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पापा तुम बहुत याद आते हो ...

पापा तुम बहुत याद आते हो ..

समय की बेलगाम रफ़्तार ने 
पापा आपकी छत्रछाया से 
साँसों के प्रवाह से 
आपको मुक्त कर दिया 
दुनिया कहती हैं कि ईश्वर है कहाँ ?
शायद दुनिया पागल हैं 
पर पापा आप ही तो ईश्वर का रूप हो 
मुझसे पूछे ये दुनिया, जब पिता नहीं होते 
तो ईश्वर के नाम से जाने जाते है 
आपके जाने के बाद 
तमाम कोशिशों के बावजूद 
सामने की दीवार पे 
आपकी तस्वीर नहीं लगा पाई 
आपने तो देखा था पापा 
फोटो-फ्रेम से बाहर निकल के 
चुपचाप खड़े जो हो गये थे मेरे साथ 
सूनी सपाट दीवार पे 
एक कील भी न लगा पाई थी मैं 
हाथ तो चल रहे थे 
दिमाग भी साथ दे रहा था 
पर ये व्याकुल, व्यथित मन 
ये तो उतारू था विद्रोह पे 
बार-बार व्यथित, व्याकुल मन 
विद्रोह करता ईश्वर से कि 
क्यों दूर कर दिया आपको मुझसे 
मेरे वजूद में शामिल था आपका अंश 
इतना आसान नहीं आपसे अलग होना 
मैं भी समझ नहीं पाई 
कैसे चलती फिरती मुस्कुराहट 
को कैद कर दूं इस फ्रेम की चारदिवारी में 
आपसे बेहतर मेरे मन का द्वन्द
कौन समझ सकता है पापा .......
आपके जाने के साथ 
मेरा बचपना भी अनायास 
साथ छोड़ गया, माँ के 
अकेलेपन के पायदान 
अब मुझे साफ़ नज़र आते हैं.......
मुझे याद नहीं कि आपके होते 
कभी ईश्वर से हमने कुछ माँगा 
ऐसा भी नहीं की ईश्वर में विश्वाश नहीं 
आपके साए का विस्तार इतना ज्यादा था 
कि उसके बाहर जाने के लिए सोचा ही नहीं
मेरे प्रिय पापा तुम बहुत याद आते हो ......

 

मौलिक एवं अप्रकाशित

सुनीता दोहरे
प्रबंध सम्पादक
इण्डियन हेल्पलाइन न्यूज़

 

 

 

Views: 1881

Comment

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Comment by sunita dohare on May 18, 2015 at 2:56pm

vijay nikore जी , नमस्कार  आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल शुक्रगुजार हूँ आपका बहुत -बहुत धन्यवाद

Comment by vijay nikore on May 18, 2015 at 3:35am

सुन्दर भावनाओं से पिता श्री को उचित सम्मान दिया है।

Comment by sunita dohare on May 2, 2015 at 12:30am

shree suneel जी , नमस्कार    आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल शुक्रगुजार हूँ आपका बहुत -बहुत धन्यवाद

Comment by shree suneel on May 1, 2015 at 11:44pm
/आपके साए का विस्तार इतना ज्यादा था
कि उसके बाहर जाने के लिए सोचा ही नहीं.. /
आदरणीया सुनीता दोहरे जी, भावुक कर देने वाली रचना. उपर्युक्त पंक्तियाँ में भला और क्या जोङा जा सकता है जीवन में पिता के महत्व को दर्शाने के लिए.
इस सुन्दर रचना के लिए बधाईयाँ.
Comment by sunita dohare on May 1, 2015 at 9:22pm

MAHIMA SHREE जी , नमस्कार 

आपका बहुत -बहुत धन्यवाद !

Comment by MAHIMA SHREE on May 1, 2015 at 6:29pm

पिता को सर्मपित लेखन को नमन

Comment by sunita dohare on May 1, 2015 at 4:59pm

डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव जी, आदरणीय आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए तहे दिल शुक्रगुजार हूँ आपका बहुत -बहुत धन्यवाद ! सादर प्रणाम !

Comment by sunita dohare on May 1, 2015 at 4:58pm

Samar kabeer जी , आपका बहुत -बहुत धन्यवाद ! नमस्कार 

Comment by sunita dohare on May 1, 2015 at 4:57pm

Saurabh Pandey जी , आदरणीय आपने बिलकुल सही कहा है आपकी स्नेहिल प्रतिक्रिया के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद आपका ! सादर प्रणाम 

Comment by sunita dohare on May 1, 2015 at 4:50pm

जितेन्द्र पस्टारिया जी , आपका बहुत -बहुत धन्यवाद ! नमस्कार 

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