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‘अजी सुनते हो ---

‘हाँ सुनाओ, ‘

‘वह मिसेज मल्होत्रा की बहू, जिसके फरवरी में बेटा हुआ था I वह बेटा निमोनिया से मर गया और हमारी जो महरिन है इसकी ननद के भी लल्ला हुआ था, वह भी तीन दिन पहले डायरिया से मर गया और अपनी बेटी की सहेली -----‘

‘--- उसका बच्चा भी मर गया होगा I’

‘हां बिलकुल ---- ‘

‘मगर यह स्टैटिक्स तुम मुझे क्यों बता रही हो ?’

‘किसे बताऊँ, एक वह अपनी पोती है I छह महीने की हो गयी, उसे जुकाम तक न हुआ I’

(मौलिक व् अप्रकाशित )

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Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:46pm

आदरणीय शिज्जू भाई

आपके प्रोत्साहन से मन स्वस्थ हुआ i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:44pm

आ० गुमनाम जी

जब तक आपका चित्र नहीं देखा मैं आपकी रचनाओ से आपको एक प्रौढ़  शायर समझता था i पर माशा अल्लाह आप तो ----आपका सादर आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:42pm

वीर मेहता जी

आपका आभारी हूँ i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:41pm

विजय सर !

आपने सही कहा  जुकाम एक स्थाई डिसआर्डर  है i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:39pm

मित्र  भंडारी जी

आपके प्रोत्साहन से संतोष हुआ i सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:37pm

आ० सौरभ जी

आपकी स्नेहिल् और सारगर्भित  टिप्पणी के प्रति आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:36pm

महनीय राजेश  कुमारी जी

सचमुच आपकी प्रतिक्रिया वाजिब है i  सादर i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:34pm

सोमेश कुमार जी

असली जुकाम किसे है --सटीक टिप्पणी के लिए आपका आभार i  

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:32pm

आदरणीय विनोद खंगवाल जी

आपके प्रोत्साहन का आभार i

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on January 26, 2015 at 12:31pm

आदरणीय वामनकर जी

आपका बहुत बहुत आभार i

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