For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है

आज यों निर्लज्जता सरिता सी बहती जा रही है  

द्वेष इर्षा और घृणा ले साथ बढती जा रही है

 

बिन परों के आसमाँ की सैर के सपने संजोते

पा रहे पंछी नए आयाम सब कुछ खोते खोते

 

लालसा भी कोयले पर स्वर्ण मढ़ती जा रही है

 

दिन गए वो खेल के जब खेलते थे सोते सोते  

अब गुजरता है लडकपन पुस्तकों का बोझ ढोते  

 

दौड़ है बस होड़ की जो क्या क्या गढ़ती जा रही है

 

काश के पंछी ही होते लौट आते शाम होते

कोसते भगवान् को भगवान ही यों रोते रोते

 

मंदिरों के शीर्ष पर भी गर्द चढ़ती जा रही है

 

संदीप पटेल “दीप”

मौलिक एवं अप्रकाशित

Views: 354

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on August 1, 2014 at 5:57pm

कैसे हैं ? कहाँ हैं ? बहुत दिनों बाद कोई प्रस्तुति आयी है..

शुभ-शुभ

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on July 30, 2014 at 10:51am

मंदिरों के शीर्ष पर भी गर्द चढ़ती जा रही है --- वाह ! बहुत खूब ! हम कहाँ जा रहे है ? अब ह्रदय में नीरसता ही व्याप रही है 

हार्दिक बधाई श्री संदीप भाई 

Comment by डॉ गोपाल नारायन श्रीवास्तव on July 28, 2014 at 11:10am

संदीप जी

सुन्दर प्रयास है i

लालसा भी कोयले पर स्वर्ण मढ़ती जा रही है

 और

घोसलों की शीर्ष पर भी गर्द चढ़ती जा रही है

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश जी।नमस्कार। चित्र अनुरूप अच्छी छंद रचना हेतु हार्दिक बधाई।"
37 seconds ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई दिनेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्रानुरूप उत्तम छन्द हुए है। हार्दिक बधाई।"
10 minutes ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' जी, प्रदत्त चित्र पर सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार…"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव जी, प्रदत्त चित्र पर सार्थक सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार करें।"
9 hours ago
Dayaram Methani replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आदरणीय दिनेशकुमार विश्वकर्मा जी, प्रदत्त चित्र अनुकूल अति सुंदर सृजन के लिए हार्दिक बधाई स्वीकार…"
9 hours ago
DINESH KUMAR VISHWAKARMA replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"कामरूप छंद लो बन गई है, आज अपनी, धाक पर सरकार ।सामर्थ्य है फिर, क्या किसी में, जो सके ललकार ।।जीता…"
12 hours ago
AMAN SINHA posted a blog post

तुम वीरांगना हो जीवन की

तुम वीरांगना हो जीवन की, तुम अपने पथ पर डटी रहोचाहे उलाहना पाओ जितनी, तुम अपने जिद पर अड़ी रहोगर्भ…See More
15 hours ago
Sushil Sarna posted a blog post

फिर किसी के वास्ते .......

फिर किसी के वास्ते ......क्यूँ दिलाएं हम यकीं दिल को किसी  के वास्ते ।हो गया दिल आज गमगीं फिर किसी…See More
15 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"आ. भाई अखिलेश जी, सादर अभिवादन। प्रदत्त चित्र को साकार करते हुए उत्तम छन्द रचे हैं। हार्दिक…"
19 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"वाह बहुत खूब गजल हुई है है .। बहुत खूब .. "
23 hours ago
gumnaam pithoragarhi commented on Rachna Bhatia's blog post ग़ज़ल-अपना है कहाँ
"वाह बहुत खूब गजल हुई है है .। बहुत खूब .. "
23 hours ago
लक्ष्मण धामी 'मुसाफिर' replied to Admin's discussion "ओबीओ चित्र से काव्य तक छंदोत्सव" अंक 133 in the group चित्र से काव्य तक
"बन्दूक रखकर, भूमि पर यूँ, एक तालीबान।पुस्तक उठाये, हाथ में फिर, ढूँढता है ज्ञान।।विस्मित खड़ा है,…"
yesterday

© 2022   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service