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कुंडलिया छंद-लक्ष्मण लडीवाला

महाराणा प्रताप की जयंती पर समर्पित -कुंडलिया छंद

रचते है इतिहास ही,राणा जैसे वीर

माँ वसुधा के लाल ये,ये ही असली पीर 
ये ही असली पीर, युद्ध से जिनका नाता 
दुश्मन को दे मार,चैन तब दिल में आता 
कह लक्ष्मण कविराय,रणभूमि में जो मरते 
वीरो का इतिहास, वीर शहीद वे रचते ||

(2)

माता पन्ना धाय ने, पाला वीर प्रताप,

दुश्मन लोहा मानते, पाकर के संताप |

पाकर के संताप, धाय पन्ना को कोसे

कर बलिदान स्व पूत,वीर प्रताप को पोसे

कह लक्ष्मण इतिहास,वीर की गाथा गाता

माँ वसुधा को नाज, धन्य है ऐसी माता |

(स्वरचित व अप्रकाशित)

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Comment

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 9, 2014 at 9:02am

दूसरी रचना के शिल्प को पुनः देखता आदरणीय | दोने छंदों पर आपकी उत्साहवर्धन टिप्पणियों से मनोबल बढ़ा है | आपका बहुत बहुत आभार | सादर 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 9, 2014 at 8:49am

जी श्री विजय मिस्त्र जी, पन्ना धाय जैसी बलिदानी पर माँ वदुधा भी कर करती होगी | आभार स्वीकारे 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on June 8, 2014 at 9:08pm

कथ्य से दोनों छन्द समृद्ध हैं. अलबत्ता, शिल्प से दूसरी वाली रचना अधिक प्रभावी है.

सादर

Comment by विजय मिश्र on June 4, 2014 at 6:32pm
लक्ष्मणभाई , रचना का सौंदर्य है पन्नाधाईं का समर्पित और बलिदानी इतिहास | स्मरण कराने के लिए आदर |
Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 4, 2014 at 11:44am

कुंडलिया छंद पसंद करने के लिए हार्दिक आभार आपका आदरणीया अन्नपूर्ण बाजपेई जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 4, 2014 at 11:39am

छंद पसंद करने के लिए आभार आपका श्री गिरिराज भंडारी जी 

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on June 4, 2014 at 11:38am

हार्दिक आभार आपका श्री शिज्जु शकूर भाई 

Comment by annapurna bajpai on June 4, 2014 at 7:49am

सुंदर कुण्डलिया , बधाई आपको आ0 लड़ीवाला जी । 


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on June 3, 2014 at 10:17pm

आदरणीय लक्ष्मण भाई , सुन्दर कुंडलिया रचना के लिये आपको बधाई ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by शिज्जु "शकूर" on June 2, 2014 at 4:40pm

अच्छी रचनायें हैं आदरणीय लक्ष्मण सर बहुत बहुत बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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