For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

“भाभी, अगर कल तक मेरी राखी की पोस्ट आप तक नहीं पँहुची तो परसों मैं आपके यहाँ आ रही हूँ  भैया से कह देना ” कह कर रीना ने फोन रख दिया|

अगले दिन भाभी ने सुबह ११ बजे ही फोन करके कहा, "रीना राखी पहुँच गई है ”

"पर भाभी मैंने तो इस बार राखी पोस्ट ही नहीं की थी !!! "


(मौलिक एवं अप्रकाशित )

Views: 1684

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 19, 2014 at 3:18pm

अन्नापूर्णा बाजपेयी जी ,आपको ये लघु कथा पसंद आई आपका हार्दिक आभार. 

Comment by annapurna bajpai on August 14, 2014 at 11:39pm

बहुत सुंदर व्यंग्यात्मक लघु कथा , ज़्यादातर घरों मे ऐसा ही होता है । आपको बहुत बहुत बधाई आ0 राजेश दीदी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 13, 2014 at 3:21pm

मीना पाठक जी ,आपको लघु कथा पसंद आई दिल से आभार आपका |

Comment by Meena Pathak on August 13, 2014 at 3:09pm

हर  दूसरे घर की कहानी ...बहुत सुन्दर शब्दकसी ,, बहुत बहुत बधाई आप को 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 12, 2014 at 8:26pm

छाया शुक्ला जी ,आपने सही कहा हर तीसरे कदम पर ऐसा कुछ देखने सुनने को मिल जाएगा रिश्तों के मायने ही बदल रहे हैं,आपको ये लघु कथा पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ ,दिल से आभार आपका. 

Comment by Chhaya Shukla on August 12, 2014 at 8:23pm

ये लघु कथा कई घरों की सच्चाई लग रही है राजेश कुमारी जी सत्य उद्घाटित कथा के लिए बधाई ; सादर नमन ! 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 12, 2014 at 8:17pm

शुभ्रांशु पाण्डेय जी,आपकी बातों से पूर्णतः सहमत हूँ कितनी रफ़्तार से ज़माना बदल रहा है रिश्ते पीछे छूटते जा रहे हैं ,आपको लघु कथा पसंद आई मेरा लिखना सार्थक हुआ दिल से आभारी हूँ | 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on August 12, 2014 at 8:15pm

आ० रवि प्रभाकर जी,आप जैसे संवेदन शील कथा कार से सकारात्मक प्रतिक्रिया पाकर ये लघु कथा सार्थक हो गई है अपने  लेखन के प्रति सराहना पाकर मेरी कलम ऊर्जस्वी हुई है दिल से आभारी हूँ . 

Comment by Shubhranshu Pandey on August 12, 2014 at 8:10pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, 

आभासी दुनिया में जीते जीते हम इतने आत्मकेन्द्रित, आत्म प्रेमी  होते गये कि भौतिक सम्बन्धों से हम पीछा छुडा़ना चाहते हैं. उन्हे भी अब एक फ़ोन काल की तरह होल्ड पे डालना चाहते हैं.

सुन्दर कथा. भाभी ने पीछा छुडाने के लिये शायद यही सोचा था.

सादर.

 

Comment by Ravi Prabhakar on August 12, 2014 at 6:54pm

आदरणीय राजेश कुमारी जी,
आपकी प्रेषित लघुकथा बहुत सुन्दर लगी। दैनिक जीवन में से एक साधारण
सी लगने वाली घटना का आपने अत्यंत सजीव चित्रण किया है।
लघुकथा का प्रभाव उसके आकार से विपरीत अनुपात रखता है।
सो, इस प्रभाव की तीक्ष्णता के लिए इसका आकार लघु होना अत्यंत ही आवश्यक है।
संभवतः यह आपकी सर्वश्रेष्ठ लघुकथा है। ग़ज़ल तो माशा अल्लाह आप बहुत ही खूबसूरत
लिखती हैं। बहुत ही प्रभावशाली प्रस्तुति एवं सुन्दर संदेश लिए इस लघुकथा के लिए आपको हृदय से शुभकामनाएं।

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' shared their blog post on Facebook
9 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ravi Shukla जी"
9 hours ago
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देवता चिल्लाने लगे हैं (कविता)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय Ashok Kumar Raktale जी"
9 hours ago
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

माँ

माँ यह शब्द नहींं केवलइस जग की माँ से काया है। हम सबकी खातिर अतिपावन माँ के आँचल की छाया है।१।माँ…See More
Tuesday
Dayaram Methani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अगर आप यों घबरा कर मैदान छोड़ देंगे तो जिन्होने एक जुट होकर षड़यन्त्र किया है वे अपनी जीत मानेंगे।…"
Tuesday
अजय गुप्ता 'अजेय replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अब, जबकि यह लगभग स्पष्ट हो ही चुका है कि OBO की आगे चलने की संभावना नगण्य है और प्रबंधन इसे ऑफलाइन…"
May 18
amita tiwari posted a blog post

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें

बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें बेगुनाही और इन्साफ की बात क्यों सोचती हैं ये औरतें चुपचाप अहिल्या बन…See More
May 15
amita tiwari commented on amita tiwari's blog post गर्भनाल कब कट पाती है किसी की
" मान्य,सौरभ पांडे जीआशीष यादव जी , , ह्रदय से आभारी हूँ. स्नेह बनाए रखियगा | सौरभ जी ने एक…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on amita tiwari's blog post बहुत सोचती हैं क्यों ये औरतें
"आदरणीया अमिताजी, तार्किकता को शाब्दिक कर तटस्थ सवालों की तर्ज में बाँधा जाना प्रस्तुति को रुचिकर…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर''s blog post हरकत हमें तो वैद की रखती तनाव में -लक्ष्मण धामी 'मुसफिर'
"आदरणीय लक्ष्मण धामी जी, आपकी प्रस्तुति निखर कर सामने आयी है. सभी शेर के कथ्य सशक्त हैं और बरबस…"
May 14

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय नीलेश भाई, आपका स्वागत है.     करेला हो अथवा नीम, लाख कड़वे सही, लेकिन रुधिर…"
May 14
Nilesh Shevgaonkar replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"आदरणीय बाग़ी जी एवं कार्यकारिणी के सभी सदस्यगण !बहुत दुखद है कि स्थिथि बंद करने तक आ गयी है. आगे…"
May 13

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service