For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

कई दिनों पहले अखबार में एक खबर आई - पोलीथिन पैक का उपयोग करने वालो के खिलाफ कड़ी से कड़ी सजा का प्रावधान ,
आम लोगो कि तरह मैंने भी पढ़ी ,आम लोग जो रोज सिर्फ इसलिए अखबार पढ़ते है कि उन्हें नियमो का भान हो सके मगर मानना न मानना हम mango people के हाथ में रहता है , खैर बात कुछ दिनों पहले कि है , बेटे को स्कूल से लाते समय रास्ते में सब्जी कि दुकान दिखाई दी , याद आया सब्जी नहीं है लेती चलू , 4-5 तरह कि सब्जियों तुलवाने के बाद लेजाने कि समस्या थी , सब्जी वाले से मेरी परेशानी देखी नहीं गयी ,तुरंत 5 पोलीथिन पैक बना कर हाथ में दे दी , तभी दोआम से दिखने वाले युवक अपनी मोटर साइकिल लेकर आये ,धनिया माँगा ,सब्जी वाले ने उसी तरह तोल कर धनिया पोलीथिन में दे दिया ,युवको ने तुरंत विरोध किया
पोलिथन दूकान दार को पकडाई हाथ में ही धनिया लिया और रवाना हो गए पता चला ये poor mango people नहीं है , जाने क्या महसूस हुआ, कुछ सब्जियों को बेटे के स्कूल बैग में तो कुछ गाडी कि डिक्की में खाली किया , पोलीथिन दूकान दार को देकर वहा से रवाना हुई , गाडी चलाते समय ठंडी हवा के झोंके जैसे बधाई दे रहे थे "आज आम से कुछ खास बन जाने की.

Views: 326

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Tilak Raj Kapoor on March 19, 2011 at 6:45pm

मनुष्‍य की सहज प्रवृति सुविधा की होती है। अगर जाने वाली सुविधा का विकल्‍प उससे कुछ अच्‍छे स्‍वरूप में मिल जाये तो इस प्रकार के बदलाव सार्थक हो जाते हैं। यह सोचने का विषय है कि ऐसा क्‍या किया जा सकता है कि पॉलीथीन को लेकर सहज स्थिति ऐसी बने कि यह पूरी तरह उपयोग से बाहर हो सके।

Comment by रवि बेक on February 19, 2011 at 8:23pm
आप वास्तव मेँ खास है क्योँकि आप के जैसे अपने आप को बदले ऐसे बहुत कम होते।
प्रेरणादायक लेख बधाई हो आप को

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

Sushil Sarna commented on Saurabh Pandey's blog post कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ
"वाह आदरणीय सौरभ पाण्डेय जी एक अलग विषय पर बेहतरीन सार्थक ग़ज़ल का सृजन हुआ है । हार्दिक बधाई…"
5 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey posted a blog post

कापुरुष है, जता रही गाली// सौरभ

२१२२ १२१२ २२/११२तमतमा कर बकी हुई गालीकापुरुष है, जता रही गाली मार कर माँ-बहन व रिश्तों को कोई देता…See More
8 hours ago
Chetan Prakash commented on सुरेश कुमार 'कल्याण''s blog post भादों की बारिश
"यह लघु कविता नहींहै। हाँ, क्षणिका हो सकती थी, जो नहीं हो पाई !"
Tuesday
सुरेश कुमार 'कल्याण' posted a blog post

भादों की बारिश

भादों की बारिश(लघु कविता)***************लाँघ कर पर्वतमालाएं पार करसागर की सर्पीली लहरेंमैदानों में…See More
Monday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . . . विविध

मंजिल हर सोपान की, केवल है  अवसान ।मुश्किल है पहचानना, जीवन के सोपान ।। छोटी-छोटी बात पर, होने लगे…See More
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय चेतन प्रकाश भाई ग़ज़ल पर उपस्थित हो उत्साह वर्धन करने के लिए आपका हार्दिक …"
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय सुशील भाई  गज़ल की सराहना कर उत्साह वर्धन करने के लिए आपका आभार "
Monday

सदस्य कार्यकारिणी
गिरिराज भंडारी commented on गिरिराज भंडारी's blog post ग़ज़ल - चली आयी है मिलने फिर किधर से ( गिरिराज भंडारी )
"आदरणीय लक्ष्मण भाई , उत्साह वर्धन के लिए आपका हार्दिक आभार "
Monday
Tilak Raj Kapoor replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"विगत दो माह से डबलिन में हूं जहां समय साढ़े चार घंटा पीछे है। अन्यत्र व्यस्तताओं के कारण अभी अभी…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"प्रयास  अच्छा रहा, और बेहतर हो सकता था, ऐसा आदरणीय श्री तिलक  राज कपूर साहब  बता ही…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"अच्छा  प्रयास रहा आप का किन्तु कपूर साहब के विस्तृत इस्लाह के बाद  कुछ  कहने योग्य…"
Sunday
Chetan Prakash replied to Admin's discussion "ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा" अंक-182
"सराहनीय प्रयास रहा आपका, मुझे ग़ज़ल अच्छी लगी, स्वाभाविक है, कपूर साहब की इस्लाह के बाद  और…"
Sunday

© 2025   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service