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सुंदर -असुंदर
रूप-रंग
उच्च-नीच
उतार-चढ़ाव
गुड़िया-गहने
बादल-बिजली
फूल-काँटे
जीत-हार
अपना-पराया
मान-अपमान
सारे भेद
मिटने लगते है
सपने छूटने
लगते है
जब मृत्यु शय्या पर
कोई ईश्वर से प्रार्थना 
कर रहा होता है
मुक्त हो जाने का

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Comment by संदीप द्विवेदी 'वाहिद काशीवासी' on March 1, 2012 at 11:21am

अत्यंत सुंदर भाव महिमा जी| बधाई स्वीकार करें|


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on March 1, 2012 at 8:06am

yahi jeevan ki antim sachchaai hai.sundar rachna.

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