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तहे दिल से शुक्र गुज़ार

सबसे पहले मैं आप  सबसे माफ़ी चाहती हूँ कुछ मसरूफियत की वजह से मैं ओ बी ओ लाइव तरही मुशायरा  आप सबके खूबसूरत कमेंट्स  का शुक्रिया अदा नहीं कर पाई , मैं आप जैसे ज़हीन लोगो के  के बारे में क्या  लिखूं...यहाँ सब के सब इतने काबिल हैं 

  के शायद उनके बारे में कुछ लिखना सूरज को चिराग दिखाने के बराबर है..मेरे अल्फाज़ आपकी तारीफ़ के लायक तो नहीं
आपको बयान कर सकूं, मेरी हैसियत तो नहीं,दोस्त आपकी दोस्ती मेरे सर आँखों पे कबूला आपने, ज़र्रा नवाजी आपकी वरना मेरी ऐसी शक्सियत तो नहीं....................................
.आप ने सराहा इस नाचीज़ की ग़ज़ल को उसके लिए तहे दिल से शुक्र गुज़ार हैं आप सबके ..आपसे इसी खलूस और हौसला आफजाई की तलबगार हूँ ,जिस तरह आप सबने अपने मखसूस और मेहरबान लहजे से सराहा मेरी ग़ज़ल को उसके लिए आप सभी की आभारी हूँ ...सलामती हो ,हमेशा खुश रहें....इस दुआ के साथ
सिया 

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Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 2, 2011 at 5:04pm

पुनः स्वागत है सिया जी !

Comment by siyasachdev on October 2, 2011 at 4:53pm

janab Ambarish Srivastava saheb...

liye teh-e-dil se shukriya ada karti hoon aapka salamati ho
Comment by Er. Ambarish Srivastava on October 2, 2011 at 9:48am

स्वागत है सिया सचदेव जी ! आपका बहुत बहुत आभार! 

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