For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ताप प्रचण्ड
उफनाई नदियाँ
तपता भादों |

पथिक भूला
अंतर्मन व्यथित
तिमिर घना |

पथ ना सूझे
पिए नित गरल
कंठ भुजंग |

अल्हड़ नदी
मदमस्त लहरें
नईया डोले |

भजन राम
बसे छवि मन में
नित निहारू |

मनमोहिनी
चंदा सा मुख देख
खुशी मन में |
 
मीना पाठक 
मौलिक /अप्रकाशित 

Views: 695

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online

Comment by Meena Pathak on August 26, 2014 at 6:55pm

आदरणीया प्राची जी मुझे जरा भी मालूम नही था कि हायकू में भी तुकांतता का निर्वहन हो सकता है , अगली बार जरूर प्रयास करूँगी | हायकू सराहने के लिए दिल से आभार स्वीकारें | सादर

Comment by Meena Pathak on August 26, 2014 at 6:52pm

आदरणीय गिरिराज जी हायकू सराहने हेतु सादर आभार स्वीकारें

Comment by Meena Pathak on August 26, 2014 at 6:51pm

प्रिय महिमा स्नेहिल आभार

Comment by Meena Pathak on August 26, 2014 at 6:51pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी आप के स्नेह से अभिभूत हूँ आशा करती हूँ ये स्नेह हमेशा मिलता रहेगा | सादर आभार स्वीकारें

Comment by Meena Pathak on August 26, 2014 at 6:49pm

आदरणीया सरिता जी बहुत बहुत आभार स्वीकारें


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on August 26, 2014 at 9:53am

बहुत खूबसूरत हायकू कहे हैं आ० मीना पाठक जी 

इस गंभीर प्रयास पर मेरी हार्दिक बधाई... हायकू प्रयास में यदि पहली और तीसरी पंक्ति में तुकांतता का निर्वहन भी हो तो शिल्प में चार चाँद लग जाते हैं.... अगले हायकू प्रयास में इसे भी समाहित करके देखिएगा 

शुभकामनाएं 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on August 25, 2014 at 8:37pm

आदरणीया मीना जी , सुन्दर हाइकू के लिए बधाई |

Comment by MAHIMA SHREE on August 25, 2014 at 7:58pm

पथिक भूला 
अंतर्मन व्यथित 
तिमिर घना |

पथ ना सूझे 
पिए नित गरल
कंठ भुजंग |

अल्हड़ नदी 
मदमस्त लहरें
नईया डोले |..... बहुत बढ़िया हायकु आदरणीय मीना दी अभूत -२ बधाई 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 25, 2014 at 5:16pm

पथिक भूला 
अंतर्मन व्यथित 
तिमिर घना |-----बहुत सुन्दर 

अल्हड़ नदी 
मदमस्त लहरें
नईया डोले |---क्या बात 

भजन राम -----राम भजन कर लें तो कैसा रहे 
बसे छवि मन में 
नित निहारू |----भक्तिमय ...मन में बस गया 

सभी हाइकु बहुत सुन्दर हैं बधाई स्वीकारें प्रिय मीना जी .

Comment by Sarita Bhatia on August 25, 2014 at 1:48pm

बहुत सुंदर ,बधाई मीना जी 

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . . संयोग शृंगार

दोहा पंचक. . . .संयोग शृंगारअभिसारों के वेग में, बंध हुए निर्बंध । मौन सभी खंडित हुए, शेष रही…See More
yesterday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' posted a blog post

घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये -लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर'

२२१/२१२१/१२२१/२१२ ****** घर के रिवाज चौक में जब दान हो गये उघड़े  शरीर  आप  ही  सम्मान  हो गये।१। *…See More
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Friday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"क्षमा कीजियेगा 'मुसाफ़िर' जी "
Thursday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय भाई लक्ष्मण धामी 'मुसफ़िर' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला आपकी…"
Thursday
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आ. भाई जयहिंद जी, सादर अभिवादन। सुंदर गजल हुई है। भाई रवि जी की सलाह से यह और निखर गयी है । हार्दिक…"
Thursday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा पंचक. . . दिल

दोहा पंचक. . . . . दिलरात गुजारी याद में, दिन बीता बेचैन । फिर से देखो आ गई, दिल की दुश्मन रैन…See More
Wednesday
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"ग़ज़ल 2122   1212  22 आ कभी देख तो ले फ़ुर्सत में क्या से क्या हो गए महब्बत में मैं…"
Wednesday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Saurabh Pandey's blog post नवगीत - भैंस उसी की जिसकी लाठी // सौरभ
"  आपका हार्दिक धन्यवाद, आदरणीय लक्ष्मण धामी ’मुसाफिर’ जी   "
Feb 4

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on Sushil Sarna's blog post दोहा एकादश. . . . . पतंग
"आदरणीय सुशील सरनाजी, पतंग को लगायत दोहावलि के लिए हार्दिक बधाई  सुघड़ हाथ में डोर तो,…"
Feb 4
Jaihind Raipuri commented on Jaihind Raipuri 's blog post ग़ज़ल
"आदरणीय रवि भसीन 'शहीद' जी सादर अभिवादन बहुत शुक्रिया आपने वक़्त निकाला ग़ज़ल तक आए और हौसला…"
Feb 4
Sushil Sarna posted blog posts
Feb 3

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service