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Nemichand Puniya
  • Pali-Marwar,Rajsthan
  • India
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Gazal

गजल

औरों पे कभी, बोझ न बन,
बहरहाल जाँ सोज न बन।


कायम इज्जत रखनी हो तो,
मेहमां किसी का रोज न बन।


जो किश्ती को ही ले डूबे,
दरिया की वो मौज न बन।


बगैर दावतनामा कभी,
कही शरीके-भोज न बन।


अपने गिरेबाँ में रहा करो ‘चंदन‘
बेखुदी में राजा भोज न बन।।

Posted on March 11, 2011 at 8:00pm — 2 Comments

Comment Wall (8 comments)

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At 6:53pm on June 3, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Aadarniy Shree,Ganesh Jee "Bagi" sahib,Bahut-Bahut dhanywad, Aapka sneh aur OBO pariwar ka aashirwad aaj ke din mila main  dhany hua.Aabhaar
At 9:48pm on June 2, 2011,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 8:41pm on June 2, 2011, nemichandpuniyachandan said…
Aadarniy Ravi Kumar Guru Ji,Aapka Ashirvad aaj ke din mila,main dhany hua,Bahut-Bahut dhanyvad.
At 2:49pm on June 2, 2011, Rash Bihari Ravi said…
janam din mubarak ho
At 3:03pm on December 17, 2010,
मुख्य प्रबंधक
Er. Ganesh Jee "Bagi"
said…
At 10:42am on December 15, 2010, Admin said…

आदरणीय नेमीचंद पुनिया जी,

सादर अभिवादन,

आपकी पुस्तक " कतरों का समंदर " का मुफ्त विज्ञापन OBO के मुख्य पृष्ठ पर कर दिया गया है | बहुत बहुत बधाई आपको |

आप सबका अपना

एडमिन

ओपन बुक्स ऑनलाइन

At 11:37am on December 14, 2010, PREETAM TIWARY(PREET) said…

At 6:07pm on December 13, 2010, Admin said…

 
 
 

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