा जी,
बाबाजी अपने ही हैं ..ख़ूब लिखो.........
____आपकी लेखनी चलेगी तो बाबा की किरपा आएगी ...हा हा हा हा

Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 8:44pm

आपका हार्दिक धन्यवाद  अजय सिंह जी.......
सादर !

Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 8:43pm

आपकी वाह वाह  मेरे लिए वही महत्व रखती है  बुखार में एस्प्रो !
हा हा हा
___आभार अरुण श्रीवास्तव भाई साहेब..........

Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 8:36pm

सम्मान्य डॉ प्राची सिंह जी,
आप जैसी सधी हुई लेखिका जब सराहना करती है तो सचमुच बड़ा आनन्द अनुभव होता है

__स्नेह बना रहे................आभार

Comment by Er. Ambarish Srivastava on June 26, 2012 at 5:28pm

शुभ संध्या मित्रवर अलबेला जी !

Comment by Rekha Joshi on June 26, 2012 at 3:24pm

अलबेला जी ,

घोटालों के इस देश में ,
जनता हो गई फेल बाबाजी ,जय हो bahut khub ,mza aa gya 
Comment by Ajay Singh on June 26, 2012 at 12:59pm

आई पी एल की हाट में हमने देखा है 
खिलाड़ियों  की सेल हो गई बाबाजी    

                                                      अति सुन्दर ,,,,

 

Comment by Arun Sri on June 26, 2012 at 12:22pm

बाबाजी की महिमा गाने की सोची
मेरी बुद्धि फेल हो गई बाबा जी ................... अब कुछ नही कह सकता सिवाय वाह वाह के ! :-))


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on June 26, 2012 at 10:20am
आदरणीय अलबेला जी, 
आपकी हर रचना को पढ़ कर मन आनंदित हो जाता है, और बस वाह वाह ही निकलता है.
कितनी सहजता से छोटी छोटी बातों से ले कर बड़े से बड़े मुद्दों को बाबाजी  का पिटारा कदम दर कदम खोलता जा रहा है, मै दंग हूँ. हार्दिक बधाई स्वीकार करें.
 
आदर्शों को फांसी  दे दी दिल्ली ने
नैतिकता  को जेल हो गई बाबाजी .... बहुत सुन्दर
Comment by Albela Khatri on June 26, 2012 at 10:05am

सुबह सुबह उठते ही मैंने सर्वप्रथम
आपको गुडमोर्निंग भिजवाई बाबाजी

___

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