For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

गज़ल....खार रचता आदमी....

बह्र... 2122   2122   212

खुद को खुद से कब समझता आदमी.

जीत  कर  जब  हार  कहता  आदमी

मौन  में  संजीवनी  तो  है  मगर

मैं हुआ कब चुप अकडता आदमी.

आस्मां के पार भी खुशियां  दुखी,

हर कदम पर शूल सहता आदमी.

फूल-कलियां मुस्कराती हर समय,

देवता  को    भेंट   करता   आदमी.

आदमी  ही  आदमी  को  पूजता,

आचरण पशुता अखरता आदमी.

प्यार  में   सम्वेदना   करुणा   बहुत,

कीट, खग, पशु हित विलखता आदमी.

धर्म "सत्यम" के शिवा कुछ भी नहीं,

मैं, अहम  वश  खार रचता  आदमी.

के0पी0 सत्यम / मौलिक व अप्रकाशित

Views: 649

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 30, 2015 at 11:01pm

आ0 लडीवाला भाईजी,    आपका तहेदिल से शुक्रिया ...आभार.....सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 30, 2015 at 10:59pm

आ0 भंडारी भाई जी,   गज़ल पर विशद तर्कसंगत विवेचना के लिये आपका तहेदिल से शुक्रिया ...आभार.   गज़ल की बारीकियो तक मेरी पहुंच  अभी नही बन पाई है....फिर भी अपनी समझ के अनुसार प्रयासरत हूं. बिना आप लोगो के यह सब सम्भव नहीं हो सकेगा.

मौन  में  संजीवनी  तो  है  मगर     --

कब हुआ चुप  बस अकडता आदमी.     -- उला मे आये मगर शब्द के भाव  के अनुसार, कौन सा भाव  सानी मे हो , पहले वाला या मै                                                         जो कह रहा हूँ अभी वो ॥.............. " मैं " सर्वनाम  और  क्रिया विशेषण दोनो के लिये  ही                                                            प्रयुक्त हो रहा है. इसलिये मेरे हिसाब से पहले वाला ही सही है.

आदमी  हो, पूज्य  लगता आदमी 

किंतु पशुता  हो , अखरता आदमी.      ---  रचना कार के भावों तक पहुँचना आसान नहीं होता , फिर भी अगर कुछ सही लगे तो स्वीकार कीजिये ,----------गेयता नही  आ रही  है.........पहले वाला ही  सही है.

हाँ एक बात और जो पहले भूल गया था  -- 

मैं, अहम  वश  खार रचता  आदमी.      ---  मै और अहम एक ही भाव के शब्द हैं........आपने बिल्कुल सही कहा .  मैं सहमत हूँ.

 

पर , अहम  वश  खार रचता  आदमी.    --- ऐसा करें तो  ? सोचियेगा ।  .....बहुत ही सुंदर भाव....शुक्रिया आभार. सादर

 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 28, 2015 at 11:31am

बहुत सुंदर  और भावरण  गजल ले लिए बधाई  श्री केवल प्रसाद जी


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 28, 2015 at 11:17am

आदरणीय केवल भाई , भाव और तार्किकता को समझाना मुश्किल काम होता है , फिर भ्र्र उदारण दे के प्रयास कर रहा हूँ , उला को सानी का कौन भाव संतुष्ट कर रहा है , मेरी समझ में --

मौन  में  संजीवनी  तो  है  मगर     --

कब हुआ चुप  बस अकडता आदमी.     -- उला मे आये मगर शब्द के भाव  के अनुसार सोचियेगा , कौन सा भाव  सानी मे हो , पहले वाला या मै जो कह रहा हूँ अभी वो ॥

आदमी  हो, पूज्य  लगता आदमी 

किंतु पशुता  हो , अखरता आदमी.      ---  रचना कार के भावों तक पहुँचना आसान नहीं होता , फिर भी अगर कुछ सही लगे तो स्वीकार कीजिये ,

हाँ एक बात और जो पहले भूल गया था  -- 

मैं, अहम  वश  खार रचता  आदमी.      ---  मै और अहम एक ही भाव के शब्द हैं

 

पर , अहम  वश  खार रचता  आदमी.    --- ऐसा करें तो  ? सोचियेगा ।  

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 28, 2015 at 10:26am

आ0 वामनकर भाई जी,  आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 28, 2015 at 10:26am

आ0 जान भाई जी,  आपका हार्दिक आभार. सादर

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on June 28, 2015 at 10:25am

आ0 भन्डारी भाई जी,  आपका हार्दिक आभार.  भाई जी मैं समझ नही सका तनिक और स्पष्ट करें.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on June 28, 2015 at 4:19am

आदरणीय सत्यम जी, बहुत सुन्दर ग़ज़ल हुई है. हार्दिक बधाई आपको

Comment by Krish mishra 'jaan' gorakhpuri on June 26, 2015 at 9:15pm

मौन  में  संजीवनी  तो  है  मगर

मैं हुआ कब चुप अकडता आदमी  वाह वाह !

सुन्दर गज़ल हुयी है आदरणीय केवल सर! बधाई!


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 25, 2015 at 9:48pm

आदरणीय केवल भाई , गज़ल खूब सुन्दर हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ गज़ल के लिये ।  तार्किकता के लिहाज़ से चाहें तो शे र न. 2 और शे र न. 5 को आप और देख सकतें हैं ॥

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Blogs

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post देवता क्यों दोस्त होंगे फिर भला- लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और विस्तृत टिप्पणी से मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार।…"
3 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post सच काफिले में झूठ सा जाता नहीं कभी - लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'
"आ. भाई सुशील जी, सादर अभिवादन। गजल पर उपस्थिति और उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।"
4 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post आदमी क्या आदमी को जानता है -लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई रवि जी सादर अभिवादन। गजल पर आपकी उपस्थिति का संज्ञान देर से लेने के लिए क्षमा चाहता.हूँ।…"
4 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Ashok Kumar Raktale's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय अशोक भाई, आपके प्रस्तुत प्रयास से मन मुग्ध है. मैं प्रति शे’र अपनी बात रखता…"
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"रचना पर आपकी पाठकीय प्रतिक्रिया सुखद है, आदरणीय चेतन प्रकाश जी.  आपका हार्दिक धन्यवाद "
23 hours ago

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"उत्साहवर्द्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय अशोक भाईजी "
23 hours ago
Ashok Kumar Raktale posted blog posts
yesterday
Chetan Prakash commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत : सूर्य के दस्तक लगाना // सौरभ
"नव वर्ष  की संक्रांति की घड़ी में वर्तमान की संवेदनहीनता और  सोच की जड़ता पर प्रहार करता…"
yesterday
Sushil Sarna posted blog posts
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी सृजन के भावों को मान देने का दिल से आभार आदरणीय जी । "
yesterday
Sushil Sarna commented on Sushil Sarna's blog post दोहा पंचक. . . क्रोध
"आदरणीय अशोक रक्ताले जी सृजन पर आपकी समीक्षात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार । इंगित बिन्दु पर सहमत…"
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post कुर्सी जिसे भी सौंप दो बदलेगा कुछ नहीं-लक्ष्मण धामी "मुसाफिर"
"आ. भाई सौरभ जी सादर अभिवादन। गजलपर उपस्थिति और सप्रेमं मार्गदर्शन के लिए हार्दिक आभार। इसे बेहतर…"
yesterday

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service