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लघुकथा : बदलाव (गणेश जी बागी)

                                निगरानी टीम रघुआ को गिरफ्तार कर अपने साथ ले गई, दरअसल वो सब्जी बाज़ार मे अवैध बिजली वितरण का धंधा स्थानीय कर्मचारियों और अधिकारियों की मिलीभगत से चला रहा था और प्रतिदिन प्रति बल्ब २० रुपये की वसूली सब्जी दुकानदारों से करता था.

                                लेकिन दूसरे ही दिन वो पुलिस हिरासत से वापस आ गया. कुछ विशेष नही बदला, सब कुछ पहले की तरह ही चलने लगा, बस अब बिजली किराया प्रतिदिन ३० रुपया हो गया था.

(मौलिक व अप्रकाशित)

पिछला पोस्ट => लघुकथा : महाचोर

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सदस्य कार्यकारिणी
Comment by मिथिलेश वामनकर on February 12, 2015 at 1:52am

कटु सत्य 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2014 at 7:09pm

आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, लघुकथा पर आपकी उपस्थिति हौसलाफजाई करती है, सराहना हेतु बहुत बहुत आभार। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2014 at 7:06pm

लघुकथा आप तक पहुँच सकी,लेखन कर्म सार्थक हुआ, उत्साहवर्धन करती टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय आशुतोष मिश्र जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2014 at 7:06pm

सराहना हेतु आभार आदरणीय जितेन्द्र गीत जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2014 at 7:03pm

आदरणीया राजेश कुमारी जी, लघुकथा पर आपकी उपस्थिति उत्साहवर्धन का कारण है, हौसलाफजाई हेतु बहुत बहुत आभार।


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 10, 2014 at 7:03pm

बहुत बहुत आभार आदरणीय दीपक कुलवी जी .

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on August 8, 2014 at 9:02am

गले मिले मौसेरे भाई । दोनों की बन आई ॥

इस कथा से यह शिक्षा मिलती है कि .......                                                                                                                 मिल बाँट के हम सब खायें। इस देश का  धर्म निभायें॥                                                                                                   लघु कथा पर मेरी हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय गणेश भाई 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 7, 2014 at 10:07pm

उत्साहवर्धन करती टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार आदरणीय विनय कुमार सिंह जी। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 7, 2014 at 10:06pm

आदरणीय उमाशंकर जी, ओ बी ओ परिवार में आपका सदैव स्वागत है, हम सभी आपका इन्तजार करते हैं, मेरी रचनाओं को पसंद करने हेतु दिल से आभारी हूँ। 


मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on August 7, 2014 at 10:03pm

आप के कहे से सहमत हूँ आदरणीय डॉ गोपाल नारायण जी, आपकी उत्साहवर्धन करती टिप्पणी हेतु बहुत बहुत आभार।  

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