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सवाल --गजल --उमेश कटारा

2122 2121 222

आप तो सचमुच कमाल करते हो
बेवफा होकर सवाल करते हो

जंग में तो हार जीत जायज है 
हारने का क्यों मलाल करते हो

क्या हुआ जो बेवफा मुहब्बत थी
मुद्दतों से ही बवाल करते हो

.

पत्थरों के शह्र में बसर है तो
क्यों बिखरने का ख़याल करते हो

.

आदमी तो मर गया कभी से था

आत्मा को भी हलाल करते हो

उमेश कटारा

मौलिक एंव अप्रकाशित रचना

Views: 750

Comment

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Comment by बृजेश नीरज on November 13, 2013 at 11:56pm

बहुत सुन्दर! आपको हार्दिक बधाई!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on November 13, 2013 at 11:42pm

पत्थरों के शह्र में बसर है तो
क्यों बिखरने का ख़याल करते हो..  वाह वाह

एक बात भाईसाहब,  बेवफ़ा ही तो सवाल करता /करती है.

शुभ-शुभ

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:41pm

शुक्रिया अरुन निगम जी 

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:40pm

शुक्रिया सुशील जोशी जी 

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:40pm

शुक्रिया विजय मिश्र जी 

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:39pm

शुक्रिया अरुन अनन्त जी आपको

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:39pm

शुक्रिया राम शिरोमणि जी आपको 

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:38pm

शुक्रिया निलेश भाई जी आपके स्नेह के लिये

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:37pm

सुक्रिया मोहन बेगोवाल जी 

Comment by umesh katara on November 11, 2013 at 6:37pm

सुक्रिया Rajesh kumari ji आपका मार्गदर्शन सर आँखों पर है आभार 

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