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अपन बाँहि में अहाँ के गछारि लेब हम

नजरि सँ करेज में उतारि लेब हम

एक बेर हँ तँ कहि कए देखिऔ

सगरो बाट पर आँचर पसारि देब हम

 

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Replies to This Discussion

प्रयोगक स्तर पर एहैन रचनादि क प्रासंगिकता नकारल संभव नै. ’गछारि लेब’ क प्रयोग सँ मोन मुग्ध भेल अछि.

अनचिन्हारजी क एइ मंचप सद्यः पोस्ट सँ हुनकर रचना संसारक प्रति उत्सुकता टा बनल, सेहो ई रचना पर दृष्टिपातक एकटा पैग कारन भेल अछि. 

रचना लेल अहाँक हार्दिक धन्यवाद.

सगरो बाट पर आँचर पसाईर लेब हम ...... बड्ड नीक कहलियै आँहा .....चारी पंक्तिये में प्रेमक धार बही गेल ।

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