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विचारो का बीज.............

हाथ में कुछ बीज
यूँ ही ले के कागजो
पे बोने आ गयी हूँ
विचारो के बीज
सबको कहाँ मिलते हैं
मुझे भी बस एक ही मिला
एक बाग़ लगाना है
इसलिए मुट्ठी
कस कर बंद हैं
इस बीज को वृक्ष
वृक्ष से फिर बीज
इसी तरह
तो लगेगा बाग़
माली ने बताया था
माली वो जो
सबके भीतर हैं
मुझे मिला था
एक रोज जब
उसी ने दिया था
 ये एक बीज
''विचारो का बीज ''

"मौलिक व अप्रकाशित"

Views: 694

Comment

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Comment by savita agarwal on October 18, 2013 at 9:24pm

जितेन्द्र 'गीत' जी, coontee mukerji जी ..बहुत बहुत आभार ...

Comment by savita agarwal on October 18, 2013 at 9:23pm
Laxman Prasad Ladiwala जी बहुत आभार की रचना को आपका आशीर्वाद मिला
Comment by savita agarwal on October 18, 2013 at 9:22pm
Kewal Prasad जी बहुत आभार ...
Comment by savita agarwal on October 18, 2013 at 9:20pm
Sushil.Joshi जी बहुत बहुत आभार आपका...
Comment by savita agarwal on October 18, 2013 at 9:19pm
आदरणीय बृजेश नीरज जी आभार आपका...
Comment by coontee mukerji on October 18, 2013 at 1:07pm

माली वो जो
सबके भीतर हैं
मुझे मिला था
एक रोज जब
उसी ने दिया था
 ये एक बीज
''विचारो का बीज '.....बहुत सुंदर.

Comment by जितेन्द्र पस्टारिया on October 18, 2013 at 12:11am

बहुत सुंदर रचना, बधाई स्वीकारें आदरणीया सविता जी

Comment by लक्ष्मण रामानुज लडीवाला on October 17, 2013 at 10:00pm

माली वो जो
सबके भीतर हैं
मुझे मिला था
एक रोज जब
उसी ने दिया था
 ये एक बीज--------बहुत सुन्दर भाव रचना सार्थक सन्देश देती | हार्दिक बधाई आदरणीया सविता अग्रवाल जी 

Comment by केवल प्रसाद 'सत्यम' on October 17, 2013 at 8:32pm

आदरणीया सविता जी,  वाह!   विचारों के बीज नूतन बिम्ब के साथ सुन्दर अभिव्यकित और सोददेश्य रचना के लिए तहेदिल से बहुत-बहुत बधार्इ स्वीकारें। सादर,

Comment by Sushil.Joshi on October 17, 2013 at 8:21pm

वाह.... अति सुंदर एवं संदेशपरक रचना है..... बहुत बहुत बधाई हो आदरणीया सविता जी....

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