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क्या अब भी // रवि प्रकाश

क्या अब भी पुलिनों तक आते हैं सब धारे,
क्या सूखी सिकता में मोती मिलते होंगे?
अँधियारी रातों में गाते हैं सब तारे,
क्या उथली नींदों में सपने खिलते होंगे?
.
हलचल बढ़ जाती है क्या कुछ पदचापों से,
अपना कोई कोना हाथों से गिरता है?
कटता एकाकीपन अस्फुट आलापों से,
सहसा अब भी कोई सुधियों में तिरता है?
.
रातों की निर्मितियाँ दिन में ढह जाती हैं,
लज्जा की लाली क्या अधरों को सिलती है?
क्या अब भी सीने में टीसें रह जाती हैं,
तृष्णा के छोरों पर मृगतृष्णा मिलती है?
.
डगमग नौकाओं को क्या तट मिल जाते हैं?
क्या अब भी प्यासों को पनघट मिल जाते हैं?
.
-मौलिक एवं अप्रकाशित
-30.10.2014

Views: 827

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Comment by Ravi Prakash on November 3, 2014 at 10:47pm
बहुत-बहुत धन्यवाद।
Comment by JAWAHAR LAL SINGH on November 3, 2014 at 7:58pm

बहुत ही सुन्दर भाव और शब्द विन्याश ... बहुत बहुत बधाई!

Comment by Ravi Prakash on November 3, 2014 at 12:36pm
इतना स्नेह और आशीर्वाद देने के लिए सभी सुधी जनों का कोटिश: धन्यवाद ।
Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on November 3, 2014 at 11:21am

बेहतरीन  i अति सुन्दर  i

रातों की निर्मितियाँ दिन में ढह जाती हैं,
लज्जा की लाली क्या अधरों को सिलती है?
क्या अब भी सीने में टीसें रह जाती हैं,
तृष्णा के छोरों पर मृगतृष्णा मिलती है?

Comment by khursheed khairadi on November 3, 2014 at 10:38am

क्या अब भी पुलिनों तक आते हैं सब धारे,
क्या सूखी सिकता में मोती मिलते होंगे?
अँधियारी रातों में गाते हैं सब तारे,
क्या उथली नींदों में सपने खिलते होंगे?

आदरणीय रविप्रकाश जी ,बहुत ही सुन्दर रचना हुई है ,विशेष तौर पर ये पंक्तिया कालजयी बन पड़ी है 

तृष्णा के छोरों पर मृगतृष्णा मिलती है?
.
डगमग नौकाओं को क्या तट मिल जाते हैं?
क्या अब भी प्यासों को पनघट मिल जाते हैं?

सादर अभिनन्दन
.

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on November 3, 2014 at 10:03am

अँधियारी रातों में गाते हैं सब तारे,
क्या उथली नींदों में सपने खिलते होंगे?-----वाह ! बहुत सुंदर | हार्दिक बधाई श्री रवि प्रकाश जी 

Comment by Ravi Prakash on November 2, 2014 at 2:29pm
धन्यवाद।
Comment by somesh kumar on November 2, 2014 at 12:58pm

सुंदर ,प्रस्तुति

Comment by Ravi Prakash on November 1, 2014 at 9:51pm
धन्यवाद आ॰ गिरिराज जी।
Comment by Ravi Prakash on November 1, 2014 at 9:49pm
आ॰ राजेश कुमारी जी,सुझाव के साथ-साथ सराहना तथा उत्साहवर्धन के लिए हार्दिक धन्यवाद।

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