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चुनावी चौपई ( चौपई छंद ) अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव

चौपई छंद - प्रति चरण 15 मात्रायें चरणान्त गुरु-लघु

==================================

ऋतु चुनाव की जब आ जाय। यहाँ वहाँ नेता टर्राय॥

सज्जन दिखते, मन में खोट। दांत निपोरें, माँगे वोट॥

 

जिसकी बन जाती सरकार। सेवा नहीं, करते व्यापार॥

नेता अफसर मालामाल। देश बेचने वाले दलाल॥

 

जब अपनी औकात दिखांय। बिना सींग दानव बन जांय॥

नख औ दांत तेज हो जाय। देश नोंचकर कच्चा खांय॥

 

है इनमें कुछ अच्छे लोग। न लोभी हैं, न कोई रोग़॥

सोचें समझें, तब दें वोट। बार - बार ना खायें चोट॥

 

झूठे नारे, गलत बयान। लाख समस्या एक निदान॥

बदलें “मत” से हिंन्दुस्तान। फिर होगा यह देश महान॥

...............................................

अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव, धमतरी 

(मौलिक व अप्रकाशित)   

  

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Comment

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Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 24, 2014 at 6:34pm
  • आदरणीय सत्यनारायण  भाई,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

Comment by Satyanarayan Singh on May 23, 2014 at 5:25pm

इस  सामयिक छंद पर हार्दिक बधाई स्वीकार करें आदरणीय 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 12:31pm
  • आदरणीय जितेन्द्र भाई,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 12:29pm

आदरणीय अरुण भाईजी,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

छंद लिखा जो  मन को भाय। खुशी और दूनी हो जाय॥ 

आप सभी से सीखा भ्रात। वरना अपनी क्या औकात॥ 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 12:00pm

छोटे  भाई गिरिराज्,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 11:56am

आदरणीय अशोक भाईजी,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

सही कह रहे हैं आप एक ही चौपई में दो गलतियाँ हो गई, आपकी और सौरभ भाई की चौपई ध्यान से पढ़ने के बाद भी। 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 11:45am

आदरणीया राजेश कुमारीजी,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

सँभलकर कदम रखने के बाद भी ठोकर लग ही जाती है ( मात्रा गिनने में गलती हो ही जाती है)

पहले  लिखा था.. 

भ्रष्ट व्यवस्था, गंदी चाल। नेता अफसर मालामाल। 

बदलने से त्रुटि भी हो गई और वो भाव भी नहीं बन पाया जो ऊपर के वाक्य में है  

सादर 

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 11:33am

आदरणीया सरिता जी,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

Comment by अखिलेश कृष्ण श्रीवास्तव on May 3, 2014 at 11:32am

आदरणीया कुंतीजी,

रचना की प्रशंसा केलिए हार्दिक धन्यवाद आभार

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on May 3, 2014 at 12:08am

बहुत बढ़िया चौपाई आदरणीय अखिलेश जी, हार्दिक बधाई आपको

कृपया ध्यान दे...

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