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रावण जितने देश में घूम रहे हैं आज
हर बाला सहमी हुई, फैला रावण राज
फैला रावण राज, माँ बहनों को बचाओ
कपटी, नेता, भ्रष्ट ,जेल इन्हें पहुँचाओ
नहीं जमानत होय, बेल लें पापड़ कितने
घूम रहे हैं आज देश में रावण जितने //

.............मौलिक व अप्रकाशित ........

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Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 27, 2013 at 7:03pm

सुन्दर कुण्डलिया छंद रचने के लिए हार्दिक बधाई सरिता भाटिया जी | सादर 

Comment by रमेश कुमार चौहान on October 27, 2013 at 6:39pm

आदरणीया सरिता जी , अच्छी कुन्डलिया की रचना की है आपने , बहुत बहुत बधाई

Comment by VISHAAL CHARCHCHIT on October 26, 2013 at 11:29pm

सार्थक एवं सराहनीय कुंडलिया !!!!

Comment by Sarita Bhatia on October 26, 2013 at 12:04pm

आदरणीय सुशील भाई हार्दिक अभिनन्दन 

Comment by Sarita Bhatia on October 26, 2013 at 12:03pm

आदरणीय अखिलेश जी सलाह के लिए हार्दिक आभार 

Comment by Sarita Bhatia on October 26, 2013 at 12:02pm

आदरणीय केवल जी आभारी हूँ 

Comment by Sarita Bhatia on October 26, 2013 at 12:02pm

आदरणीय गिरिराज जी तह दिल से शुक्रिया 

Comment by Sarita Bhatia on October 26, 2013 at 12:01pm

हार्दिक आभार भाई राम जी 

Comment by Sushil.Joshi on October 26, 2013 at 7:36am

कुंडलिया पर अच्छा प्रयास है आदरणीया सरिता जी..... हार्दिक बधाई आपको......बाकी आ0 अखिलेश जी की सलाह पर गौर कीजिएगा.....

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 25, 2013 at 8:50pm

आ0 सरिता जी,  सुन्दर कुंडलियां के लिए आपको तहेदिल से हार्दिक बधार्इ।  सादर,

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