For any Query/Feedback/Suggestion related to OBO, please contact:- admin@openbooksonline.com & contact2obo@gmail.com, you may also call on 09872568228(योगराज प्रभाकर)/09431288405(गणेश जी "बागी")

ग़ज़ल - आज दिल उनका होने वाला है - इमरान ख़ान

********************************
आज दिल उनका होने वाला है
********************************

बहरे खफीफ मुसद्दस मखबून
फ़ायलातुन मुफाएलुन फालुन
2122 1212 22

होश लगता है खोने वाला है,
आज दिल उनका होने वाला है.

हर ख़ुशी जागने लगी दिल की,
ग़म थका है तो सोने वाला है.

कल जो जारो कतार था मंज़र,
हँस रहा देखो रोने वाला है.

रूह ये धूल से भरी मेरी,
आज आकर वो धोने वाला है.

दिल की बंज़र पड़ी ज़मीनों पर,
बीजे उल्फत वो बोने वाला है.

ये सफ़र हो गया है नूरानी,
अब अँधेरा न होने वाला है.

"मौलिक एवं अप्रकाशित"

Views: 517

Comment

You need to be a member of Open Books Online to add comments!

Join Open Books Online


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on March 22, 2014 at 10:07pm

इमरान भाई, आपकी ग़ज़ल अच्छी है लेकिन बार-बार मात्रा गिराना तनिक चुभता है.
बधाई स्वीकारें.
 

Comment by इमरान खान on February 26, 2014 at 4:04pm

आपकी दाद के लिए शुक्रिया मोहतरमा राजेश कुमारी साहिबा, आपकी इस्लाह के लिए भी पुरखुलूस शुक्रिया. बिलकुल सही बताया अपने, मैं दोनों शेर इस तरह बदल रहा हूँ.

रूह ये गर्द से भरी मेरी,

आज आकर वो धोने वाला है.

ये सफ़र हो गया है नूरानी,

अब अँधेरा न होने वाला है.

Comment by इमरान खान on February 26, 2014 at 3:57pm

बहुत शुक्रिया जनाब गिरिराज साहब आपका.


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on February 25, 2014 at 6:12pm

आदरनीय इमरान भाई , बहुत उम्दा ग़ज़ल कही है आपको हार्दिक बधाइयाँ ॥


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by rajesh kumari on February 25, 2014 at 5:17pm

बहुत सुन्दर ग़ज़ल लिखी है इमरान खान जी दाद कबूले 

एक इस्स्लाह --गर्द और धूल से भरी मेरी,----इस मिसरे में बात स्पष्ट नहीं दुसरे मिसरे पर निर्भर हो रहा है इसे इस तरह करके देखिये 

रूह जो  गर्द से भरी मेरी ,देख वो आज धोने वाला है या ---

प्यार इक आज धोने वाला है 

ये सफ़र हो गया है नूरानी,
अब न अंधेरा होने वाला है.----अब अँधेरा न होने वाला है 


.

कृपया ध्यान दे...

आवश्यक सूचना:-

1-सभी सदस्यों से अनुरोध है कि कृपया मौलिक व अप्रकाशित रचना ही पोस्ट करें,पूर्व प्रकाशित रचनाओं का अनुमोदन नही किया जायेगा, रचना के अंत में "मौलिक व अप्रकाशित" लिखना अनिवार्य है । अधिक जानकारी हेतु नियम देखे

2-ओपन बुक्स ऑनलाइन परिवार यदि आपको अच्छा लगा तो अपने मित्रो और शुभचिंतको को इस परिवार से जोड़ने हेतु यहाँ क्लिक कर आमंत्रण भेजे |

3-यदि आप अपने ओ बी ओ पर विडियो, फोटो या चैट सुविधा का लाभ नहीं ले पा रहे हो तो आप अपने सिस्टम पर फ्लैश प्लयेर यहाँ क्लिक कर डाउनलोड करे और फिर रन करा दे |

4-OBO नि:शुल्क विज्ञापन योजना (अधिक जानकारी हेतु क्लिक करे)

5-"सुझाव एवं शिकायत" दर्ज करने हेतु यहाँ क्लिक करे |

6-Download OBO Android App Here

हिन्दी टाइप

New  देवनागरी (हिंदी) टाइप करने हेतु दो साधन...

साधन - 1

साधन - 2

Latest Activity

Sheikh Shahzad Usmani replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
" सादर नमस्कार आदरणीय मंच। कुछ अन्य सुझाव: 1- सदस्यों से सहयोग राशि एकत्रित कर ओबीओ की पत्रिका…"
yesterday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"अच्छा सुझाव"
yesterday
Gajendra shrotriya replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"प्रतिष्ठित मंच के सभी सम्माननीय सदस्यों को सादर प्रणाम🙏ओ बी ओ परिवार के समक्ष बनी इस विषम परिस्थिति…"
yesterday
Manjeet kaur replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"ओ बी ओ मंच से बहुत कुछ सीखने को मिला इसके बंद होने की खबर दुखद और पीड़ादाई लगी। अजय गुप्ता जी की…"
Saturday
Manjeet kaur commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)
"धर्मेंद्र कुमार जी आज के मुश्किल दौर में इतना जिगरा ! यथार्थ और सटीक वर्णन के लिए बहुत बहुत बधाई"
Saturday
Sushil Sarna posted a blog post

दोहा सप्तक. . . .मंच

दोहा सप्तक. . . . . मंचअभिनय करते मंच पर, माटी के किरदार ।जीवन की अनुभूतियाँ, करते वो साकार ।।यह जग…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह posted a blog post

रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिए (ग़ज़ल)

बह्र: 22 22 22 22 22 2 रहना हो भारत में जिंदा, चुप रहिएजंगल का कानून है पहला, चुप रहिएमँहगाई से…See More
Saturday
रोहित डोबरियाल "मल्हार" posted a blog post

दास्तां

एक हो दास्तां तो सुनाएं,लंबी है कहानी, फिर कभी।मिले थे जिस जगह इक उम्र पहले,वो धुंधली सी निशानी,…See More
Saturday
Awanish Dhar Dvivedi posted a blog post

समय

समय को दोष देना क्यूँ समय जीना सिखाता है समय की गति सुनिश्चित है समय ही तो विधाता है।। समय का खेल…See More
Saturday
धर्मेन्द्र कुमार सिंह commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"बहुत बहुत शुक्रिया आदरणीय सौरभ जी"
Saturday
आशीष यादव replied to Admin's discussion अति आवश्यक सूचना : कृपया अवश्य अवगत हों .....
"उम्मीद है कि इस पटल से संबंधित कोई अच्छी खबर आएगी।"
Friday

सदस्य टीम प्रबंधन
Saurabh Pandey commented on धर्मेन्द्र कुमार सिंह's blog post देश की बदक़िस्मती थी चार व्यापारी मिले (ग़ज़ल)
"इस सुंदर बुनावट और कहन पर आज नजर पड़ी, आदरणीय धर्मेन्द्र जी.  हार्दिक बधाई   "
May 25

© 2026   Created by Admin.   Powered by

Badges  |  Report an Issue  |  Terms of Service