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बिहार बिकाश आउर एकर मज़बूरी ,

बिहार बिकाश आउर एकर मज़बूरी ,
का कही एकर मज़बूरी ,
हर दम इ मजबुर रहे,
नेता एकरा मिलले अइसन ,
जाती से सराबोर रहे ,
एकर अइसन भूगोल बनल बा ,
जाती आउर छेत्रन के नाते ,
कही भोजपुरी कही मगह बा ,
कोई मौथली बोलत बाटे ,
ऊपर से मिले घाव पे नमक ,
एकर अपने बनल बा दीमक ,
दिल्ली वाला बारे चलाक ,
एक भाई के कईले पास ,
आपस में इ साथ ना दिहन ,
एकर माजा उ काहे ना लिहन,
जाती बाद बा एकर धुरी ,
बिहार के बाटे इ मज़बूरी ,
मगह मैथली ना भोजपुरी ,
राज में हो केकर मंजूरी ,
येही कारन हिंदी ह भासा ,
भोजपुरी के का ह आसा ,
हमके लागत बा इ सुधरी ,
बिहार बनल बिकाश के धुरी ,
सड़क एकर अब दमकत बाटे ,
दिल्ली अब कहात इ बाटे ,
बिकाश में अब हाथ बटाई ,
जवन चाहत बानी उहे पाई ,

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सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Rana Pratap Singh on September 6, 2010 at 6:15pm
तीर सही निशाने की और है ...गुरु जी बिहार की समस्याओं पर अच्छी कविता है|
Comment by PREETAM TIWARY(PREET) on March 22, 2010 at 4:53pm
bahut hi shaandaar guru jee...hamesha ke tarah ek aur zordaar kavita.....

maane ke pari guru jee raua ke.....fatafat kavita likhe me raua maharath haasil baa...

jai ho guru jee ke....

मुख्य प्रबंधक
Comment by Er. Ganesh Jee "Bagi" on March 22, 2010 at 4:51pm
बहुत सही कहनी हा गुरू जी, फूट डालो आ राज करो के निति ही राजनिति आज के समय मे बन गईल बा, आज के राजनिति पर बहुत अच्छा प्रहार रउआ अपना कविता मे कईले बानी, बहुत बढ़िया ।

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