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मीठी सी एक मनुहार................

पारदर्शी शीशो पर
लगा दी काली चादर
अब बाहर वाले
नही देख सकते
 भीतर का हाल
ठीक उसी तरह
जैसे तुमने
अपने चेहरे की
अतुलनीय मुस्कराहट से
बंद कर दिए
भीतर के सभी किवाड़
जो आया जितना आया
सब डालती जा रही हो
अब डर सा
लग रहा हैं मुझे
खिडकियों की
काली  चादर
कुरच रही हैं
हवा बाहर  की
ओर मुझे
दिखाई दे रही हैं
एक रौशनी सी
जो सब बहा ले जाएगी
अबकी जो ये कमरा
खाली  हो जाये तो
बंद मत करना
घुटन सी होती हैं मुझे
आत्मा हूँ तेरी में
इतनी तो कर ही सकती हूँ
मैं  मीठी सी एक  मनुहार ......

.
."मौलिक व अप्रकाशित"

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Comment

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Comment by savita agarwal on October 25, 2013 at 10:18am

sushil joshi ji bahut aabhar aapka....

Comment by Sushil.Joshi on October 24, 2013 at 5:01am

अबकी जो ये कमरा
खाली  हो जाये तो
बंद मत करना
घुटन सी होती हैं मुझे
आत्मा हूँ तेरी में
इतनी तो कर ही सकती हूँ
मैं  मीठी सी एक  मनुहार ..... वाह बहुत सुंदर रचना है.... बधाई आ0 सविता जी...

Comment by savita agarwal on October 20, 2013 at 9:03pm

आभार आप सभी गुनी जानो का .......रचना आपको पसंद आई लेखन का उद्देश्य सार्थक हुआ...

Comment by Meena Pathak on October 20, 2013 at 11:46am

क्या  बात, बहुत सुन्दर रचना | बधाई स्वीकारें 

Comment by Neeraj Neer on October 20, 2013 at 11:27am

सुन्दर रचना आदरणीय 

Comment by coontee mukerji on October 20, 2013 at 2:01am

बहुत सुंदर रचना है आदरणीया.

Comment by savita agarwal on October 19, 2013 at 9:44pm

आप सभी का स्नेह ओर आशीर्वाद रचना को मिला मन प्रसन्न हो गया .......आशीवाद बनाये रखे.......आभार आपका


सदस्य कार्यकारिणी
Comment by गिरिराज भंडारी on October 19, 2013 at 9:10pm

आदरनीया सविता जी , बहुत सादगी और सच्चाई भरी मनुहार !!!! सुन्दर रचना , बधाई !!!!


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Dr.Prachi Singh on October 19, 2013 at 8:54pm

अपनों पर सचमुच इतना हक तो होता है कि उनसे ऐसी मनुहार की जाए ताकि वो फिर व्यवहारी दीवारों या मानसिक बंद दरवाजों/खिडकियों  में कैद न कर लें अपने आप को...

बहुत सुन्दर.

हार्दिक शुभकामनाएं 


सदस्य टीम प्रबंधन
Comment by Saurabh Pandey on October 19, 2013 at 8:30pm

बहुत-बहुत बधाई स्वीकारें इस अतुकान्त रचना के लिए, आदरणीया. 

खिडकियों की
काली  चादर
कुरच रही हैं
हवा बाहर  की
ओर मुझे
दिखाई दे रही हैं
एक रौशनी सी
जो सब बहा ले जाएगी
अबकी जो ये कमरा
खाली  हो जाये तो
बंद मत करना
घुटन सी होती हैं मुझे

किसी आत्मीय के अतुकान्त व्यवहार को शिद्दत से उकेरने का प्रयास किया है आपने.

बधाई...

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