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मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

१२२२   १२२२    १२२२   १२२

मेरे हाथों में तारे देख कर वो क्यूँ जला है

मेरे मालिक तेरा इंसान जाने क्या बला है

 

लड़ा ताउम्र दरिया हौसलों के साथ अपने

लगाया था गले जिनको उन्हें ही क्यूँ खला है

 

घुसे थे झाड़ियों में तो बहुत ज्यादा संभलकर

थे हम भी बेखबर उस नाग से जो घर पला है   

 

बड़ा मुश्किल है फहराना ये परचम शोहरत का

यकीनन  कारवा पहले या आखिर में चला है

 

नहीं शिकवा गिला हमको कभी भी आपसे था

कभी खिलता ये  गुल भी नागफनियों में भला है

 

हकीकत की ही तो मैं सच बयानी कर रहा हूँ  

सफ़र में जो चला है वो अकेला ही चला है

 

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है

 

  

 

मौलिक व अप्रकाशित 

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Comment by Maheshwari Kaneri on June 13, 2014 at 7:18pm

बहुत खूबसूरत गजल ,आशुतोष जी  हौसला बढाने के लिए आभार आप का 

Comment by Meena Pathak on June 12, 2014 at 9:51pm

क्या बात है .. बहोत खूब ... बधाई 

Comment by annapurna bajpai on June 12, 2014 at 7:56pm

वाह !! बहुत खूबसूरत गजल , आ0 आशुतोष जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 12, 2014 at 6:01pm

आदरनीय आशुतोष भाई , बहुत खूब सूरत ग़ज़ल हुई है , आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥

जिगर के गहरे में ये अजनबी सा डर है मेरे

भला इंसान क्यूँ लगता नहीं मुझको भला है --- बहुत खूब भाई जी , बधाई ॥

 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:02pm

आदरणीय लक्षमण जी हौसल अफजाई के लिए तहे दिल शुक्रिया सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 2:00pm

आदरणीय गोपाल सर..आपकी प्रतिक्रिया मेरे लिए आशीर्वाद है ..जिसकी मैं सतत कामना करता हूँ ..हार्दिक धन्यवाद और सादर प्रणाम के साथ 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:59pm

आदरणीया डॉ प्राची जी ..आपके ये शब्द मेरा मनोबल बढाते हैं ..मुझे रचना धर्मिता की नयी उर्जा प्रदान करते हैं ..भविष्य में भी आपकी प्रतिक्रियाओं मुझे मिलती रहेगी इसी कामना के साथ ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:53pm

आदरणीय नरेन्द्र जी ..रचना पर आपकी प्रतिक्रिया के लिये हार्दिक आभार ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:23pm

आदरणीय जीतेन्द्र जी ..आपकी स्नेहिल शब्दों के लिए लिए तहे दिल शुक्रिया ..सादर 

Comment by Dr Ashutosh Mishra on June 12, 2014 at 1:20pm

आदरनीय अभिनव जी ..उत्साहवर्धक आपकी इस प्रतिक्रिया के लिए  तहे दिल धन्यवाद ..सादर प्रणाम के साथ 

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